अगर ओवैसी प्रधानमंत्री होते तो पहलगाम अटैक के बाद क्या करते? AIMIM चीफ के बयान ने मचाया बवाल

 
What If Owaisi Was PM During Pahalgam Attack ? AIMIM Chief’s Shocking Response

आज का टॉपिक है कुछ ऐसा जो सोशल मीडिया से लेकर पॉलिटिकल सर्कल्स तक हंगामा मचा रहा है। सवाल ये है - अगर असदुद्दीन ओवैसी, AIMIM के फायरब्रांड चीफ, प्रधानमंत्री बन जाते तो 2025 के उस भयानक पहलगाम अटैक के बाद क्या एक्शन लेते? पाकिस्तान को धूल चटाने का मौका था या फिर कुछ और? और हां, ओवैसी साहब ने पुणे की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो जवाब दिया, वो चौंकाने वाला है। ना तो उन्होंने खुद को PM का ख्वाब देखते दिखाया, ना ही कोई हल्का-फुल्का रिएक्शन। बल्कि, उन्होंने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा - "ऐसा मौका बार-बार नहीं आता!" क्या है पूरी स्टोरी? क्या है वो 'ऑपरेशन सिंदूर' जिसका जिक्र हो रहा है? और ओवैसी का ये बयान महाराष्ट्र चुनावों से जुड़ा है या राष्ट्रीय सिक्योरिटी का मुद्दा? 

 22 अप्रैल 2025, जम्मू-कश्मीर का खूबसूरत tourist spot पहलगाम। बर्फीली वादियां, जहां पर्यटक घूमने आते हैं। लेकिन उस दिन, आतंकवादियों ने नरसंहार कर दिया। 26 मासूम लोग मारे गए - पर्यटक, लोकल्स, सब। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकी लोगों का धर्म पूछकर गोली मार रहे थे। ये उरी या पुलवामा से भी ज्यादा क्रूर था। कौन थे आतंकी? पाकिस्तान बेस्ड ग्रुप्स, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर के लिंक्स। सीमा पार करके घुसे, CRPF की पोस्टिंग में चूक हुई। quick reaction टीम को पहुंचने में घंटा भर लग गया। पूरा देश गुस्से में था। PM मोदी ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई, all party meeting हुई। और फिर, भारत ने रिवेंज लिया - 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च। क्या था ऑपरेशन सिंदूर? भारत की आर्मी, एयर फोर्स और नेवी ने पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक्स किए। ड्रोन अटैक्स, बॉर्डर पर फायरिंग। गुजरात से कश्मीर तक पाक के ड्रोन्स गिराए गए। युद्ध जैसे हालात हो गए। सिंधु जल संधि सस्पेंड, इंटरनेशनल लेवल पर पाक को आइसोलेट करने की कोशिश। लेकिन... अचानक, ऑपरेशन रोक दिया गया। सीजफायर। क्यों? ये सवाल आज भी खड़ा है। कुछ कहते हैं डिप्लोमेसी, कुछ कहते हैं इंटरनेशनल प्रेशर। लेकिन ओवैसी ने कहा - ये मौका गंवा दिया

 30 सितंबर 2025, पुणे में AIMIM की प्रेस कॉन्फ्रेंस। महाराष्ट्र चुनावों के सिलसिले में ओवैसी वहां थे। एक पत्रकार ने सीधा सवाल दागा - "अगर आप प्रधानमंत्री होते तो पहलगाम अटैक के बाद क्या एक्शन लेते? पाकिस्तान को कैसे जवाब देते?"ओवैसी साहब मुस्कुराए, और दिया ऐसा जवाब जो सबको चौंका गया। सुनिए उनके शब्द, लाइव रिपोर्टिंग से:"मेरे भाई, ये ख्वाब देखने का मुझे शौक नहीं है। मैं हकीकत से जूझता हूं और अपनी पहुंच जानता हूं। हमारा मकसद सत्ता में बैठना या मंत्री बनना नहीं है। लेकिन एक भारतीय नागरिक के नाते कह रहा हूं - पहलगाम के बाद हमारे पास पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने का सुनहरा मौका था। युद्ध जैसे हालात थे - ड्रोन गुजरात से कश्मीर तक उड़ रहे थे। पूरा देश तैयार था। फिर अचानक ऑपरेशन सिंदूर क्यों रुक गया? सीजफायर क्यों? अब संसद में बैठकर PoK लेने की बात करते हैं, लेकिन वो मौका हाथ से निकल गया।"वाह! चौंकाने वाला इसलिए, क्योंकि ओवैसी को अक्सर 'मुस्लिम वोट बैंक' या 'एंटी-नेशनल' कहा जाता है। लेकिन यहां उन्होंने सरकार को घेरा - कहा कि राष्ट्र की भावनाओं की अनदेखी हुई। ना तो उन्होंने खुद को हीरो बनाया, ना PM बनने का ख्वाब दिखाया। बल्कि, हकीकत पर फोकस किया। ये बयान X पर वायरल हो गया, लाखों व्यूज। 

और हां, पहले भी ओवैसी ने अटैक पर रिएक्ट किया था। अप्रैल में कहा था - "ये मानवता पर हमला है। पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दो।" वो all party मीटिंग में गए, गृह मंत्री से मिले। यहां तक कि एशिया कप में इंडिया-पाक मैच का विरोध किया। तो, क्या ये बयान महाराष्ट्र चुनावी स्टंट है ? AIMIM वहां 20 सीटों पर लड़ रही है। या फिर, ओवैसी का नेशनल सिक्योरिटी पर स्टैंड?

ओवैसी ने  कहा - "ऑपरेशन खत्म नहीं हुआ, रोका गया।" और ये सही है। सरकार ने स्पष्ट किया कि ये पॉज है, नॉट एंड। लेकिन ओवैसी का सवाल वैलिड - जब देश गुस्से में था, क्यों पीछे हटे? PoK पर बात तो हो रही है, लेकिन एक्शन कब? पॉलिटिकल एंगल: महाराष्ट्र में AIMIM शिवसेना-भाजपा के खिलाफ। ये बयान ओवैसी को 'पैट्रियॉटिक' इमेज दे रहा है। लेकिन क्रिटिक्स कहते हैं - ये सिर्फ वोट के लिए। याद है, 2019 बालाकोट के बाद भी ओवैसी ने स्ट्राइक्स की तारीफ की थी।

क्या ओवैसी कभी PM बन सकते हैं? ओवैसी ने साफ कहा - "PM बनना मेरा लक्ष्य नहीं।" AIMIM का फोकस मुस्लिम राइट्स पर है, नेशनल लेवल पर अभी छोटा। लेकिन ये बयान दिखाता है - वो नेशनल इश्यूज पर बोल सकते हैं। 2029 चुनावों में अगर NDA कमजोर हुई, तो? खैर, अभी तो महाराष्ट्र पर फोकस। मेरा टेक: ओवैसी का जवाब स्मार्ट था - ना डिफेंसिव, ना अग्रेसिव। लेकिन सवाल वही - पाकिस्तान को कब सबक सिखाएंगे? तो ये थी पूरी स्टोरी। 

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