योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रीन हाइड्रोजन का टेक्नोलॉजी लीडर बनने की ओर उत्तर प्रदेश
लखनऊ, 19 जनवरी। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर एक व्यापक एक्शन प्लान पर काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई दिशा देने जा रही है। इस रणनीति के अंतर्गत प्रदेश में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े स्टार्टअप्स को पांच वर्षों तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि ग्रीन हाइड्रोजन की लागत को कम कर उत्तर प्रदेश को देश की ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी का प्रमुख केंद्र बनाया जाए।
दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, हाई-एंड रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा
योजना के अंतर्गत स्थापित किए जाने वाले दोनों सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का विकास करना तथा लागत को न्यूनतम करना है। ये सेंटर देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से स्थापित किए जाएंगे।
इन केंद्रों में होने वाला शोध कार्य सीधे तौर पर उद्योग की आवश्यकताओं और मांगों से जुड़ा होगा, ताकि प्रयोगशाला से उद्योग तक तकनीक का प्रभावी हस्तांतरण सुनिश्चित किया जा सके।प्रदेश सरकार इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक की शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान करेगी, जिससे अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, परीक्षण सुविधाएं और हाई-एंड रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा सके।
ग्रीन हाइड्रोजन स्टार्टअप्स को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत स्टार्टअप्स को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में कार्यरत स्टार्टअप्स को पांच वर्षों तक हर साल अधिकतम 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।शर्त यह होगी कि ये स्टार्टअप्स मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों के इनक्यूबेशन सेंटर से जुड़े हों। इससे युवाओं को शोध आधारित उद्यमिता के अवसर मिलेंगे और उद्योग को स्वदेशी, किफायती तकनीक उपलब्ध होगी।
नेट जीरो लक्ष्य में यूपी की बड़ी भूमिका
भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में उत्तर प्रदेश एक बड़ी और प्रभावी भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी हब बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
गौरतलब है कि गोरखपुर जिले में प्रदेश के पहले ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जा चुका है। अनुमान है कि इस प्लांट से करीब 500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़ी कई और परियोजनाएं प्रदेश में पाइपलाइन में हैं।
ग्रीन जॉब्स और राष्ट्रीय मिशन में यूपी की बढ़त
रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप्स के इस समन्वित मॉडल से उत्तर प्रदेश में ग्रीन जॉब्स के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन में प्रदेश की भूमिका और मजबूती से स्थापित होगी। ग्रीन हाइड्रोजन नीति के माध्यम से उत्तर प्रदेश न केवल स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में अग्रसर होगा, बल्कि देश को आत्मनिर्भर और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की ओर ले जाने में तकनीकी नेतृत्व भी प्रदान करेगा।
