अमेरिकी अदालत का बड़ा फैसला: ट्रंप के टैरिफ अवैध घोषित – भारत को क्या मिलेगा फायदा?
आज हम एक ऐसी खबर पर बात करने जा रहे हैं, जो न सिर्फ भारत-अमेरिका व्यापार को प्रभावित कर रही है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में हलचल मचा रही है। अमेरिका की एक federal appeal अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी करार दे दिया है। जी हां, ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी को बड़ा झटका लगा है! लेकिन सवाल ये है कि क्या इस फैसले से भारत को कोई राहत मिलेगी? या फिर Indian exporters को अभी भी 50% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा ? आइए, इस पूरे मामले को detail से जानते हैं और समझते हैं कि इसका भारत पर क्या असर होगा। तो वीडियो को लास्ट तक जरूर देखिएगा
सबसे पहले ये समझते हैं कि आखिर ये टैरिफ का मामला क्या है ? डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में global trade को अपने हिसाब से ढालने के लिए कई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए। इनमें भारत, चीन, ब्राजील, कनाडा और मेक्सिको जैसे देश शामिल हैं। खास तौर पर भारत के लिए, ट्रंप ने 25% का बेस टैरिफ और रूस से तेल खरीदने की वजह से 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया, यानी कुल 50% टैरिफ। इसका मकसद था अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करना और दूसरे देशों पर दबाव बनाकर व्यापार समझौते अपने पक्ष में करना। लेकिन इन टैरिफ्स ने global markets में uncertainty बढ़ा दी। भारत जैसे देशों के exporter, खासकर टेक्सटाइल, ज्वेलरी, और मशीनरी सेक्टर में, भारी नुकसान की आशंका से जूझ रहे हैं। क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, इस टैरिफ की वजह से भारत का अमेरिका को export 43% तक कम हो सकता है।
अब बात करते हैं अमेरिकी कोर्ट के ताजा फैसले की। वॉशिंगटन डीसी की एक federal appeal अदालत ने 7-4 के बहुमत से फैसला सुनाया कि ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का दुरुपयोग करके टैरिफ लगाए। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति को emergency powers मिली हैं, लेकिन इनमें टैरिफ या टैक्स लगाने का अधिकार शामिल नहीं है। इसलिए, ट्रंप के लगाए गए ज्यादातर टैरिफ गैरकानूनी हैं। कोर्ट ने खास तौर पर अप्रैल में लागू किए गए रेसिप्रोकल टैरिफ और फरवरी में चीन, कनाडा, मेक्सिको पर लगाए गए टैरिफ को अवैध ठहराया। हालांकि, स्टील और एल्युमिनियम पर लगे कुछ टैरिफ इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे। ट्रंप ने इस फैसले को "पक्षपातपूर्ण" बताया और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही है।
अब बड़ा सवाल ये है कि क्या इस फैसले से भारत को राहत मिलेगी ? जवाब थोड़ा complex है। कोर्ट के फैसले ने ट्रंप के ज्यादातर टैरिफ को गैरकानूनी ठहराया है, लेकिन भारत पर लगाए गए टैरिफ पर इसका तत्काल कोई असर नहीं होगा। क्यों? क्योंकि ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ को दो हिस्सों में लागू किया था—25% रेसिप्रोकल टैरिफ और 25% रूस से तेल खरीदने के लिए जुर्माने के तौर पर। कोर्ट के फैसले से रेसिप्रोकल टैरिफ पर तो सवाल उठे हैं, लेकिन रूस से तेल खरीद के लिए लगाया गया 25% टैरिफ अभी भी लागू रहेगा, क्योंकि इसे अलग कानूनी प्रावधानों के तहत लगाया गया था। यानी भारत के कुछ products पर अभी भी 50% टैरिफ का बोझ बना रहेगा।
हालांकि, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, और पेट्रोलियम जैसे सेक्टर को इस टैरिफ से छूट मिली हुई है, जो भारत के कुल export का लगभग 30% है। फिर भी, टेक्सटाइल, ज्वेलरी, और मशीनरी जैसे सेक्टरों में भारी नुकसान की आशंका है। क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, इन सेक्टरों में export 70% तक कम हो सकता है।
भारत सरकार इस मामले में चुप नहीं बैठी है। commerce minister पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत अपने निर्यातकों और नौकरियों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। government export promotion मिशन शुरू कर रही है, जिसमें exporters को financial assistance, बैंक कर्ज पर राहत, और नए बाजारों में विस्तार की सुविधा दी जाएगी। भारत अब चीन, लैटिन अमेरिका, और मध्य पूर्व जैसे बाजारों पर फोकस कर रहा है ताकि अमेरिका पर निर्भरता कम हो। साथ ही, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स पर काम तेज हो गया है। पीएम मोदी ने भी साफ कर दिया है कि भारत अपने डेयरी और कृषि सेक्टर को अमेरिकी दबाव में नहीं खोलेगा, क्योंकि ये 10 करोड़ से ज्यादा लोगों की आजीविका से जुड़ा है।
तो ये थी ट्रंप के टैरिफ और अमेरिकी कोर्ट के फैसले की पूरी कहानी। भले ही कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को गैरकानूनी बताया हो, लेकिन भारत के लिए तत्काल राहत की उम्मीद कम है। फिर भी, भारत सरकार की रणनीति और मजबूत घरेलू मांग इस नुकसान को कम करने में मदद कर सकती है। अब आप क्या सोचते हैं? क्या भारत को अमेरिकी टैरिफ का जवाब देना चाहिए? या फिर नए बाजारों में विस्तार ही सही रास्ता है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर बताएं!
