Vidya Bharati: बालक का सर्वांगीण विकास और देवत्व की प्राप्ति ही शिक्षा का मूल लक्ष्य; हरदोई में बोले क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचंद्र
शिक्षा डेस्क, हरदोई (15 जून 2026):
जनपद के अल्लीपुर स्थित पं. बाबूराम त्रिवेदी सरस्वती शिशु मंदिर में नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का भव्य आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण वर्ग के दौरान रविवार को नवागत शिक्षकों (आचार्यों) को शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षण पद्धतियों और भारतीय मूल्यों से जुड़े विभिन्न विषयों पर सघन प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में 'विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश' के क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचंद्र विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने अपने व्याख्यान में भारतीय शिक्षा दर्शन और विद्यार्थियों के संपूर्ण विकास के अंतर्संबंधों को बेहद सरल और प्रभावी ढंग से समझाया।
वैदिक रीति से हुआ शुभारंभ और अतिथियों का सम्मान
कार्यक्रम का विधि-विधान से शुभारंभ मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन, पुष्पार्चन और वंदना के साथ हुआ। परंपरा के अनुसार, उपस्थित अतिथियों का रोली-तिलक लगाकर और बैच भेंट कर भावभीना अभिनंदन किया गया। इस कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन मैगलगंज के प्रधानाचार्य उत्तम मिश्र ने किया, जबकि जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक मिथिलेश अवस्थी ने मुख्य अतिथि व अन्य आगंतुकों का परिचय कराया।
इस विशेष अवसर पर जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के उपाध्यक्ष एवं विद्यालय प्रबंधक शीर्षेन्दुशील त्रिवेदी ‘विपिन’ ने मुख्य अतिथि हेमचंद्र को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। वहीं, जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के मंत्री कौशल किशोर वर्मा का सम्मान लखनऊ संभाग के संभाग निरीक्षक श्याम मनोहर शुक्ल द्वारा किया गया।

शिक्षकों द्वारा तैयार हस्तलिखित पत्रिकाओं का विमोचन
प्रशिक्षण वर्ग की रचनात्मकता को प्रदर्शित करते हुए, प्रशिक्षणार्थी आचार्यों द्वारा कड़ी मेहनत से तैयार की गई हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों की हस्तलिखित पत्रिकाओं का विमोचन भी मुख्य अतिथि और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इन पत्रिकाओं में आधुनिक शिक्षण विधियों और टीएलएम (Teaching Learning Material) का समावेश किया गया है।
भारतीय शिक्षा दर्शन का आधार है पंचकोशात्मक विकास — हेमचंद्र
प्रशिक्षण के प्रथम एवं द्वितीय सत्र को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचंद्र ने “सर्वांगीण समग्र विकास की कल्पना” विषय पर अपना व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा:
"भारतीय शिक्षा दर्शन व्यक्ति के पंचकोशात्मक विकास पर आधारित है। इसमें अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय तथा आनंदमय कोश का संतुलित विकास आवश्यक माना गया है। हमारी शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञानार्जन या रोजगार पाना नहीं है, बल्कि मनुष्य के शरीर, प्राण, मन, बुद्धि और चित्त का समन्वित (Integrated) विकास करना है।"
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय चिंतन के अनुसार जीवन अखंड है और संपूर्ण सृष्टि एक ही तत्व का विस्तार है। प्रेम, सेवा, त्याग, कर्तव्यबोध और परस्पर पूरकता ही हमारी संस्कृति के मूल तत्व हैं। शिक्षा का पहला उद्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास करना है और दूसरा उद्देश्य मनुष्य को देवत्व (Divinity) की ओर अग्रसर करना है।
पंचकोशीय विकास के आयाम
हेमचंद्र ने आचार्यों को बालक के विकास के पांच प्रमुख सूत्र देते हुए स्पष्ट किया कि:
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शारीरिक दृष्टि से: व्यक्ति का सबल और स्वस्थ होना जरूरी है।
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प्राणिक दृष्टि से: व्यक्ति को संयमी और ऊर्जावान होना चाहिए।
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मानसिक दृष्टि से: व्यक्ति सद्विचारी और सकारात्मक सोच वाला बने।
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बौद्धिक दृष्टि से: वह सत्य का अन्वेषक (खोजी) और विवेकशील हो।
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आध्यात्मिक दृष्टि से: उसमें समाज के प्रति सेवाभाव कूट-कूट कर भरा होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि इसी पंचकोशीय विकास के माध्यम से व्यक्ति से लेकर परिवार, समाज, राष्ट्र, विश्व, सृष्टि और परमेष्टि तक की एकात्म भावना विकसित होती है, जो भारतीय शिक्षा का मूल आधार है।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस प्रशिक्षण वर्ग को सफल बनाने में वर्गाधिकारी संतोष त्रिवेदी, सीतापुर संभाग निरीक्षक रणवीर सिंह, श्रावस्ती संभाग निरीक्षक कैलाश चंद्र वर्मा और साकेत संभाग निरीक्षक मिथिलेश सिंह सहित विद्या भारती के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी, शिक्षाविद, गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थी आचार्य उपस्थित रहे।

