देश के त्वरित विकास को समर्पित कल्याणकारी केंद्रीय बजट
(डॉ. महेन्द्र सिंह – विनायक फीचर्स)
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वर्ष 2026–27 के लिए संसद में प्रस्तुत बजट देश के त्वरित विकास को समर्पित एक कल्याणकारी बजट है। इस बजट में समाहित प्रस्ताव आर्थिक विकास की गति को बढ़ाने और उसे निरंतर बनाए रखने पर केंद्रित हैं। साथ ही, लोककल्याण को भी पर्याप्त प्राथमिकता दी गई है।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में तीन प्रमुख कर्तव्यों को रेखांकित किया—
(i) अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों के प्रति लचीलापन बढ़ाते हुए आर्थिक विकास को गति देना और उसे बनाए रखना,
(ii) जन आकांक्षाओं की पूर्ति एवं उनकी क्षमताओं का संवर्धन करना, तथा
(iii) देश के प्रत्येक परिवार, समुदाय, क्षेत्र और वर्ग तक संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों की पहुँच सुनिश्चित करना।
ये कर्तव्य मोदी सरकार की सर्वसमावेशी एवं सतत विकास रणनीति को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं। सरकार की आर्थिक नीतियों के केंद्र में एक ओर आर्थिक संवृद्धि को गति देना है, वहीं दूसरी ओर वंचित वर्गों और पिछड़े क्षेत्रों को सशक्त बनाकर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का मूल मंत्र इसी नीति का आधार रहा है।

मोदी सरकार द्वारा संरचनात्मक आर्थिक सुधारों का मूल विचार ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ रहा है। इस बजट में भी सुधारों की निरंतरता को बनाए रखते हुए प्रावधानों को अधिक परिणामोन्मुखी बनाने पर बल दिया गया है। ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु कृषि व ग्रामीण अर्थव्यवस्था, मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई, ओडीओपी, नवीकरणीय एवं परमाणु ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलमार्ग एवं रेल विकास, डी-कार्बनाइजेशन, निर्यात संवर्धन और रक्षा क्षेत्र जैसे संभावनापूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।
मानव पूंजी निर्माण से जुड़े शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला, युवा और दिव्यांग सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष बल दिया गया है। स्पष्ट है कि मानव संसाधनों का सशक्त विकास राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है और जनकल्याण में वृद्धि करता है।इस बजट में राजकोषीय सुदृढ़ीकरण को निरंतर बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है। जीडीपी के सापेक्ष राजकोषीय घाटे में निरंतर गिरावट सरकार के कुशल वित्तीय प्रबंधन को दर्शाती है। वर्ष 2021–22 में जहाँ यह 6.7 प्रतिशत था, वहीं 2026–27 में इसे घटाकर 4.3 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी प्रकार केंद्र सरकार का ऋण जीडीपी के सापेक्ष 55.6 प्रतिशत पर नियंत्रित रखा गया है।
पूंजीगत व्यय में निरंतर वृद्धि से अवस्थापना विकास को गति मिली है, जिससे रोजगार सृजन में भी उल्लेखनीय योगदान हुआ है। वर्ष 2026–27 में पूंजीगत व्यय में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जबकि राज्यों को दिए जाने वाले अनुदान को शामिल करने पर प्रभावी वृद्धि लगभग 22 प्रतिशत बैठती है। टेलीकॉम, रक्षा, रेलवे, सड़क, आवास और नगरीय विकास जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि इस बजट की विकासोन्मुख दिशा को दर्शाती है।
इस बजट में अवस्थापना क्षेत्र के लिए 12.20 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत 40 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त बायो-फार्मा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, रेयर अर्थ, रसायन, पूंजीगत वस्तुएँ और टेक्सटाइल्स जैसे सात रोजगारपरक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए किए गए प्रावधान कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित करने में सहायक होंगे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग से कृषि के वाणिज्यीकरण को बढ़ावा मिलेगा और पलायन पर भी अंकुश लगेगा।समग्र रूप से यह बजट भारत की घरेलू क्षमताओं का समुचित उपयोग करते हुए त्वरित आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और व्यापक लोककल्याण को समर्पित है।
(लेखक भाजपा मध्यप्रदेश के प्रदेश प्रभारी, उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व मंत्री हैं।)
