UNGA 2025: डोनाल्ड ट्रंप और मुस्लिम देशों की ऐतिहासिक बैठक – गाजा युद्ध पर शांति की पहल
आज का टॉपिक है – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वो ऐतिहासिक मुलाकात, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की 80 वीं सभा से इतर हुई। कल, 23 सितंबर 2025 को न्यूयॉर्क में ट्रंप ने 8 प्रमुख मुस्लिम देशों के नेताओं के साथ एक अहम बैठक की। और बैठक शुरू होते ही ट्रंप ने क्या कहा ? "ये आप ही कर सकते हैं, पूरी दुनिया में कोई और नहीं!" ये मीटिंग सिर्फ एक formal बातचीत नहीं थी, बल्कि गाजा युद्ध को खत्म करने का एक बड़ा प्लान था। क्या ट्रंप का ये 3-सूत्री फॉर्मूला कामयाब होगा? क्या मुस्लिम देश इजरायल को पीछे हटने के लिए मजबूर कर पाएंगे? और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने इसमें क्या रोल निभाया?
सबसे पहले समझते हैं सीन क्या है। 22 सितंबर 2025 से न्यूयॉर्क में UNGA की 80वीं सभा शुरू हुई, जो 26 सितंबर तक चलेगी। यहां दुनिया के 193 देशों के लीडर्स इकट्ठा होते हैं – शांति, युद्ध, जलवायु परिवर्तन जैसी ग्लोबल प्रॉब्लम्स पर डिस्कस करने। इस बार का फोकस? गाजा-इजरायल वॉर, जो अब दूसरे साल में दाखिल हो चुका है। गाजा में 65,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, ज्यादातर सिविलियन। भुखमरी, विस्थापन, मानवीय संकट चरम पर है। UNGA से ठीक पहले, 22 सितंबर को फ्रांस और सऊदी अरब ने एक कॉन्फ्रेंस होस्ट की, जहां 150 देशों ने फिलिस्तीन को स्टेटहुड देने का समर्थन किया। लेकिन अमेरिका और इजरायल ने इसका विरोध किया। ट्रंप ने अपने 55 मिनट के स्पीच में कहा – "गाजा वॉर को तुरंत रोकना चाहिए। हम सबको बंधकों को रिलीज करने की डिमांड करनी चाहिए।" लेकिन असली गेम-चेंजर? UNGA से अलग, साइडलाइन्स पर हुई वो प्राइवेट मीटिंग। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने बताया – ये मीटिंग ट्रंप की 32 मीटिंग्स में सबसे इंपॉर्टेंट थी।
क्यों? क्योंकि यहां शांति का रोडमैप बन रहा था 8 मुस्लिम देशों का ग्रैंड अलायंस, न्यूयॉर्क के UN हेडक्वार्टर्स में ये मुलाकात हुई। ट्रंप ने इन 8 देशों के लीडर्स को इनवाइट किया: सऊदी अरब – क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS)। फंडिंग और डिप्लोमैटिक वेट के लिए।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) – प्रेसिडेंट मोहम्मद बिन जायद। अब्राहम एक्सॉर्ड्स के बावजूद इजरायल की आलोचना कर रहे।
कतर – अमीर तमीम बिन हमाद अल थानी। हमास नेगोशिएशंस के लिए होस्ट कंट्री, हाल ही में इजरायली स्ट्राइक से नाराज।
मिस्र – प्रेसिडेंट अब्देल फत्ताह एल-सिसी। गाजा के रफाह क्रॉसिंग कंट्रोल करते हैं।
जॉर्डन – किंग अब्दुल्लाह II। बड़ी फिलिस्तीनी पॉपुलेशन, रिफ्यूजी फ्लो का फ्रंटलाइन स्टेट।
तुर्की – प्रेसिडेंट रेसेप तईप एर्दोगन। इजरायल को "बैंडिट" कह चुके, मीटिंग को "फ्रूटफुल" बताया।
इंडोनेशिया – प्रेसिडेंट प्राबोवो सुबियांतो। दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम कंट्री, पीसकीपिंग फोर्सेस ऑफर किए।
पाकिस्तान – पीएम शहबाज शरीफ। साउथ एशियन व्यू पॉइंट, आर्मी चीफ आसिम मुनीर के साथ।
ये ग्रुप क्यों चुना गया? क्योंकि इनके पास मिलिट्री, फाइनेंशियल और डिप्लोमैटिक पावर है। ट्रंप ने कहा – "ये समूह ही गाजा में स्टेबलाइजेशन फोर्स भेज सकता है, दुनिया में कोई और नहीं!" शरीफ ने मीटिंग में पाकिस्तान की UN सिक्योरिटी काउंसिल रोल को हाइलाइट किया। तारीफों की बौछार और वो फेमस लाइनबैठक शुरू होते ही ट्रंप का अंदाज देखने लायक था। वो मिलते ही लीडर्स की तारीफें करने लगे। MBS को कहा – "तुम्हारा विजन कमाल का है!" एर्दोगन से बोले – "तुर्की की स्ट्रेंथ दुनिया देख रही है।" शहबाज शरीफ को देखकर हंसे – "पाकिस्तान हमेशा से हमारा स्ट्रॉन्ग पार्टनर रहा है।" लेकिन असली बम फटा जब ट्रंप ने गाजा पर बात की। उन्होंने कहा: "हमें बंधकों को वापस लाना होगा। गाजा वॉर को एंड करना है। और ये आप ही कर सकते हैं – सऊदी, कतर, UAE, तुर्की, पाकिस्तान... पूरी दुनिया में कोई और नहीं! आपकी मिलिट्री फोर्सेस गाजा में इजरायल की जगह ले सकती हैं। आप रिकंस्ट्रक्शन फंड कर सकते हैं।" ट्रंप ने इसे "अमेरिका फर्स्ट" अप्रोच बताया। स्पीच में उन्होंने यूरोप को कोसा – "तुम्हारे कंट्रीज हेल जा रही हैं!" और फिलिस्तीन स्टेटहुड को "हमास को रिवार्ड" कहा।
ट्रंप ने कहा – "ये वॉर कभी नहीं शुरू होना चाहिए था। लेकिन अब हम एंड करेंगे।" लेकिन चैलेंजेस ? इजरायल ने प्लान को "नॉन-स्टार्टर" कहा। हमास ने रिजेक्ट किया। और UNGA में 150 देश फिलिस्तीन स्टेटहुड चाहते हैं, जबकि ट्रंप इसे "रिवार्ड फॉर टेरर" बता रहे। पाकिस्तान का एंगल ? शरीफ ने ट्रंप से इकोनॉमिक हेल्प मांगी – IMF लोन, ट्रेड डील्स। मुनीर के साथ 100 दिन बाद ये दूसरी मीटिंग थी। क्या पाकिस्तान गाजा में सैनिक भेजेगा ? ये तो आने वाला समय बताएगा।
ये मीटिंग ट्रंप की "पर्सनल डिप्लोमेसी" का परफेक्ट एग्जांपल है। 2019 में UNGA में हंसे गए थे, अब लीडर्स कोर्ट कर रहे हैं। लेकिन क्या ये शांति लाएगा? या सिर्फ टेम्पररी फिक्स? तो ये थी ट्रंप की मुस्लिम देशों वाली महाबैठक की पूरी स्टोरी। क्या लगता है आपको – सफल होगी या नहीं? कमेंट्स में बताएं।
