देव वन नक्षत्र वाटिका में गूंजे वैदिक मंत्र: संस्कृत वेद पाठशाला और योग केंद्र का भव्य शुभारंभ, समाज निर्माण का लिया संकल्प
स्थानीय डेस्क:भारतीय संस्कृति, प्राचीन वैदिक ज्ञान और उत्तम स्वास्थ्य के संरक्षण की दिशा में देव वन जनकल्याण समितिद्वारा एक बेहद सराहनीय और ऐतिहासिक पहल की गई है। 'देव वन नक्षत्र वाटिका' परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, विधि-विधान से पूजन और भव्य हवन यज्ञ के साथ संस्कृत वेद पाठशाला एवं योग केंद्रका आधिकारिक शुभारंभ संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत देश के प्रतिष्ठित आचार्यों और विद्वानों द्वारा संपन्न कराए गए यज्ञ से हुई। इस दौरान वैदिक ऋचाओं और मंत्रों की पावन ध्वनि से पूरा वाटिका परिसर आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो उठा।
"संस्कृत से संस्कार और योग से मिलेगा स्वास्थ्य"
समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस दोहरे प्रोजेक्ट के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस केंद्र की स्थापना समाज को जड़ों से जोड़ने के लिए की गई है:
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संस्कृत वेद पाठशाला का लक्ष्य: देवभाषा संस्कृत, सनातन संस्कृति और वेदों में छिपे अगाध ज्ञान का संरक्षण करना तथा नई पीढ़ी तक इसका विस्तार करना है।
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योग केंद्र का उद्देश्य: आधुनिक जीवनशैली में समाज के हर वर्ग को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत व जागरूक बनाना है।
इस गरिमामयी समारोह में ये दिग्गज रहे मौजूद
इस पावन अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिकों, प्रबुद्ध समाजसेवियों और समिति के सदस्यों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:
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देववन नक्षत्र वाटिका के संस्थापक व समिति अध्यक्ष: के. के. जनार्दन नाम्बियर
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महासचिव: विशाल ओझा
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प्रमुख अतिथि व सदस्य: टी.पी. वर्मा, पूर्व आईजी नागेंद्र जी, प्रमोद शर्मा, विनय सिंह, तेज कुमार मिश्रा और प्रीति श्रीवास्तव।
कार्यक्रम में पहुंचे सभी अतिथियों और क्षेत्रवासियों ने इस पहल की मुक्त कंठ से सराहना की। उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे स्वयं और अपने बच्चों को इस केंद्र से जोड़कर एक स्वस्थ, संस्कारी और जागरूक समाज के निर्माण में अपना योगदान देंगे।
सामाजिक उत्थान के लिए समिति का संकल्प
समारोह के समापन पर देव वन जनकल्याण समिति ने अपनी भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए घोषणा की कि आने वाले दिनों में इस केंद्र के माध्यम से केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और सामाजिक उत्थान से जुड़े कई अन्य लोक-कल्याणकारी कार्यक्रम भी बड़े पैमाने पर आयोजित किए जाएंगे।
आज का मुख्य संदेश:
"योग से जीवन में स्वास्थ्य का आगमन होता है, संस्कृत से हमारी भावी पीढ़ी को श्रेष्ठ संस्कार मिलते हैं और वेदों के अध्ययन से अज्ञानता का अंधकार दूर होकर ज्ञान का शाश्वत प्रकाश प्राप्त होता है।"

