के.के.सी. में द्वि-दिवसीय ‘युवाओं से संवाद: मन की बात’ कार्यक्रम का समापन
मानसिक स्वास्थ्य परामर्श सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों को उनकी व्यक्तिगत एवं मनोवैज्ञानिक समस्याओं को समझने तथा उनके समाधान की दिशा में आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. के.के. शुक्ला ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि अवसाद एवं अन्य नकारात्मक मनोवैज्ञानिक कारकों से बचने के लिए अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना और उन्हें सकारात्मक दिशा में मार्गांतरित करना अत्यंत आवश्यक है।
विशिष्ट अतिथि एवं कला संकाय अध्यक्ष प्रो. एस.सी. हजेला ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय में संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्थान में विद्यार्थियों के शैक्षिक कल्याण के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनका छात्र-छात्राएं लाभ उठा सकते हैं।
समापन सत्र में विद्यार्थियों से उनके व्यक्तिगत जीवन, भविष्य और करियर से जुड़ी चुनौतियों एवं बाधाओं को लेकर खुला संवाद किया गया। प्रो. डॉ. रश्मि सोनी ने युवाओं को आपसी संवाद और भावनात्मक सहयोग के माध्यम से मानसिक संकट से उबरने तथा आत्महत्या जैसे गंभीर विचारों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया।
मनोवैज्ञानिक डॉ. तान्या दीक्षित ने विद्यार्थियों को डिप्रेशन, तनाव, चिंता और अन्य नकारात्मक मनोवैज्ञानिक कारकों से स्वयं को सुरक्षित रखने के महत्वपूर्ण उपाय बताए। वहीं डॉ. मनीष मिश्रा ने विद्यार्थियों की करियर संबंधी समस्याओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने विशेषज्ञ प्रो. डॉ. अंशुमाली शर्मा एवं अन्य शिक्षकों के समक्ष अपनी भावनाएं और समस्याएं साझा कीं। इस दौरान जीवन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों और उनके समाधान पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम की श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को प्राचार्य प्रो. के.के. शुक्ला ने प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर डॉ. आशुतोष शुक्ल, डॉ. आदित्य काला एवं डॉ. आयुषी शर्मा सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
