सुप्रीम कोर्ट में वनतारा की बड़ी जीत: वन्यजीव संरक्षण के खिलाफ दायर नई याचिका खारिज, कोर्ट ने SIT रिपोर्ट खोलने से किया इनकार

Vantara's big victory in Supreme Court: New petition filed against wildlife conservation rejected, court refuses to open SIT report
 
किया इनकार

नई दिल्ली, 29 मई 2026: सुप्रीम कोर्ट ने वन्यजीव बचाव, पुनर्वास और संरक्षण केंद्र 'वनतारा' के खिलाफ दायर की गई एक नई अर्जी को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि याचिका में जिन आरोपों को दोबारा उठाने का प्रयास किया गया है, उन पर देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) पहले ही विस्तृत जांच कर चुका है और उन मामलों पर अंतिम निर्णय लिया जा चुका है।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि जिन विषयों की जांच एसआईटी द्वारा की जा चुकी है और जिन पर अदालत अपना फैसला सुना चुकी है, उन्हें बार-बार पुनरीक्षण (दोबारा खोलने) के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने वनतारा के खिलाफ जांच, जब्ती या किसी भी तरह के अभियोजन की मांग को सिरे से खारिज कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानवरों का ट्रांसफर पूरी तरह वैध

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में वनतारा द्वारा किए गए वन्यजीवों के अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर को पूरी तरह नियमानुसार और वैध माना। अदालत ने कहा कि:यूएई, वेनेजुएला, ब्राजील, चेक रिपब्लिक, दक्षिण अफ्रीका समेत अन्य देशों से लाए गए जानवरों का ट्रांसफर पूरी तरह से वैध दस्तावेजों, CITES परमिट और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) की आवश्यक मंजूरियों के आधार पर किया गया था। अदालत ने इन सभी प्रक्रियाओं को पूरी तरह गैर-व्यावसायिक और 'जू-टू-जू' (Zoo-to-Zoo) ट्रांसफर के दायरे में सही माना।

जामनगर केंद्र के कार्यों की सराहना, जानवरों को हटाना होगी क्रूरता

अदालत ने गुजरात के जामनगर में स्थित वनतारा केंद्र द्वारा किए जा रहे संरक्षण कार्यों के महत्व को भी रेखांकित किया। आदेश में विशेष रूप से लुप्तप्राय मैकॉ (Macaw) पक्षियों के संरक्षण और उनके सफल प्रजनन कार्यक्रम की सराहना की गई।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन बेजुबान जानवरों को पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत लाकर यहाँ एक सुरक्षित माहौल और बेहतरीन देखभाल दी जा रही है, उन्हें उस सुरक्षित स्थान से हटाना उनके कल्याण के खिलाफ होगा। ऐसा करना वन्यजीवों के प्रति क्रूरता के समान माना जाएगा।

"हर जीवन की रक्षा का संकल्प हुआ और मजबूत" — विवान करणी

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए वनतारा के सीईओ विवान करणी ने कहा सर्वोच्च न्यायालय का यह न्यायसंगत फैसला यह साबित करता है कि वन्यजीव संरक्षण की दिशा में हमारा कार्य पूरी तरह सही और पारदर्शी है। वनतारा में मौजूद हर एक जीव को तय कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही लाया गया है। यहाँ उनकी पूरी संवेदनशीलता और वैज्ञानिक पद्धतियों के साथ देखभाल की जाती है ताकि उन्हें जीवनभर की सुरक्षा मिल सके। हमारे लिए जीवों का संरक्षण केवल एक विजन नहीं, बल्कि हर दिन पूरी निष्ठा से निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है।"

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