यूपी: अब स्कूलों में गूँजेगी खबरों की गूँज, मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए छात्र करेंगे समाचार पत्र वाचन
लखनऊ। डिजिटल क्रांति के इस दौर में जहाँ किशोरों और विद्यार्थियों में मोबाइल फोन की लत और 'स्क्रीन टाइम' एक गंभीर समस्या बन गई है, उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अपर मुख्य सचिव (माध्यमिक व बेसिक शिक्षा) के निर्देशानुसार, अब लखनऊ मण्डल के सभी माध्यमिक विद्यालयों में समाचार पत्र वाचन को दैनिक स्कूली दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाएगा।
स्क्रीन टाइम बनाम पठन संस्कृति
संचार क्रांति ने सूचनाओं तक पहुँच तो आसान बनाई है, लेकिन इसका नकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों की एकाग्रता और पढ़ने की आदतों पर पड़ा है। लखनऊ मण्डल के विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार के अनुसार, अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों के क्रम में यह निर्णय लिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को मोबाइल एडिक्शन से मुक्त कर उन्हें पुनः पुस्तकों और पुस्तकालयों की ओर मोड़ना है।
इन 6 जिलों में लागू होंगे निर्देश
संयुक्त शिक्षा निदेशक (लखनऊ मण्डल) डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने इस योजना को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए लखनऊ मण्डल के अंतर्गत आने वाले सभी 6 जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को आदेश जारी कर दिए हैं:
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लखनऊ
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सीतापुर
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हरदोई
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लखीमपुर खीरी
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रायबरेली
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उन्नाव
समाचार पत्र वाचन के 8 प्रमुख उद्देश्य
विद्यालयों में प्रार्थना सभा के दौरान चक्रानुसार (रोटेशन के आधार पर) प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों को समाचार पढ़ने का अवसर मिलेगा। इसके लाभ इस प्रकार हैं:
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प्रतियोगी परीक्षाओं की नींव: वर्तमान घटनाओं से अपडेट रहकर छात्र भविष्य की परीक्षाओं के लिए तैयार होंगे।
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भाषाई कौशल: नए शब्दों के चयन से शब्दावली (Vocabulary) में वृद्धि होगी।
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तार्किक सोच: खबरों के विश्लेषण से आलोचनात्मक और तार्किक क्षमता विकसित होगी।
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एकाग्रता: डिजिटल भटकाव कम होगा और एकाग्रता बढ़ेगी।
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सामाजिक चेतना: समाज और अपने परिवेश के प्रति संवेदनशीलता पैदा होगी।
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समस्या समाधान: समाचार पत्रों में आने वाली पहेलियों के जरिए मानसिक विकास होगा।
स्कूलों में क्या-क्या गतिविधियां होंगी?
सिर्फ खबर पढ़ना ही नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग ने कई रचनात्मक गतिविधियों को भी इस योजना में शामिल किया है:
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प्रार्थना सभा में वाचन: रोटेशन के आधार पर छात्रों द्वारा प्रमुख खबरों का प्रस्तुतीकरण।
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आज का शब्द: प्रतिदिन एक नया शब्द और उसका अर्थ बोर्ड पर लिखा जाएगा।
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संपादकीय लेखन: कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए सप्ताह में एक बार संपादकीय विषयों पर चर्चा और मौलिक लेखन।
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न्यूज स्क्रैपबुक: महत्वपूर्ण खबरों की कतरन (Clippings) का संग्रह करना।
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स्कूल पत्रिका: छात्र स्वयं विद्यालय के समाचार पत्र या पत्रिका का संपादन करेंगे।
🌟 व्यक्तित्व विकास पर जोर
मण्डलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने विश्वास जताया कि यह पहल विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में व्यापक परिवर्तन लाएगी। समाचार पत्र न केवल उनके ज्ञान के दायरे को बढ़ाएंगे, बल्कि उनमें सामुदायिक जुड़ाव और स्थानीय जागरूकता को भी सुदृढ़ करेंगे।

