क्यों चर्चा में है IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा?

13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद छोड़ी नौकरी, सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा—‘सबसे ज्यादा मैंने ही पाया है’
 
क्यों चर्चा में है IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा?

(मनोज कुमार अग्रवाल—विनायक फीचर्स)

कहा जाता है कि सितारों से आगे भी एक जहां होता है। शायद इसी नए मुकाम की तलाश में उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से अलग होने का फैसला किया है। उन्होंने 30 अगस्त 2026 को आईएएस पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर सबको चौंका दिया। उस समय वह उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं।

दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस मामले में राज्यपाल को पत्र लिखकर अधिकारियों के सम्मान की रक्षा की मांग भी उठाई है।

हालांकि दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे की घोषणा तो की है, लेकिन इसके पीछे किसी विशेष प्रशासनिक या राजनीतिक कारण का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया है। ऐसे में उनके फैसले को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं जरूर चल रही हैं।

जिलाधिकारी के रूप में रही हैं चर्चित

दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों में जिलाधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। मिर्जापुर और देवरिया में उनके कार्यकाल को खास तौर पर जनसरोकार से जुड़े कामों और उनकी कार्यशैली के कारण याद किया जाता है।

मई 2026 के पहले सप्ताह में उन्हें देवरिया के जिलाधिकारी पद से हटाकर राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात किया गया था। डीएम पद से हटने के बाद उनकी कुछ सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में आई थीं। अब इस्तीफे के बाद एक बार फिर उनकी पिछली तैनातियों और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर बहस शुरू हो गई है।

UPSC की कठिन राह से हासिल की IAS की सेवा

भारतीय प्रशासनिक सेवा देश की सबसे प्रतिष्ठित सरकारी सेवाओं में शामिल मानी जाती है। हर साल लाखों युवा यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने का सपना देखते हैं। इसके लिए अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं और बेहद कठिन प्रतिस्पर्धा के बाद सीमित संख्या में उम्मीदवार अंतिम रूप से चयनित होते हैं।

ऐसे में एक आईएएस अधिकारी का वर्षों की सेवा के बाद पद छोड़ने का निर्णय स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। खासकर तब, जब अधिकारी के करियर में आगे लंबे समय तक सेवा और पदोन्नति की संभावनाएं मौजूद हों।

लेकिन किसी भी प्रतिष्ठित पद पर पहुंच जाना जीवन की पूर्ण संतुष्टि की गारंटी नहीं है। कई बार व्यक्ति को उपलब्धियों के बावजूद किसी और उद्देश्य की तलाश रहती है। दिव्या मित्तल की पोस्ट भी इसी तरह के आत्ममंथन की ओर संकेत करती है।

IIT दिल्ली से पढ़ाई, IIM बेंगलुरु से MBA

दिव्या मित्तल का शैक्षणिक और पेशेवर सफर भी काफी प्रभावशाली रहा है। वह मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं और उनका जन्म दिल्ली में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली में हुई। इसके बाद उन्होंने IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बेंगलुरु से MBA किया।

शिक्षा पूरी करने के बाद उनकी नौकरी लंदन में लगी। उनके पति गगनदीप सिंह की भी लंदन में अच्छी नौकरी थी। दोनों के पास विदेश में बेहतर करियर और आकर्षक वेतन के अवसर थे, लेकिन उन्होंने भारत लौटने का निर्णय लिया।

गगनदीप सिंह ने भी यूपीएससी की परीक्षा पास की और 2011 बैच के भारतीय व्यापार सेवा अधिकारी के रूप में केंद्र सरकार में सेवा की। उन्होंने 2022 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी।

‘सब कुछ पा लेने के बाद भी कुछ अधूरा था’

दिव्या मित्तल की सोशल मीडिया पोस्ट उनके इस्तीफे के पीछे की व्यक्तिगत सोच को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने लिखा कि साधारण परिवेश में पली-बढ़ी होने के बावजूद उन्होंने सफल जीवन का सपना देखा था। मेहनत करके IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु तक पहुंचीं और इसके बाद लंदन में नौकरी मिली।

लेकिन विदेश में बेहतर करियर मिलने के बावजूद उन्हें अपने देश से दूर रहने का अहसास खलता रहा। उन्होंने अपनी पोस्ट में देश की मिट्टी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की क्षमता इसी देश की देन है।

उन्होंने यह भी लिखा कि प्रशासनिक सेवा के 13 वर्षों में उन्हें बहुत कुछ सीखने और समाज के लिए काम करने का अवसर मिला।

देवरिया और मिर्जापुर से मिली सीख का किया जिक्र

दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में अपने प्रशासनिक अनुभवों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देवरिया ने उन्हें सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना कोई विकल्प नहीं, बल्कि कर्तव्य है। वहीं मिर्जापुर के अनुभव को उन्होंने असंभव को केवल एक राय मानने की सीख से जोड़ा।

मां विंध्यवासिनी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि शक्ति किसी पद से नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा और लोगों के विश्वास से मिलती है।

अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए उन्होंने यह भी लिखा कि उन्हें पहले लगता था कि वह समाज को कुछ देने आई हैं, लेकिन समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें जितना देने का अवसर मिला, उससे कहीं अधिक उन्होंने स्वयं पाया।

इस्तीफा अभी पूरी प्रक्रिया से गुजरेगा

दिव्या मित्तल के इस्तीफे की घोषणा के बाद भी प्रशासनिक रूप से यह प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। उनका इस्तीफा निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के तहत केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर विचार के बाद ही अंतिम रूप लेगा। नियमानुसार सरकार के पास इस्तीफे को स्वीकार या अस्वीकार करने का विकल्प होता है।

इस बीच कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया चर्चाओं में उनके राजनीति में आने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। इन अटकलों को उनके मिर्जापुर कार्यकाल और वहां की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक ऐसी चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और दिव्या मित्तल स्वयं राजनीति में जाने की बात से इनकार कर चुकी हैं।

फिलहाल उनके इस्तीफे का वास्तविक कारण वही बेहतर जानती हैं। उनकी सार्वजनिक पोस्ट से इतना जरूर स्पष्ट होता है कि यह फैसला उनके लिए केवल नौकरी छोड़ने का नहीं, बल्कि जीवन की दिशा को लेकर किया गया व्यक्तिगत निर्णय है। अब देखना होगा कि सरकार उनके इस्तीफे पर क्या निर्णय लेती है और प्रशासनिक सेवा से बाहर निकलने के बाद दिव्या मित्तल अपने जीवन का अगला अध्याय किस दिशा में लिखती हैं।

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