एमएसएमई के लिए दो दिवसीय वेण्डर विकास कार्यक्रम का समापन, 200 से अधिक उद्यमियों ने लिया हिस्सा
लखनऊ, 22 अगस्त। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के एमएसएमई विकास कार्यालय, कानपुर और PHDCCI, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों के लिए वेण्डर विकास कार्यक्रम-2026’ का शुक्रवार को गोमती नगर स्थित पीएचडी हाउस में समापन हुआ। कार्यक्रम में 200 से अधिक एमएसई उद्यमियों, औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न सरकारी, वित्तीय, तकनीकी और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव, एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि भूषण लाल सुशील मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। सचिव एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन प्रांजल यादव तथा निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो के अतिरिक्त आयुक्त पवन अग्रवाल विशिष्ट अतिथि रहे।
वित्तीय सहायता के साथ बाजार से जुड़ाव जरूरी
प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील ने कहा कि एमएसएमई के विकास के लिए केवल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उद्यमियों को वित्त से उत्पादन, उत्पादन से बाजार, बाजार से ऑर्डर और ऑर्डर से स्थायी राजस्व तक जोड़ने वाली पूरी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि CM YUVA जैसी योजनाओं का उद्देश्य केवल ऋण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नए उद्यमियों के लिए बाजार और स्थायी कारोबारी अवसर भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने बैंकों के माध्यम से योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि फॉरवर्ड लिंकेज और वेण्डर डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि एमएसएमई, स्वयं सहायता समूहों और व्यक्तिगत उद्यमियों को बड़े उद्योगों, संस्थागत खरीदारों तथा सरकारी खरीद प्रणाली से जोड़ा जा सके।
प्रमुख सचिव ने कार्यक्रम में मौजूद एमएसई उद्यमियों और वेंडरों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव सुने। इस दौरान TReDS समेत एमएसई के लिए उपलब्ध विभिन्न वित्तीय व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हुई।
निर्यात और तकनीकी अवसरों पर हुए सत्र
कार्यक्रम के स्वागत संबोधन में वी.के. वर्मा, IEDS, निदेशक, MSME-DFO कानपुर ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम एमएसई इकाइयों को बड़े उद्योगों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सरकारी खरीद व्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे उद्यमियों के लिए नए कारोबारी अवसर विकसित करने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम के दूसरे दिन निर्यात, व्यापार वित्त, जोखिम प्रबंधन, तकनीक, बौद्धिक संपदा अधिकार और सार्वजनिक क्षेत्र की खरीद से जुड़े विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
GJEPC के चीफ मैनेजर संजय मदान ने निर्यात और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। ECGC के ब्रांच मैनेजर मोहम्मद शाहिद ने निर्यात कारोबार में जोखिम प्रबंधन, जबकि EXIM Bank के रीजनल हेड आशीष सोनी ने निर्यात एवं व्यापार वित्त से जुड़े विषयों पर जानकारी साझा की।
CSIR-CIMAP के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. आर.के. श्रीवास्तव ने अनुसंधान एवं उद्योग-तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। वहीं आईपीआर अटॉर्नी नवदीप श्रीधर ने बौद्धिक संपदा अधिकारों तथा GAIL की सीनियर मैनेजर ट्विंकल गौर ने खरीद एवं कॉन्ट्रैक्ट प्रक्रियाओं की जानकारी दी।

एआई और साइबर सुरक्षा पर भी चर्चा
वेंडर विकास कार्यक्रम में शैलेन्द्र खरे ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा पर विशेष सत्र लिया। तकनीकी सत्रों में Ashok Leyland के Lead-Supply Chain मनोज शुक्ला सहित विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।
कार्यक्रम में PHDCCI के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक अतुल श्रीवास्तव, MSME-DFO कानपुर के सहायक निदेशक अमित बाजपेयी, नीरज कुमार और सोनिका रस्तोगी समेत बड़ी संख्या में अधिकारी, उद्यमी और उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से एमएसई इकाइयों को वित्तीय संसाधनों के साथ बाजार, निर्यात, सरकारी खरीद, तकनीक और बड़े उद्योगों की सप्लाई चेन से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।

