भारत की तरक्‍की पर विराज बहल का अनोखा नजरिया बदलाव सादगी से भी आता है

Viraj Bahl's unique perspective on India's progress: Change also comes from simplicity
 
Viraj Bahl's unique perspective on India's progress: Change also comes from simplicity
लखनऊ डेस्क (आर एल पाण्डेय)। आंत्रप्रेन्‍योरशिप अथवा उद्यमिता, जो आज हर जगह चर्चा में है, 1980 के दशक में इतना प्रचलित नहीं था। वीबाए वीआरबी कंज़्यूमर प्रोडक्ट्स के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक और शार्क टैंक इंडिया 4 के नए शार्क, विराज बहल की यात्रा एक गहरी सोच मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है, से शुरू हुई थी। उस दौर में इसे उद्यमिता का नाम नहीं दिया गया था, बल्कि यह कुछ नया और सार्थक बनाने की जि़द, अथक मेहनत और दृढ़ संकल्प का नतीजा था।
 

 
बहल अपने मंत्र बोरिंग इज़ सेक्‍सी : सादगी में ही सफलता है में विश्‍वास रखते हैं और यह समझाता है कि लगातार और अनुशासित तरीके से काम करना तड़क.भड़क या तात्कालिक रुझानों से ज्यादा अहम है। उनका मानना है कि सफलता उन छोटे-छोटे कामों में छिपी होती है, जो किसी भी व्यवसाय की बुनियाद को मजबूत बनाते हैं। उनके लिए किसी बिज़नेस को सफल बनाने की कुंजी है . धैर्य के साथ बुनियादी चीज़ों पर फोकस बनाये रखना और लगातार मेहनत करना।
 
विराज भारत में उद्यमिता की क्षमता में पूरा यकीन करते हैं और इसे सपोर्ट करते हैं। वे इस बात पर जोर देते हैं कि शार्क टैंक इंडिया जैसे मंचों ने उद्यमिता के बारे में सोच को पूरी तरह बदल दिया है। वे मानते हैं कि इन मंचों ने उद्यमिता को न केवल सुलभ बल्कि प्रेरणादायक भी बनाया हैए जिससे लोग अपने विचारों को अपनाने और उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित होते हैं। उनके अनुसार यह सांस्कृतिक बदलाव विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वे यह भी बताते हैं कि भारत हमेशा से ही एक उद्यमिता प्रधान देश रहा है, चाहे वो किसान हों, छोटे दुकानदार हों या आज के इनोवेटिव स्टार्टअप के संस्थापक। युवाओं, खासकर जो अपने सफर की शुरुआत में हैं, के लिये बहल धैर्य रखने और खुद को खोजने की अहमियत पर जोर देते हैं। इस बारे में बताते हुये उन्होंने कहा अगर आइडिया दिल से न आए तो कोई भी बाहरी सलाह उसे अपनाने में मदद नहीं करेगी। अपने आप को किसी आइडिया के पीछे भागने के लिये मजबूर मत करेंए बल्कि जीवन के अनुभव लें, नए रास्ते अपनायें और सही अवसर खुद ब खुद तुम्हारे पास चलकर आएगा। वे युवाओं को सोशल मीडिया या बाहरी दबाव के बजाय जीवन के विभिन्न अनुभवों को अपनाने और अपनी सोच का दायरा बढ़ाने की सलाह देते हैं, ताकि सफलता का सही मतलब समझ सकें।

अपने शब्दों और कामों से बहल उद्यमिता को एक ज़मीन से जुड़ी और व्यावहारिक दिशा में बढ़ावा देते हैं। वे नए उद्यमियों को बताते हैं कि सफलता रातोंरात मिलने वाली चीज नहीं है, इसके लिए मेहनत, जुनून और स्पष्ट उद्देश्य की ज़रूरत होती है। उनकी अपनी यात्रा इस बात का जीवंत उदाहरण है कि अगर आप अपने उद्देश्य के प्रति सच्चे रहते हैं और जो काम आपको साधारण लगते हैं अगर उनपर ध्यान देते हैं तो आपको निश्चित तौर पर असाधारण परिणाम मिलेंगे।

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