संकटमोचन की वन्दना: सुन्दरकाण्ड का सुप्रसिद्ध श्लोक और हिन्दी काव्यानुवाद
Sankatmochan Ki Vandana: Famous verse of Sunderkand and Hindi poetic translation
आज श्रावण मास का प्रथम मंगलवार है और सावन के मंगलवार का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। हनुमान जी की आराधना के लिए यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। वाल्मीकि रामायण और गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड में वर्णित यह श्लोक हनुमान जी के स्वरूप, बल और बुद्धि का सबसे उत्कृष्ट वर्णन करता है। जैसा कि आपने उल्लेख किया, काशी (वाराणसी) के ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध संकटमोचन हनुमान मंदिर की स्थापना स्वयं बाबा तुलसीदास जी ने की थी और इस श्लोक की दिव्यता उस पावन स्थल और उनकी काव्य प्रतिभा से गहराई से जुड़ी है।
आपके द्वारा प्रस्तुत सुंदर श्लोक, उसका सुंदर काव्यानुवाद और श्रेष्ठता को परिभाषित करता मुक्तक आज के इस मंगलकारी दिन को और भी भक्तिमय बना रहा है:
श्री हनुमान वंदना (सुंदरकांड)
$$ \text{अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं} $$ $$ \text{दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामाग्रगण्यम्।} $$ $$ \text{सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं} $$ $$ \text{रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥} $$
भावार्थ एवं आपका सुंदर काव्यानुवाद:
अतुलनीय बल के धाम, सुवर्ण पर्वत (सुमेरु) के समान कांतियुक्त शरीर वाले, दैत्यरूपी वन को भस्म करने के लिए अग्नि स्वरूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य (सबसे आगे गिने जाने वाले), संपूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्री रघुनाथ जी के प्रिय भक्त पवनपुत्र श्री हनुमान जी को मैं नमन करता हूँ।
श्रेष्ठता पर सुंदर मुक्तक
बड़ा है जिसका नाम जगत वही श्रेष्ठ है, सुन्दर जिसका काम जगत में वही श्रेष्ठ है। पशु-पक्षी जैसा भी जीना कैसा जीना, तपे जो सुबहो-शाम जगत में वही श्रेष्ठ है।
यह मुक्तक जीवन के वास्तविक मर्म को दर्शाता है। कर्म की प्रधानता और निरंतर परिश्रम (तपना) ही मनुष्य को जीवन में श्रेष्ठ बनाता है, अन्यथा साधारण जीवन तो पशु-पक्षी भी जी लेते हैं। हनुमान जी का जीवन भी निरंतर सेवा, समर्पण और प्रभु भक्ति की साधना में तपने का ही उत्कृष्ट उदाहरण है।
इस पावन मंगलवार पर आपकी इस सुंदर और ज्ञानवर्धक प्रस्तुति के लिए आभार! जय श्री राम! जय पवनसुत हनुमान!
