राजधानी में 'विराट ब्राह्मण सम्मेलन' का शंखनाद: समाज के उत्थान और राष्ट्र निर्माण पर हुआ गहरा मंथन

The Clarion Call of the 'Grand Brahmin Conference' Resounds in the Capital: Deep Deliberations Held on Social Upliftment and Nation-Building.
 
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लखनऊ, 24 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमती नगर स्थित बोध संस्थान में आज एक भव्य 'विराट ब्राह्मण सम्मेलन' का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में न्यायिक जगत के दिग्गजों, आध्यात्मिक गुरुओं और विभिन्न जनपदों से आए ब्राह्मण संगठनों के पदाधिकारियों ने शिरकत की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में ब्राह्मण गौरव की पुनर्स्थापना और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में समाज के योगदान पर विचार-विमर्श करना था।

प्रमुख वक्ताओं ने साझा किए विचार

सम्मेलन में वक्ताओं ने शिक्षा, संस्कार और सामाजिक एकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ताओं में शामिल रहे:

  • रिटायर्ड जस्टिस सी.बी. पाण्डेय एवं रिटायर्ड जस्टिस रंगनाथ पाण्डेय: उन्होंने संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर समाज की मजबूती और अधिकारों के प्रति सचेत रहने का आह्वान किया।

  • राकेश पाण्डेय (केनविज टाइम्स): उन्होंने मीडिया और समाज के बीच समन्वय पर बात रखी।

  • पी.के. मिश्रा (पूर्व जिला जज) एवं ककू पाण्डेय: उन्होंने कानूनी और सामाजिक सुरक्षा के पहलुओं पर प्रकाश डाला।

  • मौनी महाराज एवं राम महेश मिश्रा (भाग्योदय फाउंडेशन): आध्यात्मिक शक्ति और लोक कल्याण के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

  • डॉ. शिवम त्रिपाठी (इकाना अस्पताल): उन्होंने समाज के स्वास्थ्य और सेवा भाव को रेखांकित किया।

मेजर आशीष चतुर्वेदी की अध्यक्षता में संकल्प

कार्यक्रम की अध्यक्षता मेजर आशीष चतुर्वेदी (अध्यक्ष, भूतपूर्व सैनिक संघ, उत्तर प्रदेश) ने की। उन्होंने अपने संबोधन में अनुशासन और राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वोपरि बताया। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के कई जिलों से आए विभिन्न ब्राह्मण संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया और अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं व सुझावों को साझा किया।

सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य

इस विराट सम्मेलन के दौरान तीन प्रमुख बिंदुओं पर चिंतन किया गया:

  1. ब्राह्मण गौरव की स्थापना: समाज की समृद्ध विरासत और ज्ञान की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाना।

  2. समाज का उत्थान: आर्थिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ रहे समाज के वर्गों को मुख्यधारा में लाना।

  3. राष्ट्र निर्माण: वर्तमान परिस्थितियों में ब्राह्मण समाज देश को किस प्रकार एक बेहतर दिशा दे सकता है, उस पर गंभीर मंथन।

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