महर्षि यूनिवर्सिटी में 'उड़ान 2026' की धूम: सेशेल्स की उच्चायुक्त ने मेधावियों को सराहा, बोले यह पल छात्रों के लिए यादगार
सेशेल्स की उच्चायुक्त हरिसोआ ललातियाना रहीं मुख्य अतिथि
इस अंतरराष्ट्रीय गरिमा वाले कार्यक्रम में भारत में सेशेल्स की उच्चायुक्त (High Commissioner of Seychelles to India) हरिसोआ ललातियाना अकूशे ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके साथ सेशेल्स से भारत के दौरे पर आए राकोटोमावो कियाडी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर मौजूद रहे।

उच्चायुक्त हरिसोआ ललातियाना ने विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों से सीधा संवाद किया। उन्होंने परिसर की उत्कृष्ट शिक्षा व्यवस्था, शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक गतिविधियों की जमकर सराहना की। मेधावी छात्र-छात्राओं से बातचीत करते हुए उन्होंने बच्चों का हौसला बढ़ाया और कहा कि यह सम्मान इन होनहारों के जीवन का सबसे यादगार लम्हा साबित होगा, जो उन्हें भविष्य में और बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगा।
अतिथियों का भव्य स्वागत और उज्जवल भविष्य की कामना
समारोह की शुरुआत में महर्षि विश्वविद्यालय के कुलपति (Vice Chancellor) प्रो. भानु प्रताप सिंह ने सेशेल्स से आए अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों और सभी गणमान्य अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। कुलपति ने अपने संबोधन में सभी सम्मानित होने वाले मेधावियों को बधाई देते हुए उनके उज्जवल और सफल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख विश्वविद्यालय पदाधिकारी:
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गिरीश छिमवाल (कुलसचिव / Registrar)
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के. के. शुक्ला (परीक्षा नियंत्रक / Controller of Examinations)
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राजेश सिंह (डिप्टी रजिस्ट्रार)
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सुशांत श्रीवास्तव, सरित घोष और अंशुमान देव गुप्ता।
सम्मान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का संगम
"उड़ान 2026 – गुरुवंदन सम्मान" समारोह के दौरान बोर्ड और विश्वविद्यालय स्तर पर कीर्तिमान स्थापित करने वाले मेधावी विद्यार्थियों और शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने वाले शिक्षकों को मंच पर मेमेंटो और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।सम्मान सत्र के साथ-साथ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किए गए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लोक नृत्यों ने समां बांध दिया। इन बेहतरीन प्रस्तुतियों ने वहां उपस्थित सभी मेहमानों और दर्शकों का मन मोह लिया।
विश्वविद्यालय प्रशासन का विजन: MUIT प्रशासन के अनुसार, इस वार्षिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर प्रतिस्पर्धा की स्वस्थ भावना विकसित करना, शिक्षकों के कड़े परिश्रम को पहचान देना और शिक्षा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने वाले दिग्गजों को एक साझा मंच पर सम्मानित करना है।



