UP Skill Development: योगी सरकार की बड़ी पहल, 1 अगस्त से शुरू होगा SSDF का दूसरा चरण, 1 लाख युवाओं को मिलेगा फ्यूचरिस्टिक ट्रेनिंग का मौका

UP Skill Development: Major initiative by the Yogi government; the second phase of SSDF begins on August 1, offering 1 lakh youths the opportunity for futuristic training.
 
UP Skill Development: योगी सरकार की बड़ी पहल, 1 अगस्त से शुरू होगा SSDF का दूसरा चरण, 1 लाख युवाओं को मिलेगा फ्यूचरिस्टिक ट्रेनिंग का मौका
उत्तर प्रदेश के युवाओं को आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुसार कुशल और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 'राज्य कौशल विकास निधि' (SSDF) योजना के तहत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण के दूसरे चरण का लक्ष्य आवंटन जारी कर दिया है। इसके तहत प्रदेश के 936 ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स को 1 लाख से अधिक युवाओं का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

'AI for All' और फ्यूचरिस्टिक कोर्सेज हुए अनिवार्य

प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्किल इंडिया' विजन को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश कौशल विकास के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है।

युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम (Tech-Savvy) बनाने के लिए इस बार कुछ बड़े और अनिवार्य बदलाव किए गए हैं:

  • अनिवार्य एआई मॉड्यूल: हर ट्रेनिंग बैच में 4 घंटे का 'AI for All' और सॉफ्ट स्किल मॉड्यूल पढ़ाना अनिवार्य कर दिया गया है।

  • न्यू-एज सेक्टर्स को प्राथमिकता: आधुनिक बाजार की जरूरतों को देखते हुए हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आईटी-आईटीईएस (IT-ITES), फूड प्रोसेसिंग, अपैरल और हैंडीक्राफ्ट्स जैसे सेक्टर्स को विशेष प्राथमिकता दी गई है। न्यू-एज ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स केवल इन्हीं फ्यूचरिस्टिक जॉब रोल्स में प्रशिक्षण देंगे।

सीसीटीवी से लाइव निगरानी और कड़े नियम

प्रशिक्षण की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए योगी सरकार ने सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं:

  • सीसीटीवी निगरानी: सभी प्रशिक्षण केंद्रों पर मानकों के अनुसार सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य है, जिसकी सीधी मॉनिटरिंग कौशल विकास मिशन के मुख्यालय से की जाएगी।

  • क्लास की अवधि: कोर्सेज की अधिकतम अवधि 900 घंटे तय की गई है। आवासीय केंद्रों पर रोजाना कम से कम 8 घंटे की क्लास संचालित करना जरूरी होगा।

  • सामान्य ज्ञान पर जोर: युवाओं के बौद्धिक विकास के लिए हर सेंटर पर प्रतिदिन एक हिंदी और एक अंग्रेजी का समाचार पत्र रखना होगा।

  • स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी: सभी नए प्रशिक्षण केंद्रों का उद्घाटन स्थानीय विधायक (MLA) के हाथों कराना अनिवार्य होगा।

  • कड़ी जांच: संस्थाएं केवल NCVET/NQR पोर्टल पर लिस्टेड जॉब रोल ही चुन सकेंगी, जिन्हें जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (DPMU) की गहन जांच के बाद ही मंजूरी मिलेगी।

'कौशल दर्पण' AI डैशबोर्ड से हुआ लक्ष्य आवंटन

पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इस बार लक्ष्य आवंटन की प्रक्रिया में ‘कौशल दर्पण’ AI डैशबोर्ड का उपयोग किया है। DPMU की केंद्र कैपेसिटी सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर ही संस्थाओं को टारगेट दिए गए हैं।

कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने आंकड़ों की जानकारी देते हुए बताया कि कुल 936 प्रशिक्षण प्रदाताओं को 1 लाख से अधिक युवाओं को ट्रेंड करने का जिम्मा मिला है:

  • निजी, राजकीय व स्टार्ट-अप प्रदाता: 831 संस्थाओं को 91,425 युवाओं का लक्ष्य।

  • औद्योगिक/न्यू-एज प्रदाता: 105 संस्थाओं को 14,650 युवाओं का लक्ष्य।

नोट: इससे पहले अप्रैल 2026 में आयोजित पहले चरण के तहत 957 ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स को 99 हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य दिया गया था, जिनकी कक्षाएं वर्तमान में सफलतापूर्वक चल रही हैं।

1 अगस्त से शुरू होंगी कक्षाएं, लापरवाही पर होगी 'जीरो टॉलरेंस' कार्रवाई

मिशन निदेशक ने स्पष्ट किया कि चयनित संस्थाओं को हर हाल में 01 अगस्त, 2026 से कक्षाएं शुरू करनी होंगी। इसके लिए सेंटर सिलेक्शन से लेकर प्लेसमेंट तक का 17-चरणों का एक कड़ा टाइम-टेबल जारी किया गया है।

ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स को चेतावनी देते हुए मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि लक्ष्य आवंटन का मतलब काम शुरू करना नहीं है। जब तक प्रदाता मिशन के साथ लिखित अनुबंध (Agreement) नहीं कर लेते, तब तक बैच को मंजूरी नहीं मिलेगी। यदि किसी भी संस्था ने समय पर कक्षाएं शुरू नहीं कीं या फील्ड से कोई शिकायत मिली, तो सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

प्लेसमेंट और 365 दिनों की ट्रैकिंग के नियम

कोर्स पूरा होने के बाद युवाओं के रोजगार के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं:

  • रोजगार मेले में केवल उन्हीं छात्रों को बैठने की अनुमति होगी जिनकी उपस्थिति 70% या उससे अधिक होगी।

  • परीक्षा परिणाम आने के 90 दिनों के भीतर संस्थाओं को छात्रों का प्लेसमेंट कराना अनिवार्य होगा।

  • नौकरी मिलने के बाद भी युवाओं की 365 दिनों (एक साल) तक ट्रैकिंग की जाएगी ताकि उनकी स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

इस बड़े अभियान को गति देने और सफल संचालन के लिए होटल मैनेजमेंट के डीन डॉ. प्रदीप खटकर ने मिशन से जुड़े सभी स्टाफ सदस्यों और अधिकारियों को बधाई दी है।

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