उत्तर प्रदेश बनेगा डीप टेक कैपिटल, IIT कानपुर बना मिशन का अग्रदूत

योगी सरकार की प्रतिबद्धता और आईआईटी-के की विशेषज्ञता बनेगी  आधार

टैलेंट, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स के माध्यम से सीएम योगी का संकल्प होगा साकार 

सैकड़ों स्टार्टअप हो रहे इनक्यूबेट, गहन वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़ी नई खोजों पर हो रहा काम 

आईआईटी कानपुर अलुमनाई डीप टेक विज़न को गति देने में देंगे अभूतपूर्व योगदान 

 
मुख्यमंत्री योगी की पहल  मुख्यमंत्री ने बुधवार को आईआईटी कानपुर में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि भारत का पहला "डीप टेक भारत 2025" उत्तर प्रदेश से आकार लेगा। इसके लिए एक राष्ट्रीय स्तर का शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें वैज्ञानिक, शोधकर्ता और स्टार्टअप मिलकर ठोस रोडमैप तैयार करेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि गौतमबुद्ध नगर में डीप टेक हब के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। इस हब को DRDO, ISRO और अन्य शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया जाएगा।  आईआईटी कानपुर की बड़ी भूमिका  आईआईटी कानपुर इस महत्वाकांक्षी मिशन का नेतृत्व कर रहा है। यहां पहले से ही सैकड़ों स्टार्टअप इनक्यूबेट हो रहे हैं और नई वैज्ञानिक खोजों पर काम जारी है। हाल ही में हुए सर्वे के अनुसार, 410 आईआईटी कानपुर पूर्व छात्रों में से 75% (307) स्टार्टअप्स और छात्रों को मेंटरिंग देने के लिए तैयार हैं। 63% (257) उद्योग जगत से जुड़े परामर्श और अनुभव साझा करेंगे, जबकि 46% (189) साझेदारी और सहयोग को बढ़ावा देंगे। इसके अलावा 21% (87) राज्य में उद्योग स्थापित करने और 15% (63) वित्तीय निवेश के लिए तत्पर हैं। यह भागीदारी यूपी के डीप टेक मिशन को अभूतपूर्व गति देगी।  यूपी बनेगा भारत का इनोवेशन हब  डीप टेक स्टार्टअप्स का कुल अनुमानित वैल्यूएशन 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा। इनोवेशन आधारित यह मॉडल युवाओं को प्रदेश में ही रोजगार उपलब्ध कराएगा और स्थानीय टैलेंट को राज्य से बाहर जाने से रोकेगा। योगी सरकार का यह प्रयास उत्तर प्रदेश को उपभोक्ता राज्य से प्रोडक्ट और इनोवेशन-ड्रिवन इकोनॉमी में बदलने की दिशा में है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट अब प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यावहारिक प्रोडक्ट बनकर बाजार तक पहुंचेगा।  भविष्य की इस रणनीति से उत्तर प्रदेश न केवल डीप टेक में देश का नेतृत्व करेगा, बल्कि भारत को तकनीकी महाशक्ति बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
लखनऊ,  सितंबर।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न के अनुरूप उत्तर प्रदेश को डीप टेक (Deep Tech) के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में आईआईटी कानपुर ने कमान संभाल ली है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में यूपी न केवल स्टार्टअप इकोसिस्टम में अग्रणी हो, बल्कि पूरे देश के लिए इनोवेशन का इंजन बने। इसी दिशा में 250 से अधिक डीप टेक स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट करने का लक्ष्य तय किया गया है, जिनसे भविष्य में 10,000 से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री योगी की पहल

मुख्यमंत्री ने बुधवार को आईआईटी कानपुर में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि भारत का पहला "डीप टेक भारत 2025" उत्तर प्रदेश से आकार लेगा। इसके लिए एक राष्ट्रीय स्तर का शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें वैज्ञानिक, शोधकर्ता और स्टार्टअप मिलकर ठोस रोडमैप तैयार करेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि गौतमबुद्ध नगर में डीप टेक हब के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। इस हब को DRDO, ISRO और अन्य शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया जाएगा।

आईआईटी कानपुर की बड़ी भूमिका

आईआईटी कानपुर इस महत्वाकांक्षी मिशन का नेतृत्व कर रहा है। यहां पहले से ही सैकड़ों स्टार्टअप इनक्यूबेट हो रहे हैं और नई वैज्ञानिक खोजों पर काम जारी है। हाल ही में हुए सर्वे के अनुसार, 410 आईआईटी कानपुर पूर्व छात्रों में से 75% (307) स्टार्टअप्स और छात्रों को मेंटरिंग देने के लिए तैयार हैं। 63% (257) उद्योग जगत से जुड़े परामर्श और अनुभव साझा करेंगे, जबकि 46% (189) साझेदारी और सहयोग को बढ़ावा देंगे। इसके अलावा 21% (87) राज्य में उद्योग स्थापित करने और 15% (63) वित्तीय निवेश के लिए तत्पर हैं। यह भागीदारी यूपी के डीप टेक मिशन को अभूतपूर्व गति देगी।

यूपी बनेगा भारत का इनोवेशन हब

डीप टेक स्टार्टअप्स का कुल अनुमानित वैल्यूएशन 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा। इनोवेशन आधारित यह मॉडल युवाओं को प्रदेश में ही रोजगार उपलब्ध कराएगा और स्थानीय टैलेंट को राज्य से बाहर जाने से रोकेगा। योगी सरकार का यह प्रयास उत्तर प्रदेश को उपभोक्ता राज्य से प्रोडक्ट और इनोवेशन-ड्रिवन इकोनॉमी में बदलने की दिशा में है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट अब प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यावहारिक प्रोडक्ट बनकर बाजार तक पहुंचेगा। भविष्य की इस रणनीति से उत्तर प्रदेश न केवल डीप टेक में देश का नेतृत्व करेगा, बल्कि भारत को तकनीकी महाशक्ति बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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