उज्जैन में वैदिक घड़ी: खगोलीय विरासत और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम
(लेखक – विवेक रंजन श्रीवास्तव, विनायक फीचर्स)
उज्जैन की ऐतिहासिक जंतर-मंतर वेधशाला परिसर में 85 फुट ऊंचे टावर पर स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारत की प्राचीन खगोलीय परंपरा और आधुनिक तकनीक का अद्वितीय उदाहरण है। यह विश्व की पहली ऐसी घड़ी है, जो भारतीय पंचांग और सूर्य की गति पर आधारित समय को दर्शाती है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस घड़ी को लोकप्रिय बनाने और इसे आम जनजीवन से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने इसकी प्रतिकृति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सहित कई राष्ट्रीय नेताओं को भेंट भी की है।
वैदिक समय की विशेषता
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यह घड़ी दो सूर्योदयों के बीच के समय को 30 मुहूर्तों में बांटती है।
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एक मुहूर्त की अवधि 48 मिनट होती है, जिससे एक दिन 30 वैदिक घंटे का हो जाता है।
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जीपीएस तकनीक की मदद से यह घड़ी स्थानीय सूर्योदय और मौसम के अनुसार स्वतः समय को समायोजित कर लेती है।
वैदिक अंक और दार्शनिक अर्थ
घड़ी के अंक पारंपरिक संस्कृत नामों में प्रदर्शित किए गए हैं। हर अंक के पीछे भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक महत्व निहित है, जो इसे सिर्फ एक यंत्र नहीं बल्कि सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक बनाता है।
उज्जैन का खगोलीय महत्व
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उज्जैन सदियों से भारत की खगोलीय राजधानी रहा है।
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यह शहर कर्क रेखा और शून्य देशांतर रेखा के काल्पनिक संगम पर स्थित है।
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18वीं सदी तक इसे भारत की मानक समय रेखा माना जाता था।
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विक्रम संवत और पंचांग का प्रकाशन यहीं से होता है।
परंपरा और तकनीक का संगम
इस वैदिक घड़ी को आधुनिक स्वरूप देने के लिए मोबाइल एप “विक्रमादित्य वैदिक घड़ी” भी विकसित किया गया है। यह ऐप वास्तविक समय में तिथि, नक्षत्र, ग्रहों की स्थिति और मुहूर्त दर्शाता है। घड़ी की पृष्ठभूमि में 12 ज्योतिर्लिंग, राशि चक्र और नासा से प्राप्त खगोलीय घटनाओं की छवियाँ दिखाई जाती हैं। वहीं टावर पर लगे टेलीस्कोप के जरिए रात्रिकालीन आकाशीय घटनाओं का भी अवलोकन किया जा सकता है।
जनसाधारण और शिक्षा के लिए उपयोगी
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आम लोग अब तीज-त्योहार, शुभ मुहूर्त और चौघड़िया स्वयं देख सकते हैं।
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यह विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भारत की प्राचीन वैज्ञानिक उपलब्धियों को समझने का प्रभावी माध्यम है।
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यह उज्जैन को एक प्रमुख पर्यटन स्थल और भारत की खगोलीय पहचान के केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है।
सांस्कृतिक और वैज्ञानिक पुनर्जागरण
वैदिक घड़ी केवल समय बताने का यंत्र नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव का जीवंत प्रतीक है। यह हमें याद दिलाती है कि जब पश्चिमी जगत में ग्रीनविच की अवधारणा भी नहीं थी, तब भारत के खगोलशास्त्री सूर्य की गति से समय निर्धारित कर रहे थे। आधुनिक तकनीक से सुसज्जित यह घड़ी भविष्य की पीढ़ियों को अपनी जड़ों पर गर्व करने और विज्ञान के साथ परंपरा का नया समन्वय स्थापित करने के लिए प्रेरित करेगी।
