तमिलनाडु में विजय की बड़ी राजनीतिक एंट्री 108 सीटों के साथ सरकार बनाने का दावा
हालांकि 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है और टीवीके इस आंकड़े से 10 सीट पीछे है। ऐसे में पार्टी ने राज्यपाल से सदन में बहुमत साबित करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी होती है तो विजय गुरुवार को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।चुनाव में मिली सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विजय को बधाई दी, जिस पर उन्होंने दोनों नेताओं का आभार जताया।
चुनाव परिणाम आने के बाद विजय ने पार्टी मुख्यालय में नवनिर्वाचित विधायकों के साथ अहम बैठक की। इस दौरान विधायक दल के नेता के चयन, संभावित सरकार गठन और विधानसभा में पार्टी की रणनीति पर चर्चा की गई। पार्टी नेता नांजिल संपत ने संकेत दिया कि बहुमत जुटाने को लेकर पार्टी नेतृत्व सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है।
टीवीके को सरकार बनाने के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक पार्टी पीएमके, वामपंथी दलों और वीसीके जैसे छोटे दलों से संपर्क कर सकती है। कांग्रेस की ओर से भी समर्थन के संकेत मिले हैं। कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडनकर ने कहा कि चुनाव परिणामों को लेकर रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को भेज दी गई है और आगे की रणनीति पर जल्द फैसला लिया जाएगा।
वहीं द्रमुक खेमे का कहना है कि केवल कांग्रेस के समर्थन से टीवीके बहुमत तक नहीं पहुंच पाएगी और उसे अन्नाद्रमुक जैसे बड़े दल का भी सहयोग चाहिए होगा। इस बीच द्रमुक नेता टीकेएस एलनगोवन ने भाजपा और अन्नाद्रमुक की संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए।
उधर, चुनाव में हार के बाद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया है। हालांकि नई सरकार बनने तक उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में काम जारी रखने को कहा गया है।234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ा दल बनने का गौरव हासिल किया है। द्रमुक को 59, अन्नाद्रमुक को 47 और कांग्रेस को 5 सीटें मिली हैं। इसके अलावा पीएमके, वामपंथी दलों और अन्य क्षेत्रीय दलों ने भी सीमित सीटों पर जीत दर्ज की है।अब तमिलनाडु की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विजय आवश्यक समर्थन जुटाकर पहली बार सरकार बनाने में सफल होंगे या राज्य में नई राजनीतिक हलचल देखने को मिलेगी।
