UP News: यूपी एड्स कंट्रोल सोसाइटी कर्मचारी संघ का स्थापना दिवस संपन्न, संविदा कर्मियों को नियमित करने के लिए विधानसभा में चर्चा की मांग
UP State AIDS Control Society Employees Union: उत्तर प्रदेश एड्स कण्ट्रोल सोसाइटी कर्मचारी संघ द्वारा बड़े पैमाने पर स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अयोध्या के सांसद माननीय अवधेश प्रसाद उपस्थित रहे। वहीं, अति विशिष्ट अतिथि के तौर पर आजमगढ़ के विधायक डॉ. संग्राम यादव और बहराइच के कैसरगंज से विधायक माननीय आनंद कुमार यादव ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) उत्तर प्रदेश के महासचिव श्री चंद्रशेखर शर्मा ने की।
इस प्रांतीय समागम में प्रदेश भर से आए लगभग 1000 से अधिक पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस से संबद्ध विभिन्न ट्रेड यूनियनों, एनजीओ संस्थाओं और संपूर्ण सुरक्षा केंद्र के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
25 वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारी, हर साल संविदा विस्तार पर उठाए सवाल
स्थापना दिवस के मंच से संघ के पदाधिकारियों ने अपनी दो दशकों से चली आ रही मांगों और समस्याओं को पुरजोर तरीके से उठाया। कार्यक्रम में अवगत कराया गया कि:
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करोड़ों जनता की सुरक्षा: उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता को एचआईवी/एड्स जैसी गंभीर बीमारी से बचाने और जागरूक करने के लिए पिछले 25 वर्षों से यह कार्यक्रम संचालित हो रहा है। केंद्र सरकार द्वारा शत-प्रतिशत वित्त पोषित इस कार्यक्रम को 'उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी' के माध्यम से चलाया जा रहा है।
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कर्मचारियों का योगदान: वर्तमान में प्रदेश के 1620 कर्मचारी अपनी पूरी क्षमता और दक्षता के साथ इस अभियान में जुटे हुए हैं। प्रदेश में इस समय लगभग 1,33,000 एचआईवी/एड्स ग्रसित व्यक्तियों का नियमित उपचार किया जा रहा है, जबकि करीब 1,00,000 लोग अभी भी उपचार के दायरे से बाहर हैं।
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बढ़ते आंकड़े चिंताजनक: वर्तमान गणितीय और सांख्यिकीय पद्धति के अनुसार, उत्तर प्रदेश में हर साल लगभग 20,000 नए व्यक्ति एचआईवी/एड्स की चपेट में आ रहे हैं, जो प्रदेश के स्वास्थ्य और भविष्य के लिहाज से बेहद चिंताजनक है।
संविदा व्यवस्था को बताया विरोधाभासी और मानसिक आघात
कर्मचारी संघ ने वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहाँ एचआईवी/एड्स से पीड़ित व्यक्ति जीवन भर अपना इलाज कराने के लिए बाध्य है, वहीं इस जीवन रक्षक कार्यक्रम में तैनात कर्मचारियों को हर साल 'संविदा विस्तार' (Contract Extension) के दौर से गुजरना पड़ता है।
नेताओं ने कहा कि यह वार्षिक संविदा विस्तार की नीति विरोधाभासी है और अक्सर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है। इस अनिश्चितता के कारण कई बार अल्प वेतनभोगी कर्मचारी अधिकारियों की नाराजगी का शिकार होकर अपनी नौकरी गंवा बैठते हैं या उनका वार्षिक इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) रोक दिया जाता है, जिससे वे लगातार मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि यदि जनता को सुरक्षित रखना है, तो फ्रंटलाइन पर काम करने वाले इन कर्मचारियों का मानसिक रूप से मजबूत और सुरक्षित होना नितांत आवश्यक है।
विधानसभा में गूंजेगा नियमितीकरण का मुद्दा, जनप्रतिनिधियों ने दी सहमति
सम्मेलन के दौरान सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया कि प्रदेश, कार्यक्रम और कर्मचारी के व्यापक हित को देखते हुए उत्तर प्रदेश एड्स कण्ट्रोल सोसाइटी कर्मचारी संघ के अंतर्गत रजिस्टर्ड सभी सदस्यों को भारत सरकार द्वारा जारी "अनापत्ति प्रमाण पत्र" (NOC) के आधार पर शिक्षा विभाग या अन्य विभागों की तर्ज पर नियमित (Regularize) किया जाए।
समारोह में मौजूद माननीय सांसदों और विधायकों ने इस गंभीर मुद्दे पर अपनी पूर्ण सहमति व्यक्त की और आश्वस्त किया कि कर्मचारियों के इस हक की आवाज को उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी सत्र में चर्चा के लिए प्रमुखता से उठाया जाएगा।
कार्यक्रम में ये प्रमुख पदाधिकारी रहे मौजूद
इस विशाल प्रदेश स्तरीय समागम को सफल बनाने में संघ की प्रदेश कार्यकारिणी के कई मुख्य चेहरों ने अहम भूमिका निभाई, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे: पंकज कुमार श्रीवास्तव (प्रदेश अध्यक्ष), नरेंद्र कुमार (प्रदेश महामंत्री), सिद्धेश्वर पांडेय (उपाध्यक्ष), अरविंद मिश्रा (उपाध्यक्ष), डॉ. राजेश मिश्रा (मुख्य सलाहकार), विश्वजीत ओझा (प्रदेश प्रभारी), अजय साहू (प्रदेश उपमहामंत्री), अजय सिंह (प्रवक्ता), ममता सिंह (संगठन मंत्री), अर्चना उपाध्याय (संगठन मंत्री), रत्नेश मणि त्रिपाठी (राज्य संयोजक), प्रतिभा पांडेय (संगठन मंत्री), रमेश यादव (संस्थापक सदस्य), अमित मिश्रा (संगठन मंत्री), सिद्धार्थ राय (संगठन मंत्री), प्रशांत अवस्थी और अपूर्व श्रीवास्तव।
