शिक्षा में विषाक्त वातावरण का दोषी कौन
(डॉ. सुधाकर आशावादी – विभूति फीचर्स)
इतिहास साक्षी है कि 1947 में देश का आधा-अधूरा बँटवारा धार्मिक आधार पर हुआ। इसके बावजूद दोनों देशों में दोनों ही धर्मों के कुछ अनुयायी शेष रह गए। पाकिस्तान में अनेक जातियों के हिंदू रह गए और भारत में एक बड़ा मुस्लिम समाज बना रहा। प्रारम्भिक काल में सामाजिक और धार्मिक समरसता के लिए साझा संस्कृति का भरपूर प्रचार-प्रसार किया गया।
स्वाधीनता के आधी सदी बाद यदि अखंड भारत के देशों—भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश—में लोकतांत्रिक व्यवस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए, तो स्पष्ट हो जाता है कि अन्य देशों की तुलना में भारत में धार्मिक और जातीय आधार पर अधिक स्वतंत्रता है। पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू समुदाय तथा दलितों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। किंतु भारत में जातिवादी राजनीति के चलते जिस प्रकार समाज को दलित, पिछड़ा और सवर्ण में बाँटने के प्रयास किए जा रहे हैं, उससे प्रतीत होता है कि राजनीति के हमाम में लगभग सभी दल एक जैसे ही नग्न हैं।
राजनीतिज्ञों को आम आदमी से कोई सरोकार नहीं दिखता। उनका मुख्य उद्देश्य केवल अपनी राजनीतिक सत्ता को स्थायी बनाए रखना है। यदि ऐसा न होता, तो भारत में सत्ता पक्ष जातीय आधार पर भेदभावपूर्ण प्रावधानों को लागू करने का दुस्साहस न करता। जिन शिक्षा संस्थानों का दायित्व प्रतिभावान छात्र-छात्राओं की क्षमता को निखारना और उनके कौशल का विकास करना है, वही संस्थान आज भेदभाव और जातीय विघटन के केंद्र बनते जा रहे हैं।
अस्पृश्यता और छुआछूत का वह अध्याय, जो भारतीय समाज से लगभग लुप्त हो चुका था, अब पुराने और अप्रामाणिक कुतर्कों के सहारे पुनः जीवंत किया जा रहा है। शिक्षा संस्थानों में अध्ययन-अध्यापन की जगह छात्र संगठन राष्ट्रीय राजनीति में हस्तक्षेप करने लगे हैं। छात्रों को भी जातीय आधार पर बाँटा जा रहा है, जिसका सीधा और प्रतिकूल प्रभाव सामाजिक समरसता पर पड़ रहा है।
इस स्थिति का दोषी कौन है? क्या सत्ता अपने भीतर के अंतर्विरोधों से मुक्ति पाने के लिए छात्र-छात्राओं को भ्रमित कर अराजकता को बढ़ावा दे रही है? या फिर विघटनकारी शक्तियाँ युवाओं को उकसा कर राष्ट्र को खंडित करने की दिशा में कार्य कर रही हैं? यह स्पष्ट नहीं है। परंतु सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि शिक्षा के वातावरण को विषाक्त बनाकर देश को किस दिशा में ले जाया जा रहा है?
