इंदिरा गांधी और RAW: जब देश की सबसे ताकतवर महिला पर लगा खुफिया एजेंसी के दुरुपयोग का आरोप

 
Why Did the Opposition Accuse Indira Gandhi of Misusing RAW? | Emergency Era Exposed

आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे दौर की, जब भारत की राजनीति में तूफान आ गया था। एक ऐसी महिला, जिसे 'आयरन लेडी' कहा जाता था, लेकिन जिस पर विपक्ष ने लगाया था सबसे गंभीर आरोप – खुफिया एजेंसी रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) का दुरुपयोग! जी हां, इंदिरा गांधी पर विपक्ष ने ये आरोप क्यों लगाया? क्या था इसके पीछे का राज? और कैसे ये आरोप पूरे देश को इमरजेंसी के अंधेरे में धकेल दिए ? चलिए, शुरू करते हैं इस interesting story को

 सबसे पहले थोड़ा बैकग्राउंड समझते है। 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद में जन्मीं इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू, पंडित जवाहरलाल नेहरू की इकलौती संतान। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी मां कमला नेहरू के साथ वो जेल भी गईं। 1942 में फिरोज गांधी से शादी, दो बेटे – राजीव और संजय। लेकिन राजनीति में उनका असली सफर शुरू हुआ 1950 के दशक में।1964 में नेहरू जी के निधन के बाद, लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने। लेकिन 1966 में शास्त्री जी की रहस्यमय मौत के बाद इंदिरा को कांग्रेस के सिंडिकेट ने 'गूंगी गुड़िया' कहकर प्रधानमंत्री बना दिया। सोचा, ये तो बस नाम की PM होंगी, असली सत्ता सिंडिकेट के हाथ में रहेगी। लेकिन इंदिरा ने सबको करारा जवाब दिया! 1969 में कांग्रेस में स्प्लिट हो गया – इंदिरा ने अपनी अलग कांग्रेस (R) बना ली। और 1971 के लोकसभा चुनाव में 'गरीबी हटाओ' के नारे के साथ 352 सीटें जीत लीं। बांग्लादेश युद्ध में पाकिस्तान को धूल चटा दी। इंदिरा अब 'दुर्गा' बन चुकी थीं!लेकिन दोस्तों, यहीं से मुसीबतें शुरू हुईं। 1971 के चुनाव में रायबरेली से इंदिरा ने हराया था समाजवादी नेता राज नारायण को। राज नारायण ने हार मान ली? नहीं! उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में इंदिरा के चुनाव पर याचिका दायर कर दी। आरोप लगाया – इंदिरा ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया! गवर्नमेंट अफसरों को चुनाव कैंपेन में लगाया, Yashpal Kapoor नाम के अधिकारी को अपना एजेंट बनाया जबकि वो सरकारी नौकरी में थे। कोर्ट ने 12 जून 1975 को फैसला सुनाया – इंदिरा का चुनाव अमान्य! छह साल के लिए चुनाव लड़ने पर बैन

विपक्ष खुश हो गया। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में 'संपूर्ण क्रांति' का आंदोलन जोर पकड़ लिया। पूरे देश में विरोध प्रदर्शन। लेकिन इंदिरा ने हार नहीं मानी। सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां जस्टिस कृष्णा अय्यर ने स्टे दे दिया – PM बनी रह सकती हैं, लेकिन वोटिंग का अधिकार नहीं। विपक्ष चिल्ला उठा – इस्तीफा दो रॉ का दुरुपयोग! 1968 में इंदिरा ने ही रॉ की स्थापना की थी। आरएन काओ को पहला चीफ बनाया। रॉ को बनाया गया था एक्सटर्नल इंटेलिजेंस के लिए – पाकिस्तान, चीन जैसी चुनौतियों से निपटने को। लेकिन विपक्ष का आरोप था कि इंदिरा ने इसे अपनी 'प्रेटोरियन गार्ड' बना लिया! यानी, निजी सेना, जो राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए इस्तेमाल हो रही थी। 25 जून 1975 को इंदिरा ने राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से इमरजेंसी की सिफारिश कर दी। आर्टिकल 352 के तहत 'इंटरनल डिस्टर्बेंस' का हवाला देकर। रातोंरात देश में अंधेरा छा गया! 1 लाख से ज्यादा विपक्षी नेता, छात्र, पत्रकार गिरफ्तार। जेपी, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी – सब जेल में! अखबारों की बिजली काट दी गई। संविधान में 39वां संशोधन – इंदिरा के चुनाव को वैध ठहराने के लिए।

अब रॉ कहां आता है? दोस्तों, इमरजेंसी के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का तो खूला इस्तेमाल हुआ – विपक्षियों पर जासूसी, उनके फोन टैपिंग, मीटिंग्स पर नजर। लेकिन रॉ, जो एक्सटर्नल एजेंसी थी, उसके भी आरोप लगे। विपक्ष कहता था कि इंदिरा ने रॉ को 'डोमेस्टिक सर्जिलांस' के लिए मोड़ दिया। आरएन काओ, जो इंदिरा के करीबी थे, पर शक किया गया कि वो PMO के जरिए विपक्ष की एक्टिविटीज ट्रैक कर रहे थे। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि रॉ ने विदेशों में बैठे विपक्षी लीडर्स की मॉनिटरिंग की, जैसे जेपी के इंटरनेशनल कनेक्शन्स।

मोरारजी देसाई जैसे नेता बाद में PM बने तो खुलासा किया – "रॉ इंदिरा की प्रेटोरियन गार्ड थी!" उन्होंने रॉ का बजट काटा, कई डिविजन्स बंद कर दिए। आरोप था कि रॉ ने न सिर्फ विपक्ष पर, बल्कि आर्मी और पुलिस के अंदर भी 'लॉयल्टी चेक' के लिए इस्तेमाल किया गया। 1975 में गुजरात और तमिलनाडु की नॉन-कांग्रेस गवर्नमेंट्स को गिराने से पहले IB-RAW की जॉइंट रिपोर्ट्स का इस्तेमाल। आर्टिकल 356 का 50 बार दुरुपयोग – इंदिरा के दौर में! विपक्ष चिल्लाता था, "ये लोकतंत्र नहीं, तानाशाही है!

  विपक्ष ने रॉ के दुरुपयोग का आरोप क्यों लगाया? राजनीतिक बदले की भावना: इमरजेंसी में विपक्ष को कुचला गया। जेपी आंदोलन को तोड़ने के लिए इंटेलिजेंस का खुला इस्तेमाल। बाद में शाह कमीशन (1977-79) ने खुलासा किया – IB ने 50,000 से ज्यादा फाइल्स बनाईं विपक्षियों पर।
रॉ की सेंट्रलाइजेशन: इंदिरा ने इंटेलिजेंस को PMO के सीधे कंट्रोल में ला दिया। काओ जैसे अफसर उनके वफादार। विपक्ष को डर था कि ये एजेंसी नेशनल सिक्योरिटी से ज्यादा पर्सनल सिक्योरिटी के लिए इस्तेमाल हो रही।

विपक्ष के मुताबिक, ये दुरुपयोग इसलिए क्योंकि इंदिरा को सत्ता का नशा चढ़ गया था। लेकिन इंदिरा समर्थक कहते – ये नेशनल सिक्योरिटी के लिए जरूरी था, विपक्ष तो अराजकता फैला रहा था! 1977 में इंदिरा ने सोचा, चुनाव जीत लूंगी। लेकिन जनता ने नकार दिया! जनता पार्टी की जीत, मोरारजी देसाई PM। इंदिरा हार गईं रायबरेली से ही – राज नारायण से! रॉ का बजट 30% कट, कई ऑपरेशन्स बंद। लेकिन 1980 में इंदिरा वापसी कर आईं।ये दौर हमें सिखाता है – लोकतंत्र में कोई भी एजेंसी सत्ता के गुलाम नहीं हो सकती। आज भी CBI, ED पर दुरुपयोग के आरोप लगते हैं। क्या इतिहास खुद को दोहरा रहा?

तो  ये थी इंदिरा गांधी पर रॉ दुरुपयोग के आरोपों की पूरी कहानी। क्या आपको लगता है ये आरोप जायज थे? कमेंट बॉक्स में अपनी राय बताएं. 

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