दुनिया में सबसे तेजी से कौन सा धर्म खो रहा है अपनी पहचान? Pew Research की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

 
 Which Religion Are People Leaving the Fastest? Shocking Pew Research Findings on Hindus, Muslims & More

आज हम एक ऐसे टॉपिक पर बात करने वाले हैं जो पूरी दुनिया को हिला रहा है। imagine  कीजिए - अरबों लोग जो अपने बचपन के धर्म को छोड़कर नया रास्ता चुन रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि दुनिया भर में सबसे तेजी से कौन सा धर्म खो रहा है अपनी पहचान? और भारत जैसे देश में हिंदू-मुस्लिम समुदाय का क्या हाल है?  ये सब प्यू रिसर्च सेंटर की ताजा रिपोर्ट से सामने आया है। 2025 की ये रिपोर्ट 36 देशों के लाखों लोगों पर based है, और इसमें धर्म परिवर्तन  के आंकड़े चौंका देने वाले हैं। अगर आप भी सोच रहे हैं कि धर्म का भविष्य क्या होगा,

 सबसे पहला  सवाल - दुनिया के लोग किस धर्म को सबसे तेजी से छोड़ रहे हैं? प्यू रिसर्च की रिपोर्ट "Around the World, Many People Are Leaving Their Childhood Religions" के मुताबिक, ईसाई धर्म को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। हां, दुनिया का सबसे बड़ा धर्म, जिसमें 2 अरब से ज्यादा follower हैं, वो धर्म परिवर्तन की भेंट चढ़ रहा है।  रिपोर्ट कहती है कि 36 देशों में से 25 में ईसाई धर्म multiple या ऐतिहासिक रूप से प्रमुख है, और वहां 20% से ज्यादा लोग अपने बचपन के धर्म को छोड़ चुके हैं। खासकर युवा पीढ़ी - 55 साल से कम उम्र के 10 में से 1 ने अपना धर्म बदल लिया है। example के तौर पर, अमेरिका में 1990 के बाद पैदा हुए 46% लोग ही अब खुद को ईसाई कहते हैं, बाकी ने छोड़ दिया। जर्मनी में तो हर 20 ईसाई में से 19 ने धर्म छोड़ दिया, जबकि सिर्फ 1 नया जुड़ा। स्पेन, स्वीडन, कनाडा, ब्रिटेन जैसे देशों में भी यही हाल।  क्यों हो रहा है ये? रिपोर्ट के अनुसार, reason  हैं - Modernity, education, and religious institutions पर बढ़ते सवाल। कई लोग अब "नन" (रिलिजियसली अनअफिलिएटेड) बन रहे हैं, यानी नास्तिक, एग्नॉस्टिक या "कुछ नहीं"। ईसाई धर्म को नेट लॉस - हर 100 में से 11.6 लोग खो रहा है।

अब बात बौद्ध धर्म की। ये भी ईसाई के बाद दूसरे नंबर पर है लॉस में। जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में आधी आबादी ने अपना बचपन का धर्म छोड़ दिया। दक्षिण कोरिया में तो 50% लोग स्विच कर चुके हैं! बौद्ध धर्म के follower  हर 100 में से 9.8 खो रहा है, क्योंकि कई लोग अब बिना धर्म के जीवन जीना पसंद कर रहे हैं। 

लेकिन अच्छी खबर भारत के लिए! रिपोर्ट में हिंदू और मुस्लिम समुदायों की स्थिति सबसे मजबूत है। हिंदू धर्म में स्विचिंग रेट सिर्फ 1% है - यानी 100 में से सिर्फ 1 व्यक्ति अपना धर्म छोड़ता है। भारत में तो ये ना के बराबर है। 2019-2020 के प्यू सर्वे के अनुसार, जितने हिंदू बाहर गए, उतने ही नए हिंदू बने नेट गेन-लॉस जीरो!  भारत में 99% हिंदू वही रहते हैं जो बचपन में थे। क्यों? क्योंकि हिंदू धर्म में सामाजिक-सांस्कृतिक जड़ें गहरी हैं। परिवार, परंपराएं, और त्योहार सब बांधे रखते हैं। अमेरिका में भारतीय मूल के हिंदुओं में 18% ने स्विच किया, लेकिन वो भी ज्यादातर अनअफिलिएटेड बने। श्रीलंका में कुछ हिंदू ईसाई बने, लेकिन कुल मिलाकर हिंदू धर्म stable है।  अब मुस्लिमों का हाल। इस्लाम में भी स्विचिंग सिर्फ 1% है। रिपोर्ट कहती है, मुस्लिम सबसे loyal हैं। 13 देशों के सर्वे में, 92% मुस्लिम वही रहते हैं। भारत में 2020 के प्यू सर्वे में, 0.3% मुस्लिम बाहर गए, लेकिन उतने ही नए मुस्लिम बने।  अमेरिका में 25% मुस्लिमों ने इस्लाम छोड़ा, लेकिन वो अपवाद हैं। अल्जीरिया, मलेशिया जैसे देशों में कानून भी हैं जो स्विचिंग रोकते हैं। कारण? मजबूत कम्युनिटी, परिवार का दबाव, और धार्मिक शिक्षा। रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिमों की फर्टिलिटी रेट हाई है

 प्यू की 2025 रिपोर्ट "How the Global Religious Landscape Changed from 2010 to 2020" कहती है - 2010 से 2020 तक ईसाई आबादी बढ़ी लेकिन शेयर घटा । अनअफिलिएटेड 16% से 30% हो गए। मुस्लिम आबादी सबसे तेज बढ़ी - 347 मिलियन नए, शेयर 25.6%।

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