मिट्टी के बर्तन पकाने के लिए आवां जलाया तो कुम्हार पर दर्ज हो गई FIR, कौशांबी के विष्णु प्रजापति का मामला चर्चा में
आवां से निकलने वाले धुएं को लेकर गांव के चौकीदार ने दर्ज कराई शिकायत, कुम्हार ने एक सिविल जज के दबाव में कार्रवाई होने का लगाया आरोप
कौशांबी। मिट्टी के बर्तन बनाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले एक कुम्हार के खिलाफ FIR दर्ज होने का मामला चर्चा में है। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के रहने वाले विष्णु प्रजापति पर मिट्टी के बर्तन पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले आवां से निकलने वाले धुएं के कारण वायु प्रदूषण फैलाने का आरोप लगाया गया है।
जानकारी के मुताबिक, गांव के चौकीदार पुद्दन सिंह ने आवां से निकलने वाले धुएं को वायु प्रदूषण का कारण बताते हुए स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर पुलिस ने विष्णु प्रजापति के खिलाफ FIR दर्ज की है।
सिविल जज के कहने पर FIR कराने का आरोप
इस मामले में विष्णु प्रजापति से बातचीत का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि उनका कहना है कि गांव के पास रहने वाले एक सिविल जज के कहने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। विष्णु के अनुसार, उन्हें धमकी देते हुए कहा गया कि थोड़ी सी भी गड़बड़ी होने पर जेल भेज दिया जाएगा और जिंदगी भर जमानत नहीं मिलेगी। हालांकि, इस कथित बातचीत और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
मिट्टी के बर्तन बनाकर चलाते हैं परिवार का खर्च
विष्णु प्रजापति का पेशा मिट्टी के बर्तन बनाना है। वह इसी पारंपरिक काम के जरिए अपनी पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करते हैं। बर्तन पकाने के लिए आवां का इस्तेमाल कुम्हारों की पारंपरिक कार्यप्रणाली का हिस्सा रहा है। ऐसे में उनके खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद पारंपरिक कारीगरों की आजीविका और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
प्रदूषण के दूसरे स्रोतों पर भी उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद यह बहस भी शुरू हो गई है कि वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदारी तय करते समय क्या सभी स्रोतों को समान रूप से देखा जा रहा है? फैक्ट्रियों, वाहनों, विमानों और पटाखों से निकलने वाले धुएं के मुकाबले पारंपरिक कारीगरों के काम से होने वाले प्रदूषण का आकलन किस तरह किया जाना चाहिए?
पर्यावरण संरक्षण जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही सदियों पुराने पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े गरीब कारीगरों की आजीविका का सवाल भी महत्वपूर्ण है। जरूरत ऐसी व्यवस्था की है, जिसमें प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ कुम्हारों को स्वच्छ तकनीक, बेहतर भट्ठियां और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनका रोजगार भी सुरक्षित रह सके। फिलहाल इस मामले में FIR के आधार, संबंधित अधिकारियों का पक्ष और सिविल जज पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने आना बाकी है।
