बकाया भुगतान और कानूनी मामलों से ध्यान भटकाने की कोशिश?
बरेली आदर्श एफपीओ के विरोध प्रदर्शन पर उठे सवाल
Thu, 12 Feb 2026
बरेली। बरेली आदर्श फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) के नेतृत्व में हाल में किए गए विरोध प्रदर्शन को लेकर हुई जाँच में यह आशंका जताई जा रही है कि यह आंदोलन संगठन पर लंबित बकाया भुगतान, वित्तीय अनियमितताओं और कानूनी कार्रवाइयों से ध्यान हटाने का प्रयास हो सकता है।
विरोध के दौरान किसानों के शोषण से जुड़े जो आरोप लगाए गए, वे उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। जाँच से जुड़े दस्तावेज़ों के अनुसार, बरेली आदर्श एफपीओ के डायरेक्टर्स और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) स्वयं जाँच के दायरे में हैं। उन पर किसानों और अन्य फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशंस से खरीदे गए माल का भुगतान न करने के आरोप हैं।
50 लाख रुपये के बकाये पर एफआईआर
पीवाईके फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने बरेली आदर्श एफपीओ के खिलाफ लगभग 50 लाख रुपये के भुगतान न होने को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस एफआईआर में एफपीओ के साथ-साथ उसके सीईओ श्री हरीश गंगवार का नाम भी शामिल है।
किसानों की शिकायतें
बदायूं जिले के कई किसानों ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि माल की आपूर्ति के बावजूद उन्हें समय पर भुगतान नहीं किया गया।
बसई गांव निवासी अंकित शर्मा (पुत्र रामवीर) ने बताया
“हमें एफपीओ पर भरोसा था, क्योंकि इसे किसानों की संस्था बताया गया था। माल देने के बाद महीनों तक संपर्क करते रहे, लेकिन न जवाब मिला और न भुगतान। आखिरकार हमें प्रशासन के पास जाना पड़ा।
इसी तरह, इटौआ गांव के राम नरेश (पुत्र सुखपाल सिंह) ने बताया कि उन्होंने एफपीओ को लगभग 100 क्विंटल माल की आपूर्ति की थी।
“भुगतान की बात आते ही एफपीओ की ओर से संपर्क पूरी तरह बंद हो गया। न कोई जवाब, न कोई सफाई। हमें ठगा हुआ महसूस हुआ।
आधिकारिक रिकॉर्ड क्या कहते हैं
इन शिकायतों और पहले से दर्ज एफआईआर के बावजूद, बरेली आदर्श एफपीओ के प्रतिनिधियों ने बरेली स्थित एक गोदाम में विरोध प्रदर्शन कर स्वयं को पीड़ित के रूप में प्रस्तुत किया। हालांकि, मंडी प्रशासन और आधिकारिक रिकॉर्ड से प्राप्त जानकारियाँ इन दावों की पुष्टि नहीं करतीं।
दस्तावेज़ों के अनुसार
अनिवार्य मंडी टैक्स का भुगतान औपचारिक नोटिस के बावजूद नहीं किया गया।
बीज निगम को देय गोदाम किराया लंबे समय तक लंबित रहा, जिसे बाद में संचालन प्रभावित न हो, इसके लिए एक तीसरे पक्ष द्वारा चुकाया गया।
गोदाम को बिना अनुमति 20 दिनों से अधिक समय तक बंद रखा गया, जिससे एनबीएफसी की वैधानिक प्रक्रिया बाधित हुई।
बाद में कराई गई लैब जाँच में भंडारित माल की गुणवत्ता में गिरावट की पुष्टि हुई।
सीमित स्तर का विरोध
मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह विरोध प्रदर्शन सीमित दायरे तक ही सिमटा रहा और इसमें मुख्य रूप से एफपीओ से जुड़े कुछ ही लोग शामिल थे। व्यापक किसान सहभागिता के कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं। अधिकांश किसानों को भुगतान मिल चुका है और वे कटाई के बाद की अपनी नियमित गतिविधियों में लौट चुके हैं।
फिलहाल यह पूरा मामला कानूनी समीक्षा के अधीन है और इससे जुड़ी कई प्रक्रियाएँ विभिन्न स्तरों पर जारी हैं।
