UP Teachers Protest: ‘शिक्षक इंसान हैं, मशीन नहीं’; ग्रीष्मावकाश में लगी परीक्षाओं और जनगणना ड्यूटी पर भड़का माध्यमिक शिक्षक संघ, अर्जित अवकाश की मांग
लखनऊ (शिक्षा डेस्क), 31 मई 2026: उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षकों ने गर्मियों की छुट्टियों (ग्रीष्मावकाश) के दौरान लगातार विभिन्न सरकारी और प्रतियोगी परीक्षाओं सहित जनगणना कार्यों में ड्यूटी लगाए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने इस प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरी नाराजगी जताते हुए शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) को एक आधिकारिक पत्र लिखा है।
संघ के प्रदेश मंत्री संजय द्विवेदी ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि लगातार काम के अत्यधिक दबाव के कारण शिक्षक मानसिक रूप से डिप्रेशन (अवसाद) का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "हद हो गई है, माध्यमिक शिक्षक अब कर्मचारी नहीं बल्कि मशीन बनकर रह गए हैं। छुट्टियों के दिनों में भी उन्हें एक दिन चैन से बैठने नहीं दिया जा रहा है।
वार्षिक कैलेंडर बनाम जमीनी हकीकत: छुट्टियों में काम की लंबी फेहरिस्त
शिक्षक संघ ने शिक्षा निदेशक को भेजे पत्र में वार्षिक कैलेंडर और छुट्टियों के दौरान सौंपे गए अतिरिक्त कार्यों का पूरा ब्योरा पेश किया है:
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कागजी ग्रीष्मावकाश: माध्यमिक शिक्षा के आधिकारिक वार्षिक कैलेंडर के अनुसार, पूरे प्रदेश में 21 मई से 30 जून 2026 तक ग्रीष्मावकाश (गर्मियों की छुट्टियां) घोषित है।
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जनगणना ड्यूटी का दबाव: कैलेंडर के विपरीत, 22 मई से 20 जून तक पूरे प्रदेश के शिक्षकों की ड्यूटी अनिवार्य रूप से जनगणना कार्य में लगा दी गई है, जिससे ग्रीष्मावकाश का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो गया है।
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स्टेशन छोड़ने पर पाबंदी: कई जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) द्वारा शिक्षकों के मुख्यालय या स्टेशन छोड़ने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, जिससे वे अपने परिवारों से भी नहीं मिल पा रहे हैं।
जून में होने वाली परीक्षाओं की सूची, जिनमें लगी है शिक्षकों की ड्यूटी
| परीक्षा का नाम | निर्धारित तिथियां |
| प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) भर्ती परीक्षा | 3 और 4 जून 2026 |
| यूपी पुलिस आरक्षी नागरिक भर्ती लिखित परीक्षा | 8, 9 और 10 जून 2026 (दो पारियों में) |
| अन्य परीक्षाएं | बीटीसी (BTC) और बीएड (B.Ed.) परीक्षाएं |
क्या कहते हैं नियम? (अधिनियम और वित्तीय नियमावली का हवाला)
प्रदेश मंत्री संजय द्विवेदी ने अपने पत्र में इण्टर शिक्षा अधिनियम, 1921 और वित्तीय नियमों का कानूनी हवाला देते हुए शिक्षकों के अधिकारों की बात रखी:
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इंटर शिक्षा अधिनियम 1921 (अध्याय-3, विनियम 99): इस नियम के तहत अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को ठीक उसी तरह और उन्हीं प्रतिबंधों के अधीन अवकाश देय हैं, जैसे राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के अध्यापकों पर लागू होते हैं।
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वित्तीय नियम संग्रह (खंड-2, मूल नियम 81-ख (1)): इसके तहत यदि किसी सरकारी या शासकीय कार्य के कारण शिक्षकों को उनके संपूर्ण या आंशिक दीर्घावकाश (वेकेशन) का उपभोग नहीं करने दिया जाता है, तो उस अवधि के अनुपात में उनके खाते में अर्जित अवकाश (Earned Leave / उपार्जित अवकाश) जोड़ा जाना अनिवार्य है।
शिक्षक संघ की मुख्य मांगें
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने शिक्षा निदेशक से मांग की है कि पूर्व के वर्षों की भांति इस बार भी नियमों का पालन किया जाए:
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अर्जित अवकाश की स्वीकृति: वर्ष 2026 के ग्रीष्मावकाश के दौरान जिन भी अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों से जनगणना, बोर्ड परीक्षाओं, मूल्यांकन, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं या उनकी ब्रीफिंग (तैयारी बैठकों) का कार्य लिया जा रहा है, उन्हें उसके बदले नियमानुसार अर्जित अवकाश (EL) दिया जाए।
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आदेश जारी करने की अपील: संघ ने महानिदेशक और शिक्षा निदेशक से अनुरोध किया है कि सभी जिलों के DIOS को इस संबंध में तत्काल स्पष्ट दिशा-निर्देश और आदेश जारी किए जाएं ताकि शिक्षकों के अवकाश लेखे में ये दिन जमा हो सकें।
