West Asia Crisis: संकट के बीच MSMEs और एयरलाइंस को बड़ी राहत, केंद्र सरकार ने 18,100 करोड़ की क्रेडिट गारंटी योजना को दी मंजूरी
योजना का मुख्य उद्देश्य और बजट
सरकार ने इस योजना के लिए 18,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस पहल का प्राथमिक लक्ष्य प्रभावित उद्योगों की कार्यशील पूंजी (Working Capital) की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करना है। इस योजना के माध्यम से बाजार में लगभग 2.55 लाख करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त ऋण प्रवाह सुनिश्चित होने की संभावना है। यह योजना विशेष रूप से उन MSMEs और एयरलाइन कंपनियों के लिए संजीवनी साबित होगी, जो पश्चिम एशिया संकट की वजह से वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं।
रोजगार और सप्लाई चेन की सुरक्षा
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना व्यवसायों को स्थिरता प्रदान करने के लिए लाई गई है।
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नौकरियों का संरक्षण: समय पर तरलता (Liquidity) उपलब्ध कराकर सरकार का लक्ष्य नौकरियों के नुकसान को रोकना है।
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निर्बाध उत्पादन: यह कदम सप्लाई चेन को टूटने से बचाएगा और घरेलू उत्पादन को बिना किसी रुकावट के जारी रखने में मदद करेगा।
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आर्थिक मजबूती: वित्तीय सहायता मिलने से पूरा आर्थिक तंत्र मजबूत बना रहेगा, जिससे वैश्विक संकट का असर भारतीय व्यवसायों पर कम से कम होगा।
पश्चिम एशिया संघर्ष का असर
गौरतलब है कि इस साल फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष ने वैश्विक व्यापार और एविएशन सेक्टर को काफी प्रभावित किया है। ईंधन की कीमतों में अस्थिरता और सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण छोटे उद्योगों और एयरलाइंस पर भारी वित्तीय बोझ बढ़ा है। सरकार की यह प्रस्तावित क्रेडिट गारंटी योजना इसी दबाव को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण ढाल का काम करेगी।
कैबिनेट फैसले की मुख्य बातें:
| विवरण | आंकड़े / जानकारी |
| योजना का नाम | इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) |
| कुल बजट प्रावधान | ₹18,100 करोड़ |
| अपेक्षित अतिरिक्त कर्ज | ₹2.55 लाख करोड़ |
| मुख्य लाभार्थी | MSMEs, एयरलाइंस और प्रभावित कंपनियां |
| उद्देश्य | वर्किंग कैपिटल की कमी दूर करना और रोजगार बचाना |
