UP Agrees Project: यूपी के 28 जिलों में किसानों तक पहुची 'यूपी एग्रीस' परियोजना, विश्व बैंक के मिशन ने जमीनी प्रगति को सराहा

'UP Agrees' Project: 'UP Agrees' project reaches farmers across 28 districts of UP; World Bank mission commends ground-level progress.
 
UP Agrees Project: यूपी के 28 जिलों में किसानों तक पहुची 'यूपी एग्रीस' परियोजना, विश्व बैंक के मिशन ने जमीनी प्रगति को सराहा

लखनऊ डेस्क (आर. एल. पाण्डेय):  उत्तर प्रदेश में खेती-किसानी को आधुनिक, मुनाफा कमाने योग्य और मौसम के अनुकूल बनाने के लिए योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना उत्तर प्रदेश कृषि विकास एवं ग्रामीण उद्यमिता सुदृढ़ीकरण परियोजना (UP AGREES - यूपी एग्रीस) ने धरातल पर मजबूत रफ्तार पकड़ ली है। 'उत्तर प्रदेश डाइवर्सिफ़ाईड एग्रीकल्चर सपोर्ट प्रोजेक्ट' (UPDASP) द्वारा संचालित और विश्व बैंक (World Bank) द्वारा पोषित इस परियोजना ने राज्य के सभी चयनित जिलों में किसानों के बीच सक्रिय रूप से काम करना शुरू कर दिया है।

इस योजना की जमीनी हकीकत और प्रगति का जायजा लेने के लिए विश्व बैंक का एक 6 सदस्यीय उच्चस्तरीय सपोर्ट मिशन 1 से 5 जून तक उत्तर प्रदेश के विस्तृत दौरे पर रहा। इस पांच दिवसीय दौरे के दौरान मिशन ने परियोजना के कार्यों की गहन समीक्षा की और इसकी सफलता को लेकर संतोष व्यक्त किया।

सभी 28 लक्षित जिलों में योजना प्रभावी, IRRI के साथ मिलकर हो रहा काम

समीक्षा बैठक और जमीनी दौरों के बाद यह तथ्य सामने आया है कि यूपी एग्रीस परियोजना इस समय प्रदेश के सभी 28 लक्षित (Targeted) जिलों में पूरी तरह एक्टिव है। यह योजना किसानों तक नई वैज्ञानिक तकनीकों, आधुनिक कृषि ज्ञान और बाजार के सीधे अवसर पहुंचाने में सेतु का काम कर रही है।

  • जलवायु-स्मार्ट कृषि पर जोर: परियोजना के तहत फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, पानी व खाद जैसे संसाधनों का कुशल प्रबंधन करने और 'क्लाइमेट-स्मार्ट' (Climate-Smart) यानी मौसम के अनुकूल खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

  • धान की खेती में नवाचार: पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में धान की उत्पादकता बढ़ाने के लिए विश्व प्रसिद्ध संस्था इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (IRRI) को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है। आईआरआरआई के सहयोग से खेतों में 'डिमनस्ट्रेशन प्लॉट' (प्रदर्शन प्लॉट) तैयार किए जा रहे हैं, जहां किसानों को नई तकनीकों का लाइव और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार की तरफ से उच्च गुणवत्ता वाले कृषि आदान (Seeds & Inputs) मुफ्त बांटे जा रहे हैं।

वाराणसी से बहराइच तक: विश्व बैंक की टीम ने खुद देखा बदलाव

विश्व बैंक के 6 सदस्यीय दल ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न अंचलों का दौरा कर विकास कार्यों का भौतिक निरीक्षण किया:

  1. 1 जून (वाराणसी): मिशन ने वाराणसी का दौरा कर धान की खेती में किए जा रहे तकनीकी बदलावों को देखा। टीम ने सीधे खेतों में काम कर रहे किसानों से बातचीत की और समझा कि नई वैज्ञानिक तकनीकों से फसलों की लागत में कितनी कमी आई है और उत्पादन कितना बढ़ा है।

  2. 2 जून (बहराइच): टीम ने बहराइच जिले के प्रसिद्ध बघेल ताल क्षेत्र का दौरा किया। यहाँ कृषि से जुड़े सहायक क्षेत्र 'मत्स्य पालन' (Fisheries) के अंतर्गत हो रहे कार्यों का निरीक्षण किया गया। टीम ने देखा कि कैसे आधुनिक तकनीकों और आनुवंशिक रूप से उन्नत (Genetically Improved) मछली के बीजों की मदद से स्थानीय मछुआरों और किसानों की आजीविका सुधर रही है।

लखनऊ में हाई-लेवल मीटिंग, भविष्य का रोडमैप तैयार

जमीनी दौरों के बाद 3 और 4 जून को राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विश्व बैंक के प्रतिनिधियों की मैराथन बैठकें हुईं। परियोजना की अब तक की रफ्तार पर खुशी जताते हुए विश्व बैंक के सदस्यों ने कहा कि यूपी एग्रीस परियोजना उत्तर प्रदेश के जलवायु परिवर्तन से प्रभावित जिलों में आधुनिक, विज्ञान-आधारित और बाजारोन्मुख कृषि को गति देने के साथ-साथ किसानों की आय और ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने में गेम-चेंजर साबित हो रही है।

इसके बाद, दौरे के अंतिम दिन 5 जून को कृषि उत्पादन आयुक्त (APC) की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल क्लोजिंग मीटिंग आयोजित की गई। इस बैठक में योजना के भविष्य के विस्तार और नए तकनीकी गठबंधनों पर विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (कृषि), अपर परियोजना समन्वयक (यूपीडास्प) और विश्व बैंक के शीर्ष प्रतिनिधि मुख्य रूप से शामिल रहे।

सभी 28 लक्षित जिलों में योजना प्रभावी, IRRI के साथ मिलकर हो रहा काम

समीक्षा बैठक और जमीनी दौरों के बाद यह तथ्य सामने आया है कि यूपी एग्रीस परियोजना इस समय प्रदेश के सभी 28 लक्षित (Targeted) जिलों में पूरी तरह एक्टिव है। यह योजना किसानों तक नई वैज्ञानिक तकनीकों, आधुनिक कृषि ज्ञान और बाजार के सीधे अवसर पहुंचाने में सेतु का काम कर रही है।

  • जलवायु-स्मार्ट कृषि पर जोर: परियोजना के तहत फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, पानी व खाद जैसे संसाधनों का कुशल प्रबंधन करने और 'क्लाइमेट-स्मार्ट' (Climate-Smart) यानी मौसम के अनुकूल खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

  • धान की खेती में नवाचार: पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में धान की उत्पादकता बढ़ाने के लिए विश्व प्रसिद्ध संस्था इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (IRRI) को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है। आईआरआरआई के सहयोग से खेतों में 'डिमनस्ट्रेशन प्लॉट' (प्रदर्शन प्लॉट) तैयार किए जा रहे हैं, जहां किसानों को नई तकनीकों का लाइव और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार की तरफ से उच्च गुणवत्ता वाले कृषि आदान (Seeds & Inputs) मुफ्त बांटे जा रहे हैं।

वाराणसी से बहराइच तक: विश्व बैंक की टीम ने खुद देखा बदलाव

विश्व बैंक के 6 सदस्यीय दल ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न अंचलों का दौरा कर विकास कार्यों का भौतिक निरीक्षण किया:

  1. 1 जून (वाराणसी): मिशन ने वाराणसी का दौरा कर धान की खेती में किए जा रहे तकनीकी बदलावों को देखा। टीम ने सीधे खेतों में काम कर रहे किसानों से बातचीत की और समझा कि नई वैज्ञानिक तकनीकों से फसलों की लागत में कितनी कमी आई है और उत्पादन कितना बढ़ा है।

  2. 2 जून (बहराइच): टीम ने बहराइच जिले के प्रसिद्ध बघेल ताल क्षेत्र का दौरा किया। यहाँ कृषि से जुड़े सहायक क्षेत्र 'मत्स्य पालन' (Fisheries) के अंतर्गत हो रहे कार्यों का निरीक्षण किया गया। टीम ने देखा कि कैसे आधुनिक तकनीकों और आनुवंशिक रूप से उन्नत (Genetically Improved) मछली के बीजों की मदद से स्थानीय मछुआरों और किसानों की आजीविका सुधर रही है।

लखनऊ में हाई-लेवल मीटिंग, भविष्य का रोडमैप तैयार

जमीनी दौरों के बाद 3 और 4 जून को राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विश्व बैंक के प्रतिनिधियों की मैराथन बैठकें हुईं। परियोजना की अब तक की रफ्तार पर खुशी जताते हुए विश्व बैंक के सदस्यों ने कहा कि यूपी एग्रीस परियोजना उत्तर प्रदेश के जलवायु परिवर्तन से प्रभावित जिलों में आधुनिक, विज्ञान-आधारित और बाजारोन्मुख कृषि को गति देने के साथ-साथ किसानों की आय और ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने में गेम-चेंजर साबित हो रही है।

इसके बाद, दौरे के अंतिम दिन 5 जून को कृषि उत्पादन आयुक्त (APC) की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल क्लोजिंग मीटिंग आयोजित की गई। इस बैठक में योजना के भविष्य के विस्तार और नए तकनीकी गठबंधनों पर विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (कृषि), अपर परियोजना समन्वयक (यूपीडास्प) और विश्व बैंक के शीर्ष प्रतिनिधि मुख्य रूप से शामिल रहे।

Tags