Windfall Tax Hike: सरकार ने डीजल और ATF के निर्यात पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स; पेट्रोल पर राहत बरकरार, आज से लागू हुईं नई दरें

Windfall Tax Hike: Government raises windfall tax on diesel and ATF exports; relief on petrol remains; new rates effective from today.
 
Windfall Tax Hike: सरकार ने डीजल और ATF के निर्यात पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स; पेट्रोल पर राहत बरकरार, आज से लागू हुईं नई दरें

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में आ रहे उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने सोमवार देर रात डीजल और एटीएफ (ATF - एविएशन टर्बाइन फ्यूल/हवाई ईंधन) के निर्यात (Export) पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स यानी स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में बढ़ोतरी कर दी है।

राजस्व विभाग की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, टैक्स की ये नई दरें आज (मंगलवार), 16 जून 2026 से देश भर में प्रभावी हो गई हैं। सरकार की नियमित समीक्षा प्रक्रिया के तहत ये दरें अगले दो हफ्तों (15 दिनों) तक लागू रहेंगी।

डीजल और हवाई ईंधन (ATF) पर कितना बढ़ा टैक्स?

नोटिफिकेशन के मुताबिक, निर्यातकों पर लगने वाले टैक्स में निम्नलिखित बदलाव किए गए हैं:

  • डीजल निर्यात ड्यूटी: डीजल के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी को 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ाया गया है। इस बढ़ोतरी के बाद अब टैक्स की दर 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 14 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

  • ATF निर्यात ड्यूटी: हवाई ईंधन (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) पर सरकार ने ज्यादा कड़ा रुख अपनाया है। इसके निर्यात पर लगने वाले टैक्स को सीधे 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिया गया है, जिससे यह अब 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 12.5 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

पेट्रोल एक्सपोर्ट करने वालों को राहत, दरों में कोई बदलाव नहीं

एक तरफ जहां डीजल और एटीएफ पर टैक्स बढ़ाया गया है, वहीं पेट्रोल निर्यात करने वाली रिफाइनिंग कंपनियों को सरकार ने राहत दी है। पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसे पहले की तरह ही 1.5 रुपये प्रति लीटर पर बरकरार रखा गया है।

आम जनता पर क्या होगा असर? खुदरा कीमतें प्रभावित होंगी या नहीं?

इस फैसले को लेकर आम उपभोक्ताओं के मन में उठने वाले सबसे बड़े सवाल का जवाब देते हुए अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है यह टैक्स केवल देश में उत्पादित कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के विदेशों में निर्यात (Export) पर लागू होता है। इसका घरेलू बाजार में बेचे जाने वाले ईंधन पर लगने वाले टैक्स से कोई सीधा संबंध नहीं है। इसलिए, स्थानीय बाजार में पेट्रोल, डीजल या हवाई ईंधन की घरेलू खुदरा कीमतों (Retail Prices) पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।"

हर 15 दिनों में क्यों बदलती हैं दरें?

यह बदलाव 26 मार्च को जारी और बाद में 30 मई को संशोधित किए गए सेंट्रल एक्साइज नोटिफिकेशन में नए संशोधन के जरिए किए गए हैं। भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की तात्कालिक कीमतों और रिफाइनिंग कंपनियों के मार्जिन को ट्रैक करते हुए हर 15 दिनों में विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करती है। जब वैश्विक स्तर पर कंपनियों को अप्रत्याशित या अत्यधिक लाभ (Windfall Gains) होने लगता है, तो सरकार देश के राजस्व को संतुलित करने के लिए इस टैक्स को बढ़ा देती है।

पिछली समीक्षा (1 जून) में सरकार ने घटाई थी ड्यूटी

गौरतलब है कि इससे पहले 31 मई को जारी की गई समीक्षा रिपोर्ट में सरकार ने निर्यातकों को राहत देते हुए टैक्स की दरों में बड़ी कटौती की थी, जो 1 जून से प्रभावी हुई थी। उस समय:

  • पेट्रोल पर ड्यूटी को 3 रुपये से घटाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर किया गया था।

  • डीजल पर टैक्स को 16.5 रुपये से घटाकर 13.5 रुपये प्रति लीटर किया गया था।

    लेकिन दो हफ्तों के भीतर वैश्विक समीकरण बदलने के कारण सरकार को एक बार फिर डीजल और एटीएफ पर टैक्स बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा है।

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