यूपी मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन से बाराबंकी के असलम खान बने आत्मनिर्भर, 24 तालाब और 2 नर्सरी से लिखी सफलता की नई गाथा

With the guidance of UP Fisheries Department, Aslam Khan of Barabanki became self-reliant, wrote a new success story with 24 ponds and 2 nurseries
 
यूपी मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन से बाराबंकी के असलम खान बने आत्मनिर्भर, 24 तालाब और 2 नर्सरी से लिखी सफलता की नई गाथा

लखनऊ,  अगस्त 2025। सरकारी योजनाओं और उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन का लाभ उठाकर बाराबंकी के असलम खान ने संघर्ष से सफलता तक का सफर तय किया है। केले की खेती में असफलता के बाद असलम ने मत्स्य पालन को अपनाया और आज वे जिले के सफल मत्स्य पालकों में शुमार हैं। 2018 में जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले असलम अब न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि अन्य युवाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।

केले की खेती से मत्स्य पालन तक

फतेहपुर तहसील के बकरापुर गांव निवासी जव्वाद खान के पुत्र असलम खान (40) ने 2014 में करीब 8 एकड़ भूमि पर केले की खेती शुरू की थी। शुरुआती लाभ के बाद आय में गिरावट आई और 2016 तक यह व्यवसाय बंद करना पड़ा। इसके बाद वे नए विकल्प की तलाश में जुटे।

मत्स्य पालन में शुरुआती कठिनाइयाँ और सफलता

ग्राम गंगवारा के मत्स्य पालक मोहम्मद आसिफ सिद्दीकी के फार्म को देखकर प्रेरित हुए असलम ने 27,000 वर्गफुट क्षेत्र में तीन तालाब बनाकर पंगेशियस मछली पालन शुरू किया। पहले चरण में बीज की कमी और तकनीकी जानकारी के अभाव में घाटा हुआ, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। दोबारा प्रयास करते हुए उन्हीं तालाबों में 35 हजार फिंगरलिंग डालीं और छह महीने में 21 टन मछली का उत्पादन कर 8.40 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने 2018 में एक और तालाब तैयार किया और भारतीय मेजर कार्प प्रजातियों का भी पालन शुरू किया।

24 तालाब और 2 नर्सरी से बड़ा कारोबार

आज असलम 8 एकड़ भूमि पर 24 तालाब और 2 नर्सरी संचालित कर रहे हैं। वर्ष 2024-25 में उन्होंने 3 लाख बीज डाले, जिससे 162 टन मछली की बिक्री की जा चुकी है। अभी भी उनके पास 40 हजार से अधिक मछलियाँ उपलब्ध हैं, जिनकी बिक्री दिसंबर से शुरू होगी। इसके साथ ही उन्होंने जनवरी 2019 से एबीएस मत्स्य आहार की डीलरशिप ली और वर्तमान में बाराबंकी, लखनऊ, सीतापुर, अयोध्या, उन्नाव, बहराइच और गोंडा के 350 किसानों तक फीड पहुँचा रहे हैं।

युवाओं को रोजगार, किसानों को सहयोग

असलम वर्तमान में 10 युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार दे रहे हैं, जो फार्म संचालन और फीड वितरण में सहयोग करते हैं। वे 350-400 मत्स्य किसानों से जुड़े हैं और उन्हें आवश्यक सेवाएँ भी प्रदान कर रहे हैं। अपने फार्म पर उन्होंने आरएएस (Recirculatory Aquaculture System) इकाई भी स्थापित की है, जिससे वे सर्दियों में बीज रियरिंग कर फरवरी-मार्च में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाला बीज उपलब्ध कराएँगे। भविष्य में वे मत्स्य किसानों के लिए एफपीओ (Farmer Producer Organisation) भी गठित करना चाहते हैं।

सरकारी योजनाओं का असर

असलम ने अपनी सफलता का श्रेय राज्य सरकार की योजनाओं और मत्स्य विभाग के निरंतर मार्गदर्शन को दिया। मत्स्य विभाग के निदेशक एनएस रहमानी ने कहा मत्स्य पालन से प्रदेश में युवाओं और महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की नई कहानियाँ लिखी हैं। यह केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जमीनी सफलता को दर्शाता है। सरकार का लक्ष्य है कि हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुँचाया जाए और लोग प्रदेश के आर्थिक विकास में सहभागी बनें।”

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