UPITS-2026: UPSDM पवेलियन में दिखा हुनर और रचनात्मकता, ‘स्किल मंच’ बना आकर्षण का केंद्र

बच्चों से बुजुर्गों तक ने दिखाई प्रतिभा, चिकनकारी से ब्लैक पॉटरी और लकड़ी के खिलौनों तक ने खींचा ध्यान
 
kopko
ग्रेटर नोएडा/लखनऊ, 27 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश की कला, कौशल और पारंपरिक कारीगरी को वैश्विक मंच प्रदान करने वाले UP International Trade Show 2026 (UPITS) के तीसरे दिन उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) का पवेलियन लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। रविवार को अवकाश का दिन होने के कारण बड़ी संख्या में परिवार, युवा, बच्चे और बुजुर्ग यहां पहुंचे। लोगों ने प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को करीब से देखने के साथ विभिन्न कौशलों को समझने और उन्हें स्वयं आजमाने का अनुभव भी लिया।

पहली बार शुरू हुआ ‘स्किल मंच’

इस वर्ष पहली बार शुरू किए गए ‘स्किल मंच’ पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बच्चों ने विभिन्न प्रस्तुतियों के जरिए दर्शकों की तालियां बटोरीं, जबकि युवाओं ने गायकी और फाइन आर्ट्स के माध्यम से अपनी रचनात्मकता दिखाई।‘हुनर’ थीम पर आयोजित गतिविधि में युवाओं ने रंगों के माध्यम से अपनी कल्पनाशीलता को अभिव्यक्ति दी। मंच का उद्देश्य लोगों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ कौशल, करियर और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है।

लाइव डेमो और DIY गतिविधियों ने बढ़ाई रुचि

UPSDM पवेलियन में विभिन्न कौशलों के लाइव डेमो भी लोगों के लिए खास आकर्षण बने। पॉटरी और टेराकोटा स्टॉल पर विजिटर्स ने मिट्टी को अपने हाथों से आकार देकर कलाकृतियां बनाने की कोशिश की।वहीं लखनऊ की चिकनकारी के स्टॉल पर लोगों ने सूई-धागे से की जाने वाली बारीक कारीगरी को करीब से समझा और इसे खुद आजमाने में भी रुचि दिखाई।

DIY गतिविधियों के जरिए लोगों को केवल उत्पादों या कारीगरी को देखने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें प्रक्रिया को समझने और खुद करके सीखने का अवसर दिया गया। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने अलग-अलग स्टॉल पर पहुंचकर इन गतिविधियों में हिस्सा लिया।

बनारस के खिलौने और आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी आकर्षण का केंद्र

UPSDM पवेलियन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों की कला और उत्पादों को भी प्रदर्शित किया गया। बनारस के लकड़ी के खिलौने, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और मथुरा के डेकोरेटिव आइटम्स को देखने और उनके बारे में जानकारी लेने में विजिटर्स की विशेष रुचि दिखाई दी।

प्रतापगढ़ के स्टॉल पर लोगों ने आंवला से बने विभिन्न उत्पादों के बारे में जानकारी ली और उनके स्वाद का भी अनुभव किया। वहीं लखनऊ की चिकनकारी ने अपनी बारीक कारीगरी से लोगों का ध्यान आकर्षित किया।विजिटर्स ने उत्पादों को देखने के साथ-साथ उनके निर्माण की प्रक्रिया, परंपरा और उनसे जुड़े कौशल के बारे में भी जानकारी ली।

‘देखिए, समझिए और खुद करके सीखिए’ का अनुभव

UPSDM पवेलियन की गतिविधियों में पारंपरिक कला और आधुनिक कौशल के साथ सीखने का अनुभव भी शामिल रहा। लाइव डेमो और DIY गतिविधियों के माध्यम से लोगों को यह समझने का अवसर मिला कि हुनर केवल प्रदर्शित करने की वस्तु नहीं, बल्कि उसे देखकर, समझकर और स्वयं अभ्यास करके सीखा भी जा सकता है।

UPITS-2026 में UPSDM पवेलियन इस तरह कला, कौशल, रचनात्मकता और सीखने के अनुभव को एक साथ जोड़ रहा है। अलग-अलग जिलों के उत्पादों और कारीगरी की मौजूदगी ने उत्तर प्रदेश के स्थानीय हुनर को व्यापक दर्शक वर्ग के सामने प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया।

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