UP Politics: यूपी में ट्रांसफर पर मघमासान! ग्राम्य विकास मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने अपने ही प्रमुख सचिव को घेरा, लगाया मनमानी और भ्रष्टाचार का आरोप

UP Politics: Turmoil over transfers in UP! Rural Development Minister Vijay Lakshmi Gautam targets her own Principal Secretary, alleging arbitrary actions and corruption.
 
UP Politics: यूपी में ट्रांसफर पर मघमासान! ग्राम्य विकास मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने अपने ही प्रमुख सचिव को घेरा, लगाया मनमानी और भ्रष्टाचार का आरोप
उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हल्कों में उस समय खलबली मच गई, जब योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति के उल्लंघन का मामला खुद सरकार के भीतर से ही सामने आ गया। उत्तर प्रदेश की ग्राम्य विकास एवं समग्र ग्राम विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विजय लक्ष्मी गौतम ने अपने ही विभाग के प्रमुख सचिव पर तबादला नीति में घोर अनियमितता, नियमों की अनदेखी और मनमानी करने के गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल स्पष्टीकरण (Explanation) मांगा है।

इस औचक कदम के बाद से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और मंत्री की नाराजगी के बाद विभागीय तबादलों पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के बाद मंत्री का कड़ा रुख

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम्य विकास मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम विभाग में हुए हालिया तबादलों के तौर-तरीकों से बेहद असंतुष्ट थीं। तबादला सूची जारी होने के बाद से ही विभिन्न क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों (विधायकों और सांसदों) द्वारा मंत्री को लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों में स्थानांतरण प्रक्रिया में पक्षपात और नियमों को ताक पर रखने की बात कही गई थी। जनप्रतिनिधियों के कड़े विरोध के बाद संज्ञान लेते हुए मंत्री ने सीधे प्रमुख सचिव से जवाब-तलब कर लिया।

प्रमुख सचिव पर लगे ये 3 गंभीर आरोप

राज्य मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम द्वारा अपने विभाग के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी (प्रमुख सचिव) पर बेहद संगीन आरोप लगाए गए हैं:

  1. मुख्यमंत्री की स्वीकृति न लेना: मंत्री का आरोप है कि प्रमुख सचिव ने विभाग के भीतर जितने भी महत्वपूर्ण और बड़े तबादले किए, उनके लिए तय प्रक्रिया के तहत माननीय मुख्यमंत्री की अनिवार्य स्वीकृति (Approval) नहीं ली।

  2. समय-सीमा की अनदेखी: स्थानांतरण नीति के लिए सरकार द्वारा जो अंतिम समय-सीमा (Deadlines) तय की गई थी, उसे पूरी तरह से नजरअंदाज कर अपनी मर्जी से सूचियां जारी की गईं।

  3. भ्रष्टाचार की आशंका: मंत्री ने इस पूरी आनन-फानन और मनमाने तरीके से की गई प्रक्रिया के पीछे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता होने की गंभीर आशंका भी जताई है।

क्या कहती है उत्तर प्रदेश की स्थानांतरण नीति?

उत्तर प्रदेश शासन द्वारा तय की गई मौजूदा तबादला नीति के अनुसार किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के फेरबदल के लिए स्पष्ट नियम हैं:

  • जिला स्तर: किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को एक जिले में तैनात रहने की अधिकतम समय-सीमा 3 वर्ष निर्धारित है।

  • मण्डल स्तर: मण्डल (Divisional) स्तर पर किसी पद पर जमे रहने की अधिकतम समय-सीमा 7 वर्ष मान्य है।

मंत्री का सीधा आरोप है कि प्रमुख सचिव द्वारा किए गए इन तबादलों में इस बुनियादी 'टाइम-लिमिट' नियम का पालन ही नहीं किया गया। जिन लोगों के ट्रांसफर होने चाहिए थे उन्हें छोड़ दिया गया और जो नियमों के दायरे में नहीं आ रहे थे, उनका स्थानांतरण कर दिया गया।

मंत्रालय में बढ़ी सियासी तपिश

उत्तर प्रदेश सरकार लगातार पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करती आई है। ऐसे में एक कैबिनेट/राज्य मंत्री द्वारा अपने ही विभाग के शीर्ष आईएएस (IAS) अधिकारी को कटघरे में खड़ा करना और लिखित स्पष्टीकरण मांगना यह दर्शाता है कि भीतरखाने सब कुछ ठीक नहीं है। अब देखना यह होगा कि प्रमुख सचिव इस स्पष्टीकरण का क्या जवाब देते हैं और क्या मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) इस पूरे मामले में हस्तक्षेप कर तबादलों की नए सिरे से समीक्षा करता है।

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