काशी में उपराष्ट्रपति द्वारा नवनिर्मित धर्मशाला का उद्घाटन: 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की भावना को मजबूती

Vice President inaugurates newly constructed guesthouse in Kashi: Strengthening the spirit of 'One India-Great India'
 
काशी में उपराष्ट्रपति द्वारा नवनिर्मित धर्मशाला का उद्घाटन: 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की भावना को मजबूती

लखनऊ,  अक्टूबर, 2025।  भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में वाराणसी में श्री काशी नठ्ठू कोटई नगर सतराम मैनेजिंग सोसाइटी द्वारा नवनिर्मित धर्मशाला का उद्घाटन किया। यह आयोजन काशी और तमिलनाडु के गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को रेखांकित करता है।

उपराष्ट्रपति का संबोधन

उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन ने काशी को "दुनिया की आध्यात्मिक राजधानी" बताते हुए वाराणसी की प्रगति का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा कि ₹60 करोड़ की लागत से निर्मित यह 10 मंजिला, 140 कमरों वाला सतराम भवन, विश्वास, लचीलेपन और क्षेत्रों के बीच सहयोग का प्रतीक है। यह सोसाइटी का वाराणसी में दूसरा सतराम है, जो भक्तों को ठहरने की जगह प्रदान करेगा और युवा पीढ़ी को पवित्र शहर से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा।

उन्होंने काशी-तमिलनाडु के गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करके 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की भावना को दर्शाने के लिए इस पहल की सराहना की।अन्नपूर्णा मूर्ति की वापसी: उपराष्ट्रपति ने देवी अन्नपूर्णा अम्मन देवी की मूर्ति को श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में वापस लाने की भी सराहना की। यह मूर्ति, जो एक सदी पहले वाराणसी के मंदिर से चोरी हो गई थी, प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में 2021 में कनाडा से भारत वापस लाई गई थी। उपराष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि राज्य सरकार के प्रयासों से ही सतराम भवन की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा सका।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उद्बोधन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन का काशी की पावन धरा पर हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि वाराणसी के गंगा तट से लेकर तमिलनाडु की कावेरी नदी के तट तक की हमारी साझा परंपरा हमें याद दिलाती है कि भाषाएँ भले ही अलग हों, भारत की आत्मा एक है, जो शाश्वत और अटूट संबंधों से जुड़ी है।

  • काशी-रामेश्वरम एकात्मता: मुख्यमंत्री ने कहा, "काशी विश्वनाथं द्रष्ट्वा, रामेश्वरं पूजयेत्" श्लोक उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकात्मता का सुंदर सार प्रस्तुत करता है। भगवान श्रीराम द्वारा रामेश्वरम धाम में स्थापित शिवलिंग और काशी के आदि विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग एक दूसरे के रूप में पूजित हैं।

  • तमिलनाडु में काशी: उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में 'तेनकाशी' (दक्षिण की काशी) में भगवान विश्वनाथ का एक प्राचीन मंदिर है, जिसकी स्थापना पांड्य सम्राट द्वारा काशी से ज्योतिर्लिंग लाकर की गई थी, साथ ही वहाँ 'शिवकाशी' नामक पवित्र स्थान भी है।

  • 500 वर्षों का इंतजार समाप्त: प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में अयोध्या धाम में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के साथ ही, चार प्रमुख द्वारों का नामकरण जगद्गुरु शंकराचार्य, रामानंदाचार्य, मध्वाचार्य और रामानुजाचार्य के नाम पर किया गया है, जो सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है।

काशी का समग्र विकास और आकर्षण

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री काशी विश्वनाथधाम के लोकार्पण के बाद देश-दुनिया से काशी आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिसमें तमिलनाडु एवं अन्य दक्षिणी राज्यों के श्रद्धालु प्रमुखता से शामिल हैं।विगत वर्षों में वाराणसी के लिए ₹51 हजार करोड़ की विकास परियोजनाएं स्वीकृत हुईं, जिसमें से ₹34 हजार करोड़ की परियोजनाएं लोकार्पित होकर काशी को नई पहचान दिला रही हैं।रोड, रेल, एयर और जलमार्ग की बेहतरीन कनेक्टिविटी यहाँ के जीवन को सरल और गतिशील बना रही है।शीघ्र ही काशीवासियों को देश के पहले अर्बन रोप-वे सिस्टम की सौगात मिलेगी। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से कहा कि अगर दुनिया में निवेश का सबसे अच्छा केंद्र भारत है, तो भारत में उत्तर प्रदेश में निवेश की बेहतरीन सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

आगामी भव्य आयोजन

मुख्यमंत्री ने उपराष्ट्रपति और अन्य अतिथियों को काशी के आगामी भव्य आयोजनों में शामिल होने का आमंत्रण दिया:

  • गंगा महोत्सव: 01 से 04 नवम्बर, 2025 (एकादशी से चतुर्दशी तक)।

  • देव दीपावली: कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आगामी 05 नवम्बर को भव्य आयोजन।

इसके उपरांत, उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर तथा अन्नपूर्णा अम्मन देवी मंदिर में दर्शन-पूजन किया।

Tags