मौसम की जोड़ गुणा

Addition and multiplication of weather
 
Addition and multiplication of weather

 ( लेखिका नीतू माथुर ) 

ये सुबाह जो इतनी सफेद सर्द है 
हवा में बारीक बर्फ़ की गलन है 
पीला सूरज भी जाने क्यूँ मंद है 
इस बसंत का ये कैसा चलन है 

मौसम की करवट अधूरी है शायद 
या तुझे पश्मीने की महक भा गई 
जाड़े से तेरी गुफ्तगू बाक़ी है 
या सर्दी का कुछ उधार बाक़ी है 

पीले बसंती फूल नमी में भीगे हैं 
ज़मीन की बरफ़ जैसे ताप छीने है 
ठंडे पत्ते सूखे कुछ सीले रह गए 
गर्म अंगीठी के छल्ले आसमा में उड़ गए 

मौसम की देर सवेर बेताबी बढ़ा रही है 
नया कुछ हिसाब किताब सीखा रही है 
अब कोई कैसे इन्हें बताए की मुझे 
इसकी हर जोड़ गुणा समझ आ रही है। 

नीतू माथुर

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