माता वैष्णो देवी मार्ग पर त्रासदी : लापरवाही या प्रकृति का प्रकोप?

Tragedy on Mata Vaishno Devi route: Negligence or natural wrath?
 
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(मनोज कुमार अग्रवाल – विभूति फीचर्स)

माता वैष्णो देवी धाम का वह मार्ग, जो हर समय जयकारों और श्रद्धा से गूंजता रहता था, आज भय और सन्नाटे में डूबा है। कटरा से अर्धकुंवारी मार्ग पर आए भीषण भूस्खलन ने 34 श्रद्धालुओं की जान ले ली और सैकड़ों परिवारों को दर्द और असुरक्षा के अंधेरे में धकेल दिया। मृतकों में राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र से आए यात्री शामिल हैं, जबकि कई की पहचान अब तक नहीं हो सकी

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हादसे का मंजर

रियासी जिले में स्थित इस मार्ग पर मलबे और चट्टानों का ढेर लग चुका है। कभी विश्राम स्थल रहने वाला अर्धकुंवारी आज खंडहर में तब्दील है। जहां पहले भक्ति और उमंग से भरे श्रद्धालु दिखते थे, वहीं अब परिजन अपने लापता प्रियजनों को खोजते हुए बिलखते नज़र आ रहे हैं। अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका के चलते एनडीआरएफ और सेना का बचाव अभियान जारी है।

आवागमन पर असर

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेलवे ने जम्मू और कटरा के लिए आने-जाने वाली 58 ट्रेनें रद्द कर दीं और 64 ट्रेनों को बीच रास्ते में ही रोकना पड़ा। साथ ही, वायुसेना ने छह हेलीकॉप्टर और एक सी-130 परिवहन विमान राहत कार्य में लगाए हैं।

सवालों के घेरे में श्राइन बोर्ड

इस आपदा ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या यह केवल प्रकृति का कहर है या मानवजनित लापरवाही?
श्राइन बोर्ड पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि विकास और व्यवसाय के नाम पर पहाड़ और पर्यावरण से छेड़छाड़ की गई।

  • अंधाधुंध निर्माण और दुकानों का विस्तार

  • पहाड़ काटकर रास्ते चौड़े करना

  • डीजल वाहनों की आवाजाही की अनुमति

  • बढ़ती गंदगी और अव्यवस्थित प्रबंधन

इन सबने त्रिकुटा पर्वत की प्राकृतिक संरचना को कमजोर कर दिया। स्थानीय लोग और सोशल मीडिया पर सक्रिय श्रद्धालु श्राइन बोर्ड को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

नेताओं और जनता की नाराज़गी

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्राइन बोर्ड पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद यात्रा क्यों जारी रखी गई? श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर क्यों नहीं रोका गया?
सोशल मीडिया पर तीर्थयात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा है। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि "मां की तपस्या को व्यवसाय और प्रदूषण ने बाधित किया है।"

समाधान की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि भूस्खलन को पूरी तरह रोकना कठिन है, लेकिन टेक्नोलॉजी (रडार, सैटेलाइट इमेजिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग आदि) से समय रहते चेतावनी देकर नुकसान कम किया जा सकता है।
सरकार और श्राइन बोर्ड को चाहिए कि—

  • चेतावनी और राहत प्रणाली को मज़बूत बनाएँ,

  • अनियंत्रित निर्माण और पर्यावरण दोहन पर रोक लगाएँ,

  • और तीर्थ मार्ग पर सुरक्षा इंतज़ाम पुख्ता करें।

फिलहाल, माता के दर्शन की इच्छा से आए हजारों श्रद्धालु यात्रा रुक जाने के कारण कटरा और जम्मू में फंसे हुए हैं और बिना दर्शन लौटने को विवश हैं।

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