जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता

Water conservation is the biggest need today.
 
Water conservation is the biggest need today.

तेजी से बढ़ती जनसंख्या और प्राकृतिक जल स्रोतों में लगातार हो रही कमी के कारण देश की बड़ी आबादी स्वच्छ पेयजल के लिए संघर्ष कर रही है। आज हर व्यक्ति की मांग है कि उसे पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ और सुरक्षित जल उपलब्ध हो। जल की बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति हमारे सामने एक गंभीर चुनौती के रूप में खड़ी है।


वर्तमान समय में पानी का व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है। पीने के पानी के पाउच, बोतलबंद पानी तथा टैंकरों के माध्यम से जल की बिक्री का कारोबार लगातार विस्तार पा रहा है। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि पेयजल संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है। नदियों और तालाबों का पानी प्रदूषित हो रहा है, वहीं परंपरागत जल स्रोत जैसे कुएं और बावड़ियां सूखती जा रही हैं। वर्षा जल का समुचित संग्रह न होने के कारण भी जल संकट बढ़ रहा है।

बढ़ती जनसंख्या, गिरता भू-जल स्तर, जल स्रोतों की क्षमता से अधिक दोहन तथा पानी का अपव्यय जल संकट के प्रमुख कारण हैं। पूरे देश में गर्मी का मौसम आते ही पेयजल की समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है। यदि समय रहते पानी के दुरुपयोग को नहीं रोका गया, तो भविष्य में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।


आने वाली पीढ़ियों को जल संकट से बचाने के लिए आवश्यक है कि हम पानी का महत्व समझें। परंपरागत जल स्रोतों को संरक्षित रखें तथा नदियों, तालाबों और वनों के संरक्षण में अपना योगदान दें। वास्तव में, परंपरागत जल प्रबंधन की उपेक्षा ही आज जल संकट का एक बड़ा कारण है। जल स्रोतों के प्रति हमारी संवेदनहीनता का परिणाम है कि घर-घर में बोरिंग होने से भू-जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और जीवनदायिनी झीलें व तालाब शहरों की गंदगी का केंद्र बनते जा रहे हैं।


विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह जाता है। कहीं नलों की टोंटियां टूटी हुई हैं तो कहीं पाइपलाइन की लीकेज से हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। वाहनों की धुलाई में भी अनावश्यक रूप से पानी खर्च किया जाता है। यदि हम हाथ धोते, ब्रश करते या स्नान करते समय नलों को खुला रखने की आदत बदल लें, तो प्रतिदिन बड़ी मात्रा में जल बचाया जा सकता है।


समय रहते हमें सचेत होना होगा, क्योंकि जल संकट सीधे हमारे जीवन को प्रभावित करता है। गर्मी के मौसम में कई स्थानों पर पानी के टैंकरों के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है और कभी-कभी एक बाल्टी पानी के लिए विवाद की स्थिति तक बन जाती है। पुराने समय में लोग तालाब, बावड़ियां और कुएं बनवाकर पुण्य अर्जित करते थे, लेकिन आज पानी स्वयं एक बहुमूल्य संपदा बन गया है।


ऐसी स्थिति में वर्षा जल संचयन को अपनाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें अपनी दैनिक आवश्यकताओं के अनुसार ही पानी का उपयोग करना चाहिए तथा जल की प्रत्येक बूंद का महत्व समझना चाहिए। एक जागरूक नागरिक के रूप में हमें स्वयं जल संरक्षण करना चाहिए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।


पानी को बचाना, वास्तव में स्वयं को और आने वाली पीढ़ियों को बचाना है। जल के बिना जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है। जल ही जीवन है, जल ही शक्ति है। इसलिए यह कहना उचित होगा कि मनुष्य ही वह प्राणी है जो जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है तथा अपनी भावी पीढ़ियों को जल की अमूल्य धरोहर सौंप सकता है।


आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि पानी का अपव्यय नहीं करेंगे और जल संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएंगे।

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