UP Education: व्यावसायिक शिक्षकों के लिए बड़ी खबर, हर महीने की 7 तारीख तक मानदेय भुगतान का कड़ा निर्देश जारी, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
लखनऊ, 19 जुलाई 2026:
उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा योजना (Vocational Education Scheme) के तहत कार्यरत अतिथि विषय विशेषज्ञों (Guest Subject Experts) के लिए एक राहत भरी खबर है। शिक्षा निदेशक माध्यमिक कार्यालय द्वारा लखनऊ मंडल के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को विभिन्न ट्रेडों में आमंत्रित इन विशेषज्ञों के मानदेय का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
शासन के नियमों के अनुसार, हर महीने की 7 तारीख तक प्रत्येक दशा में सभी अतिथि विषय विशेषज्ञों के मानदेय का शत-प्रतिशत भुगतान हो जाना अनिवार्य है।
निर्देशों की अवहेलना करने वाले विद्यालयों पर कसेगा शिकंजा
संयुक्त शिक्षा निदेशक लखनऊ मंडल कार्यालय के मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि शिक्षा निदेशक माध्यमिक कार्यालय को लखनऊ मंडल के अंतर्गत आने वाले 6 जिलों— लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, उन्नाव और रायबरेली के कुछ माध्यमिक विद्यालयों से मानदेय भुगतान में अनावश्यक देरी किए जाने की शिकायतें प्राप्त हुई थीं।
निदेशालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि मानदेय वितरण में किसी भी प्रकार का विलंब सरकारी निर्देशों की अवहेलना और घोर लापरवाही की श्रेणी में माना जाएगा।
जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को सख्त हिदायत: 1 तारीख तक भेजें विवरण
इस प्रशासनिक शिथिलता को समाप्त करने के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक लखनऊ मंडल डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने मंडल के सभी छह जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालयों को लिखित आदेश जारी कर निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने जनपदों में नियुक्त सभी आमंत्रित अतिथि विषय विशेषज्ञों के मानदेय भुगतान की फाइल और प्रक्रिया को प्रत्येक माह की 1 तारीख तक निश्चित रूप से प्रोसेस कर लें।
समय सीमा का कड़ाई से पालन करने का आदेश
शिक्षा निदेशक माध्यमिक कार्यालय ने पुनः चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि महीने की 7 तारीख बीत जाने के बाद किसी भी अतिथि विषय विशेषज्ञ का मानदेय लंबित (Pending) नहीं रहना चाहिए। इस कदम से लखनऊ मंडल के सैकड़ों व्यावसायिक अतिथि शिक्षकों को वित्तीय अनिश्चितता से मुक्ति मिलेगी और वे बिना किसी मानसिक तनाव के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण व्यावसायिक शिक्षा प्रदान कर सकेंगे। विभाग ने साफ किया है कि इस समय सीमा का उल्लंघन करने वाले संबंधित आहरण-वितरण अधिकारियों और प्रधानाचार्यों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
