उत्तर प्रदेश में 'TLPS 2025' रिपोर्ट का विमोचन: प्रारम्भिक कक्षाओं में सुधरेगी शिक्षा की गुणवत्ता, क्लस्टर बैठकों में लागू होंगी 10 मुख्य सिफारिशें
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बड़ी पहल: लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF), टाटा ट्रस्ट और बेसिक शिक्षा विभाग की संयुक्त रिपोर्ट जारी।
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सकारात्मक आंकड़े: 97% शिक्षकों को बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान (FLN) लक्ष्यों की जानकारी, 94% को मिला अकादमिक सहयोग।
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प्रशासनिक निर्देश: अपर मुख्य सचिव ने रिपोर्ट की 10 प्रमुख अनुशंसाओं को विद्यालय स्तर पर लागू करने का दिया आदेश।
लखनऊ (30 जून 2026)। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया है। लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF) ने टाटा ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से आज गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 'उत्तर प्रदेश टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे' (TLPS) 2025 रिपोर्ट का भव्य विमोचन किया।
यह रिपोर्ट राज्य के प्राथमिक विद्यालयों की कक्षा 1 और 2 में चल रहे शिक्षण-अधिगम व्यवहारों का एक व्यापक और विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसका मुख्य उद्देश्य कक्षा-कक्ष की प्रक्रियाओं, शिक्षक सहायता तंत्र और शिक्षण की गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाने के लिए साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) व्यावहारिक सुझाव देना है।
🏛️ शीर्ष अधिकारियों और नीति-निर्माताओं की उपस्थिति
यह विमोचन कार्यक्रम "पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग: ट्रांसफॉर्मिंग क्लासरूम प्रैक्टिसेज" विषय के अंतर्गत आयोजित किया गया। इस अवसर पर शिक्षा जगत के कई शीर्ष अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे:
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श्री पार्थसारथी सेन शर्मा (अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, उ.प्र. सरकार)
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सुश्री मोनिका रानी (महानिदेशक, स्कूल शिक्षा)
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श्री गणेश कुमार (निदेशक, एससीईआरटी - SCERT)
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समग्र शिक्षा के वरिष्ठ अधिकारी, टाटा ट्रस्ट और एलएलएफ (LLF) के प्रतिनिधि, डायट (DIET) मेंटर्स, जिला शिक्षा अधिकारी तथा राष्ट्रपति व राज्य पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक।
📊 सर्वे का दायरा और छह प्रमुख आयाम
यह गहन सर्वेक्षण नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच प्रदेश के चार प्रमुख जनपदों—बहराइच, बरेली, मिर्जापुर और रायबरेली में चलाया गया। इसके तहत 200 विद्यालयों और 200 कक्षाओं का बारीकी से अध्ययन किया गया। सर्वे में मुख्य रूप से शिक्षण के 6 कोर क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया:
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कक्षा का वातावरण (Classroom Environment)
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पाठ योजना एवं उसका संचालन
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भाषा शिक्षण (Language Teaching)
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गणित शिक्षण (Maths Teaching)
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समय प्रबंधन (Time Management)
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शिक्षकों का दृष्टिकोण (Teacher's Attitude)
📈 रिपोर्ट के मुख्य और उत्साहजनक निष्कर्ष
सर्वेक्षण के दौरान उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई बेहद सकारात्मक और सुधारवादी संकेत सामने आए हैं:
| प्रमुख संकेतक | सर्वेक्षण के परिणाम (%) |
| कार्यशील श्यामपट्ट (Blackboards) की उपलब्धता | 97% कक्षाओं में |
| FLN (बुनियादी साक्षरता) अधिगम लक्ष्यों से शिक्षक परिचित | 97% शिक्षक |
| क्लस्टर और ब्लॉक समन्वयकों (ARPs/BRCs) से शैक्षणिक सहयोग | 94% शिक्षकों को प्राप्त |
| बच्चों के सतत आकलन का लिखित रिकॉर्ड (Written Records) | 78% शिक्षक रखते हैं |
सुधार के क्षेत्र: सकारात्मक पहलुओं के साथ ही रिपोर्ट में समावेशी शिक्षण, बेहतर पाठ योजना, प्रभावी प्रतिपुष्टि (Feedback), बच्चों की सक्रिय भागीदारी, भाषा व गणित को अधिक संवादात्मक बनाने तथा शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास (CPD) को और मजबूत करने पर बल दिया गया है।
🗣️ 'कक्षाओं को अर्जुन की तरह तैयार करना होगा' — मुख्य वक्तव्य
श्री पार्थसारथी सेन शर्मा (अपर मुख्य सचिव):
"हमें अपनी कक्षाओं में एक सकारात्मक और सुरक्षित माहौल तैयार करना होगा, जहाँ बच्चों को नियमित पढ़ने और लिखने के भरपूर अवसर मिलें। साथ ही कक्षा में बच्चों की समझ जांचने के लिए नियमित आकलन और 'कैच-अप शिक्षण' करना होगा। इस रिपोर्ट की 10 प्रमुख अनुशंसाओं पर आगामी शिक्षक क्लस्टर बैठकों में अनिवार्य रूप से चर्चा की जाए और विद्यालय स्तर पर इसकी ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।"
सुश्री मोनिका रानी (महानिदेशक, स्कूल शिक्षा):
"कक्षाओं में शिक्षक और बच्चों के बीच एक आत्मीय व भावनात्मक संबंध होना चाहिए। शिक्षकों की भूमिका कृष्ण जैसी है, जिन्हें अपने विद्यार्थियों को अर्जुन की तरह सर्वश्रेष्ठ बनाना है। अगर शिक्षक ठान लें, तो बच्चों के जीवन में एक क्रांतिकारी और सार्थक बदलाव आ सकता है।"
डॉ. धीर झिंगरन (संस्थापक एवं कार्यकारी निदेशक, LLF) व सुश्री ज्योत्सना (टाटा ट्रस्ट):
"बच्चों के सीखने के स्तर में स्थायी और वास्तविक सुधार तभी संभव है, जब प्रत्येक प्राथमिक कक्षा में गुणवत्तापूर्ण, सहभागी और पूरी तरह से बाल-केंद्रित (Child-centric) शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।"
