6 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित होगा ‘वाणी – कर्मा साहित्य पर्व 2026
उत्सव की थीम
“साहित्य, संस्कृति, सेवा: ज्ञान और संस्कृति के माध्यम से आत्मनिर्भर विकसित भारत का निर्माण।” एक सिंगल-स्टेज, गैर-व्यावसायिक साहित्यिक उत्सव के रूप में परिकल्पित वाणी, साहित्य, संस्कृति, शासन और युवाओं की आवाज़ों को एक मंच पर लाकर भारत की सभ्यतागत यात्रा और समकालीन राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर संवाद स्थापित करता है।
दिल्ली सरकार का सहयोग
मुख्य साझेदार के रूप में दिल्ली सरकार का कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग, साहित्य और विचारों के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना तथा जन-सहभागिता को सशक्त करने के उद्देश्य का समर्थन कर रहा है।
इस अवसर पर श्री कपिल मिश्रा, माननीय संस्कृति मंत्री, दिल्ली सरकार ने कहा दिल्ली लंबे समय से साहित्य, भाषा और सार्वजनिक चिंतन का केंद्र रही है। दिल्ली सरकार इस समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को विशेष महत्व देती है। तेज़ सामाजिक और तकनीकी परिवर्तन के दौर में ऐसे मंच आवश्यक हैं, जो साहित्य, विचार और मूल्यों पर गंभीर व सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करें। वाणी जैसे प्रयासों के माध्यम से हम एक जागरूक, जिम्मेदार और आत्मविश्वासी भारत के निर्माण में साहित्य और संस्कृति की भूमिका को पुनः सुदृढ़ करना चाहते हैं।”
फेस्टिवल डायरेक्टर का वक्तव्य
ध्वनि जैन, फेस्टिवल डायरेक्टर, वाणी – कर्मा साहित्य पर्व ने कहा भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपराएँ सदैव सार्वजनिक चेतना और राष्ट्रीय दिशा को आकार देती रही हैं। आज के परिवर्तनशील समय में ऐसे संवादात्मक मंचों की आवश्यकता है, जहाँ साहित्य, संस्कृति और सेवा समाज तथा शासन से जुड़ने के हमारे दृष्टिकोण को दिशा दें। वाणी का उद्देश्य एक आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में सार्थक योगदान देना है।”
उद्घाटन एवं प्रमुख सहभागिता
उत्सव का उद्घाटन श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, माननीय केंद्रीय संस्कृति मंत्री, भारत सरकार की गरिमामयी उपस्थिति में होगा। कार्यक्रम में श्री कपिल मिश्रा का मुख्य वक्तव्य तथा श्री तेजस्वी सूर्या, माननीय सांसद एवं अध्यक्ष, भारतीय जनता युवा मोर्चा के साथ एक विशेष स्पॉटलाइट संवाद भी आयोजित किया जाएगा।
प्रमुख वक्ता एवं सहभागी
वाणी 2026 में देश के वरिष्ठ नीति-निर्माता, लेखक, विद्वान और सांस्कृतिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियाँ सहभागिता करेंगी, जिनमें प्रमुख रूप से—
डॉ. रबीन्द्र नारायण बेहरा (माननीय सांसद),
डॉ. सच्चिदानंद जोशी (सदस्य सचिव, IGNCA),
डॉ. संजीव चोपड़ा (पूर्व निदेशक, LBSNAA एवं लेखक),
श्री श्याम परांडे (अंतरराष्ट्रीय समन्वयक, सेवा इंटरनेशनल),
श्री प्रभात कुमार (अध्यक्ष, पैन IIT एलुमनाई इंडिया),
श्रीमती नयना सहस्रबुद्धे (लेखिका एवं सामाजिक विचारक),
डॉ. ज्योति चौथाइवाले (लेखिका एवं शोधकर्ता),
सुश्री डेलिना खोंगडुप (सदस्य, राष्ट्रीय महिला आयोग),
डॉ. वरदा संभुस (लेखिका, शिक्षाविद एवं TEDx वक्ता),
वुसत इक़बाल ख़ान (दिल्ली घराने की सूफ़ी परंपरा की प्रतिनिधि कलाकार),
आरजे कृष्ण थापर, आरजे मेहक अंकार (सिंगापुर),
सुश्री वृंदा खन्ना, डॉ. अमना मिर्ज़ा, मालविका जोशी, अमनदीप सिंह, ए. के. मिश्रा, राजदूत अमरेन्द्र खटुआ, गुरुदत्त रंगा, राजेश बाघा, उदय सूद
तथा ध्रुव जैन, अंतरराष्ट्रीय समन्वयक, कर्मा फ़ाउंडेशन शामिल हैं। ये सभी वक्ता दिनभर चलने वाले सत्रों, पैनल चर्चाओं, नैरेटिव संवादों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक चेतना और राष्ट्र-निर्माण में साहित्य, संस्कृति और सेवा की भूमिका पर विचार-विमर्श करेंगे।
आयोजक के बारे में
कर्मा फ़ाउंडेशन, एक पंजीकृत गैर-लाभकारी संस्था है, जो सांस्कृतिक चेतना और समावेशी संवाद को एक आत्मविश्वासी एवं भविष्य-तैयार भारत की आधारशिला मानती है। यह उत्सव आमंत्रित अतिथियों, पंजीकृत प्रतिभागियों, विद्यार्थियों एवं साहित्य-संस्कृति से जुड़े नागरिकों के लिए खुला है।
