पाकिस्तान की जेल से रिहा हुआ उन्नाव का सूरजपाल, 15 माह बाद गांव लौटा
45 वर्षीय सूरजपाल लंबे समय से मानसिक रूप से अस्वस्थ है और अक्सर घर से गायब हो जाता था। 27 अक्टूबर 2020 को वह घर से निकला और फिर लौटकर नहीं आया। काफी तलाश के बावजूद कोई सुराग नहीं मिला। करीब एक साल बाद, अक्टूबर 2021 में जम्मू-कश्मीर सीमा से बीएसएफ का फोन आया कि दिसंबर 2020 में सूरजपाल पाक सीमा में भटककर चला गया था और लाहौर जेल में कैद है।
इसके बाद उसकी पत्नी सूरजा देवी और बेटा पिंटू जानकारी लेने सीमा पर पहुंचे, लेकिन उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ। 29 जुलाई 2023 को पाक दूतावास ने भारतीय दूतावास को पत्र भेजकर उसकी नागरिकता की पुष्टि मांगी। उन्नाव जिला प्रशासन ने विवरण भेजने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई और 30 मई 2024 को लाहौर जेल से सूरजपाल को रिहा कर बाघा बार्डर पर बीएसएफ को सौंपा गया।
हालाँकि रिहाई के बाद भी सूरजपाल घर नहीं पहुँचा और परिवार उसकी प्रतीक्षा करता रहा। बुधवार को अचानक कुछ ग्रामीणों ने उसे रेलवे क्रॉसिंग के पास भटकते हुए देखा। सूचना पर चचेरे भाई रमेश ने मौके पर पहुँचकर उसे पहचान लिया। उसके पास एक बोरा मिला जिसमें केवल रोटी और कंबल थे।
घर पहुँचते ही पत्नी सूरजा देवी और बेटा पिंटू खुशी से फूट-फूटकर रो पड़े। गांव में सूरजपाल को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। पूछने पर वह यह बताने में असमर्थ रहा कि वह पाकिस्तान कैसे पहुंचा। जिला प्रशासन और पुलिस ने मामले की पुष्टि की है। डीएम गौरांग राठी ने बताया कि सूरजपाल के घर लौटने की जानकारी मिली है, जबकि एसपी दीपक भूकर ने कहा कि वह मानसिक रूप से मंदित है और पूछताछ की जा रही है।
