वट सावित्री व्रत 2026: बरगद के पेड़ की पूजा से मिलता है अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद
सावित्री-सत्यवान की कथा से जुड़ा है व्रत
पौराणिक कथा के अनुसार देवी सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण Yama से वापस प्राप्त किए थे। यह घटना बरगद के वृक्ष के नीचे हुई थी, इसलिए इस व्रत में वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।
बरगद के पेड़ का धार्मिक महत्व
Banyan Tree को हिंदू धर्म में अक्षय वटवृक्ष कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसमें त्रिदेवों का वास माना गया है—
- जड़ों में ब्रह्मा
- तने में भगवान विष्णु
- शाखाओं में भगवान शिव
वहीं इसकी लटकती जटाओं को मां सावित्री का स्वरूप माना जाता है, जो तपस्या, समर्पण और सौभाग्य की प्रतीक हैं।
मान्यता है कि वट वृक्ष के नीचे पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
वट सावित्री व्रत में बरगद की पूजा कैसे करें?
पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- व्रत का संकल्प लें और सोलह श्रृंगार करें।
- पूजा सामग्री में रोली, चंदन, अक्षत, फूल, फल, मिठाई, धूप-बत्ती और कच्चा सूत रखें।
- बरगद के वृक्ष के नीचे बैठकर व्रत कथा सुनें।
- वृक्ष को जल अर्पित करें और रोली-चंदन से तिलक करें।
- कच्चा सूत वृक्ष के चारों ओर लपेटते हुए परिक्रमा करें।
बरगद के पेड़ के नीचे करें ये दान
वट वृक्ष की पूजा के बाद 7 या 11 सुहागिन महिलाओं को सुहाग की सामग्री दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। दान में—
- चूड़ियां
- बिंदी
- सिंदूर
- काजल
- वस्त्र
आदि शामिल किए जा सकते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि इस दान से सौभाग्य की रक्षा होती है, वैवाहिक जीवन में प्रेम बना रहता है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही त्रिदेवों की कृपा भी प्राप्त होती है।
