TRAI की जांच: गोरखपुर और लखनऊ-गोरखपुर रेल मार्ग पर मोबाइल नेटवर्क क्वालिटी का हुआ रियलिटी टेस्ट, जानें नतीजे
गोरखपुर। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI / भादूविप्रा) ने आम मोबाइल उपभोक्ताओं के हित में एक बड़ा कदम उठाया है। ट्राई ने मई 2026 के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश एलएसए (Licensed Service Area) के अंतर्गत गोरखपुर शहर और लखनऊ से गोरखपुर रेल मार्ग पर किए गए 'इंडिपेंडेंट ड्राइव टेस्ट' (IDT) के निष्कर्ष जारी कर दिए हैं।
इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों (TSPs) द्वारा दी जा रही वॉयस कॉल और इंटरनेट डेटा सेवाओं की वास्तविक जमीनी हकीकत और उनकी गुणवत्ता का सटीक आकलन करना है।
इन प्रमुख पैमानों पर परखी गई नेटवर्क की क्वालिटी
इस विशेष ड्राइव टेस्ट के दौरान ट्राई ने उन्नत सॉफ्टवेयर और अत्याधुनिक हैंडसेट्स की मदद से सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों के 2G, 3G, 4G और 5G नेटवर्कों की लाइव टेस्टिंग की। जांच मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित रही:
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कवरेज क्वालिटी: सिग्नल की उपलब्धता और मजबूती।
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कॉल ड्रॉप रेट: बातचीत के दौरान अचानक कॉल कटने की समस्या।
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कॉल सेटअप सक्सेस रेट: पहली बार में कॉल कनेक्ट होने की दर।
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डेटा थ्रूपुट: इंटरनेट की वास्तविक डाउनलोडिंग और अपलोडिंग स्पीड।
"इस टेस्ट के आंकड़े सार्वजनिक करने का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही जानकारी देना है, ताकि वे बेहतर नेटवर्क चुन सकें। साथ ही, इससे टेलीकॉम कंपनियों पर अपनी सेवाओं को सुधारने का दबाव भी बनेगा।" — भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI)
जांच का दायरा: करीब 640 किमी के रूट पर हुआ लाइव टेस्ट
यह पूरा अभियान ट्राई के क्षेत्रीय कार्यालय (भोपाल) की सीधी देखरेख में एक अधिकृत एजेंसी के माध्यम से 4 मई 2026 से 8 मई 2026 के बीच चलाया गया। इस दौरान टीम ने निम्नलिखित क्षेत्रों को कवर किया:
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सिटी ड्राइव टेस्ट: गोरखपुर शहर के अंदर कुल 342.1 किलोमीटर लंबे रास्तों पर नेटवर्क की जांच की गई।
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हॉटस्पॉट एवं वॉक टेस्ट: शहर के 11 प्रमुख हॉटस्पॉट (भीड़भाड़ वाले इलाकों) को चिन्हित कर 3.7 किलोमीटर का वॉक टेस्ट किया गया।
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रेलवे रूट टेस्ट: लखनऊ से गोरखपुर के बीच 296.3 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर चलते सफर के दौरान सिग्नलों को रिकॉर्ड किया गया।
ट्राई द्वारा जारी यह रिपोर्ट पूरी तरह से रीयल-टाइम डेटा पर आधारित है, जो टेस्ट के दिन और समय पर संबंधित रूट पर ऑपरेटरों के वास्तविक प्रदर्शन को दर्शाती है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब टेलीकॉम कंपनियों को उन सुदूर या कमजोर सिग्नलों वाले क्षेत्रों में अपने मोबाइल टावर और नेटवर्क क्षमता को अपग्रेड करना होगा, जहां कॉल ड्रॉप या स्लो इंटरनेट की समस्या पाई गई है।
