UP Flood Mock Drill: मानसून से पहले यूपी में हाई-अलर्ट! 44 जिलों में PAC और SDRF ने परखी ताकत, राज्यस्तरीय मॉक एक्सरसाइज सफल

UP Flood Mock Drill: High alert in UP ahead of the monsoon! PAC and SDRF tested their capabilities across 44 districts; state-level mock exercise successful.
 
44 संवेदनशील जिलों की 118 तहसीलों में एक साथ चला अभियान उत्तर प्रदेश के उन 44 जनपदों को इस अभ्यास के लिए चुना गया था, जो भौगोलिक रूप से हर साल बाढ़ या जलभराव की मार झेलते हैं।  बलों की भारी तैनाती: इन जिलों की कुल 118 तहसीलों में राहत बलों ने अपनी कार्यकुशलता का प्रदर्शन किया। इस राज्यस्तरीय अभ्यास में पीएसी (PAC) की 17 वाहिनियों से 7 कंपनियां और 1 प्लाटून के जवान शामिल हुए।  एसडीआरएफ की मुस्तैदी: इसके साथ ही राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की 16 अत्याधुनिक टीमों ने भी अलग-अलग मोर्चों पर कमान संभाली।  नाव संचालन से लेकर रेस्क्यू ऑपरेशन तक: हर तकनीक की हुई जांच मॉक ड्रिल के दौरान नदियों और जलमग्न क्षेत्रों के कृत्रिम दृश्य तैयार कर असल रेस्क्यू ऑपरेशन जैसी चुनौतियों का सामना किया गया। इस दौरान जवानों ने निम्नलिखित प्रमुख तकनीकों और उपकरणों का लाइव परीक्षण किया:  आधुनिक नाव संचालन: बाढ़ की तेज लहरों के बीच मोटर बोट और लाइफ-बोट्स को सुरक्षित ढंग से चलाने का अभ्यास।  सुरक्षित निकासी (Evacuation): जलमग्न या पूरी तरह से डूब चुके गांवों और घरों से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाना।  हाई-टेक उपकरणों का परीक्षण: लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, आधुनिक रस्सियों के माध्यम से वर्टिकल रेस्क्यू, और पानी के भीतर काम आने वाले आधुनिक जीवनरक्षक उपकरणों की उपलब्धता व कार्यशीलता को जांचा गया।  प्राथमिक उपचार (First Aid): पानी से निकाले गए पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने से पहले दिए जाने वाले तत्काल मेडिकल सपोर्ट (CPR और फर्स्ट एड) का भी प्रदर्शन किया गया।  विभिन्न विभागों का दिखा समेकित तालमेल आपदा के समय सबसे महत्वपूर्ण कड़ी विभिन्न विभागों के बीच का आपसी समन्वय (Coordination) होता है। इस मॉक एक्सरसाइज में केवल सुरक्षा बल ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग (लेखपाल/कानूनगो), अग्निशमन सेवा (Fire Brigade), एनडीआरएफ (NDRF), और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) ने मिलकर काम किया। सभी विभागों ने एकजुट होकर 'समेकित आपदा प्रबंधन कार्यप्रणाली' का बेहतरीन उदाहरण पेश किया।  "मानव जीवन की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता" — डीजीपी पीएसी सफल आयोजन के बाद पुलिस महानिदेशक (PAC) आलोक सिंह ने बाढ़ राहत दलों और एसडीआरएफ की टीमों को कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए:  "बाढ़ राहत दलों के सभी कार्मिकों की नियमित ब्रीफिंग की जाए। सभी मोटर बोट्स और जीवनरक्षक उपकरणों का समय-समय पर निरीक्षण और मेंटेनेंस होना अनिवार्य है, ताकि जब भी आपात स्थिति आए, तो प्रभावित क्षेत्रों में बिना एक मिनट गंवाए तत्काल राहत कार्य शुरू किया जा सके। मानव जीवन की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उत्तर प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा और सहायता के लिए पीएसी और एसडीआरएफ का हर एक जवान पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ 24 घंटे मुस्तैद है।"

प्रादेशिक डेस्क, लखनऊ (12 जून 2026):  उत्तर प्रदेश में मानसून के दौरान संभावित भारी बारिश, अतिवृष्टि और बाढ़ जैसी गंभीर प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए शासन स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में बीते दिन (गुरुवार, 11 जून 2026) राज्य के सभी बाढ़ संवेदनशील इलाकों में एक वृहद "बाढ़ आपदा मॉक एक्सरसाइज-2026" का सफल आयोजन किया गया।

यह मॉक ड्रिल पुलिस महानिदेशक (पीएसी) आलोक सिंह के कुशल निर्देशन और उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत पूरी की गई। इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी आपातकालीन स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य (Rescue Operations) शुरू करने की त्वरित क्षमता और तैयारियों को परखना था।

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44 संवेदनशील जिलों की 118 तहसीलों में एक साथ चला अभियान

उत्तर प्रदेश के उन 44 जनपदों को इस अभ्यास के लिए चुना गया था, जो भौगोलिक रूप से हर साल बाढ़ या जलभराव की मार झेलते हैं।

  • बलों की भारी तैनाती: इन जिलों की कुल 118 तहसीलों में राहत बलों ने अपनी कार्यकुशलता का प्रदर्शन किया। इस राज्यस्तरीय अभ्यास में पीएसी (PAC) की 17 वाहिनियों से 7 कंपनियां और 1 प्लाटून के जवान शामिल हुए।

  • एसडीआरएफ की मुस्तैदी: इसके साथ ही राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की 16 अत्याधुनिक टीमों ने भी अलग-अलग मोर्चों पर कमान संभाली।

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नाव संचालन से लेकर रेस्क्यू ऑपरेशन तक: हर तकनीक की हुई जांच

मॉक ड्रिल के दौरान नदियों और जलमग्न क्षेत्रों के कृत्रिम दृश्य तैयार कर असल रेस्क्यू ऑपरेशन जैसी चुनौतियों का सामना किया गया। इस दौरान जवानों ने निम्नलिखित प्रमुख तकनीकों और उपकरणों का लाइव परीक्षण किया:

  • आधुनिक नाव संचालन: बाढ़ की तेज लहरों के बीच मोटर बोट और लाइफ-बोट्स को सुरक्षित ढंग से चलाने का अभ्यास।

  • सुरक्षित निकासी (Evacuation): जलमग्न या पूरी तरह से डूब चुके गांवों और घरों से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाना।

  • हाई-टेक उपकरणों का परीक्षण: लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, आधुनिक रस्सियों के माध्यम से वर्टिकल रेस्क्यू, और पानी के भीतर काम आने वाले आधुनिक जीवनरक्षक उपकरणों की उपलब्धता व कार्यशीलता को जांचा गया।

  • प्राथमिक उपचार (First Aid): पानी से निकाले गए पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने से पहले दिए जाने वाले तत्काल मेडिकल सपोर्ट (CPR और फर्स्ट एड) का भी प्रदर्शन किया गया।

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विभिन्न विभागों का दिखा समेकित तालमेल

आपदा के समय सबसे महत्वपूर्ण कड़ी विभिन्न विभागों के बीच का आपसी समन्वय (Coordination) होता है। इस मॉक एक्सरसाइज में केवल सुरक्षा बल ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग (लेखपाल/कानूनगो), अग्निशमन सेवा (Fire Brigade), एनडीआरएफ (NDRF), और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) ने मिलकर काम किया। सभी विभागों ने एकजुट होकर 'समेकित आपदा प्रबंधन कार्यप्रणाली' का बेहतरीन उदाहरण पेश किया।

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"मानव जीवन की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता" — डीजीपी पीएसी

सफल आयोजन के बाद पुलिस महानिदेशक (PAC) आलोक सिंह ने बाढ़ राहत दलों और एसडीआरएफ की टीमों को कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए:बाढ़ राहत दलों के सभी कार्मिकों की नियमित ब्रीफिंग की जाए। सभी मोटर बोट्स और जीवनरक्षक उपकरणों का समय-समय पर निरीक्षण और मेंटेनेंस होना अनिवार्य है, ताकि जब भी आपात स्थिति आए, तो प्रभावित क्षेत्रों में बिना एक मिनट गंवाए तत्काल राहत कार्य शुरू किया जा सके। मानव जीवन की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उत्तर प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा और सहायता के लिए पीएसी और एसडीआरएफ का हर एक जवान पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ 24 घंटे मुस्तैद है।"

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