मां का संबल लेकर, नई राह गढ़ने आ रही हैं ‘गंगा माई की बेटियां’
Thu, 18 Sep 2025
लखनऊ डेस्क (प्रत्यूष पाण्डेय)। समाज की परंपराओं और उम्मीदों का बोझ पीढ़ी दर पीढ़ी महिलाओं ने उठाया है। अक्सर उनके फैसलों पर सवाल उठे, संघर्षों में उनकी आवाज़ दबा दी गई और उन्हें अकेले ही जीवन की लड़ाई लड़नी पड़ी। लेकिन हर बार महिलाएं टूटीं नहीं, बल्कि रूढ़ियों को तोड़ते हुए अपने लिए नई राह बनाई। आने वाला धारावाहिक ‘गंगा माई की बेटियां’ भी ऐसी ही प्रेरक कहानी बयां करता है।
इस शो में गंगा माई की कथा दिखाई गई है—एक ऐसी मां जो कठिन परिस्थितियों और समाज की आलोचनाओं के बावजूद अपने तीन बेटियों का पालन-पोषण करती है। घर चलाने के लिए अथक मेहनत करने वाली गंगा माई का सपना है कि उनकी बेटियां पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हों। यह शो 22 सितंबर, सोमवार से ज़ी टीवी पर हर रात 9 बजे प्रसारित होगा।
‘गंगा माई की बेटियां’ एक संवेदनशील पारिवारिक गाथा है जो यह संदेश देती है कि बेटियां बोझ नहीं बल्कि गर्व की वजह होती हैं। वाराणसी की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर आधारित यह सीरियल, ज़ी कन्नड़ के लोकप्रिय शो ‘पुट्टकाना मक्कलु’ का हिंदी रूपांतरण है। इसे रवि दुबे और सरगुन मेहता के प्रोडक्शन हाउस ड्रीमियाता ड्रामा ने प्रस्तुत किया है।
शुभांगी लाटकर, जो गंगा माई का किरदार निभा रही हैं, कहती हैं—
“गंगा माई सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि हर उस औरत की पहचान है जो अपमान और निराशा को पीछे छोड़ सम्मान और आत्मबल को चुनती है। वह अपने दर्द को ताकत बनाकर अपनी बेटियों को हिम्मत, आत्मसम्मान और दया से जीना सिखाती है।”
तीनों बेटियों के किरदारों के बारे में कलाकारों ने अपने विचार साझा किए—
अमनदीप सिद्धू (स्नेहा) : “स्नेहा परिवार की ऊर्जा है, वह उद्देश्यपूर्ण और कभी हार न मानने वाली महिला है।”
सृष्टि जैन (सहाना) : “सहाना परिवार की शांति है, उसका पाक कला और स्नेह सबको जोड़े रखता है। इस किरदार से मैंने सीखा कि कोमलता भी एक बड़ी ताकत है।”
वैष्णवी प्रजापति (सोनी) : “सोनी घर में मासूमियत और ताजगी लेकर आती है। यह किरदार मुझे याद दिलाता है कि सकारात्मक सोच और जिज्ञासा ही परिवार की असली शक्ति हैं।”
