योगी सरकार में उद्योगों की जरूरत के मुताबिक बदलेंगे यूपी के आईटीआई, आठ शहरों में लागू होगा पीएम-सेतु मॉडल

कानपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और आगरा के आईटीआई क्लस्टरों में उद्योग भागीदारी की प्रक्रिया शुरू
 
योगी सरकार में उद्योगों की जरूरत के मुताबिक बदलेंगे यूपी के आईटीआई, आठ शहरों में लागू होगा पीएम-सेतु मॉडल

लखनऊ, 23 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में युवाओं को उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण देने के लिए राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को नए स्वरूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार केंद्र की प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम-सेतु) योजना के तहत आईटीआई को उद्योग आधारित कौशल विकास केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

पहले चरण में कानपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और आगरा के राजकीय आईटीआई क्लस्टरों में उद्योगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसका उद्देश्य आईटीआई में दिए जाने वाले प्रशिक्षण और उद्योगों की वर्तमान एवं भविष्य की कौशल आवश्यकताओं के बीच की दूरी को कम करना है।

प्रशिक्षण से लेकर प्लेसमेंट तक उद्योगों की भागीदारी

पीएम-सेतु मॉडल के तहत उद्योगों को केवल रोजगार उपलब्ध कराने वाली इकाइयों के रूप में नहीं, बल्कि प्रशिक्षण व्यवस्था के सक्रिय भागीदार के तौर पर जोड़ा जाएगा। उद्योगों की मदद से पाठ्यक्रमों को अपडेट करने, आधुनिक मशीनों और तकनीकों को प्रशिक्षण में शामिल करने तथा प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने पर जोर रहेगा।

इसके अलावा उद्योग ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स, एप्रेंटिसशिप, ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग और प्लेसमेंट लिंकेज जैसी गतिविधियों में भी भागीदारी करेंगे। इससे आईटीआई में दाखिले से लेकर प्रशिक्षण और रोजगार तक की पूरी प्रक्रिया को उद्योगों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

आठ आईटीआई क्लस्टरों के लिए एंकर इंडस्ट्री पार्टनर

प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के अनुसार, पीएम-सेतु के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चयनित आठ शहरों के राजकीय आईटीआई क्लस्टरों को उद्योगों से जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक क्लस्टर के लिए एंकर इंडस्ट्री पार्टनर (एआईपी) की पहचान और उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

सरकार की कोशिश है कि प्रत्येक क्षेत्र के औद्योगिक स्वरूप और स्थानीय रोजगार की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएं। इससे आईटीआई से प्रशिक्षण लेकर निकलने वाले युवाओं के कौशल और स्थानीय उद्योगों की मांग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सकेगा।

आधुनिक मशीनों और नई तकनीक से लैस होंगे संस्थान

पीएम-सेतु मॉडल के तहत एंकर इंडस्ट्री पार्टनर राज्य सरकार के साथ मिलकर प्रशिक्षण मानकों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने में सहयोग करेंगे। संस्थानों में आधुनिक मशीनों और उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ प्रशिक्षकों को नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा।

योजना के तहत एप्रेंटिसशिप, ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग, प्लेसमेंट लिंकेज और आरपीएल (Recognition of Prior Learning) क्षमता निर्माण जैसी गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव और रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलेगी।

200 से अधिक कर्मचारियों वाले उद्योग कर सकेंगे भागीदारी

उत्तर प्रदेश में एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स के चयन के लिए उद्योगों से भागीदारी आमंत्रित की गई है। पात्र उद्योगों के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू), उद्योग संगठन और अन्य संबंधित संस्थाएं भी इसमें भाग ले सकती हैं। इसके लिए 200 से अधिक कर्मचारियों वाले संगठनों को पात्रता के दायरे में रखा गया है।

क्लस्टर के औद्योगिक स्वरूप, कौशल जरूरतों और स्थानीय रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप उद्योग की भूमिका को चयन प्रक्रिया में महत्व दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक आईटीआई क्लस्टर को वहां के मौजूदा उद्योगों और भविष्य में पैदा होने वाले रोजगार अवसरों के अनुरूप विकसित किया जाए।

पांच वर्षों में 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना

पीएम-सेतु योजना के तहत अगले पांच वर्षों में देशभर के राजकीय आईटीआई के रूपांतरण के लिए करीब 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है। प्रस्तावित निवेश में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 30 हजार करोड़ रुपये, राज्य सरकारों की 20 हजार करोड़ रुपये और उद्योगों की 10 हजार करोड़ रुपये बताई गई है।

इस व्यवस्था के तहत केंद्र की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत, राज्यों की 33 प्रतिशत और उद्योगों की लगभग 17 प्रतिशत होगी।

1,000 आईटीआई को हब एंड स्पोक मॉडल से विकसित करने की योजना

योजना के तहत देशभर में करीब 1,000 राजकीय आईटीआई को हब एंड स्पोक मॉडल के आधार पर विकसित करने की परिकल्पना है। इनमें लगभग 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई शामिल होंगे।

हब आईटीआई को आधुनिक बुनियादी ढांचे, अत्याधुनिक उपकरणों, उद्योगों के साथ मजबूत संपर्क और प्रशिक्षक विकास की सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। वहीं स्पोक आईटीआई को हब से जोड़कर प्रशिक्षण की पहुंच और गुणवत्ता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

इस मॉडल से महंगे उपकरण, आधुनिक प्रयोगशालाएं, विशेषज्ञ प्रशिक्षक और अन्य संसाधनों का लाभ एक संस्थान तक सीमित न रहकर क्लस्टर से जुड़े कई आईटीआई को मिल सकेगा।

आईटीआई प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ने पर जोर

प्रदेश सरकार का जोर आईटीआई प्रशिक्षण को केवल कक्षा और प्रमाणपत्र तक सीमित रखने के बजाय सीधे रोजगार से जोड़ने पर है। उद्योगों की भागीदारी बढ़ने से विद्यार्थियों को एप्रेंटिसशिप और कार्यस्थल आधारित प्रशिक्षण के अधिक अवसर मिलने की उम्मीद है।

इसके साथ ही संबंधित जिलों में उद्योगों और एमएसएमई की पहचान कर उनसे संवाद स्थापित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। जिला प्रशासन के सहयोग से स्थानीय उद्योगों को पीएम-सेतु मॉडल से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकार की इस पहल का व्यापक उद्देश्य आईटीआई-इंडस्ट्री इकोसिस्टम को मजबूत करना, प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा युवाओं को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराना है।

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