भदोही में प्रसव पीड़ा से जूझती महिला को अस्पताल से लौटाने का आरोप, सड़क पर बच्चे को जन्म देने का मामला

परिजनों का आरोप- जाति और बदबू का हवाला देकर अस्पताल से बाहर किया; CMO ने गंभीर एनीमिया के चलते BHU रेफर किए जाने की बात कही
 
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भदोही। उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के ज्ञानपुर स्थित बलवंत सिंह सरकारी अस्पताल से जुड़ी एक कथित घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों के साथ व्यवहार और संवेदनशीलता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची वनवासी समाज की एक गर्भवती महिला को उसकी जाति और शरीर से बदबू आने की बात कहकर अस्पताल से बाहर कर दिया गया।

इसके बाद अस्पताल के गेट के बाहर ही महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और उसने सड़क पर बच्चे को जन्म दिया।घटना के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने चादर आदि की मदद से महिला का प्रसव कराया। मामले की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली और मरीजों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जातीय भेदभाव का लगाया गया आरोप

परिजनों और स्थानीय स्तर पर सामने आए आरोपों के मुताबिक, महिला प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल पहुंची थी। आरोप है कि अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों ने उसकी जाति और शरीर से दुर्गंध आने की बात कहते हुए उसे वहां से जाने को कहा।

यदि जांच में जातीय भेदभाव के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल मरीज के साथ गंभीर व्यवहार संबंधी मामला होगा, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में समान उपचार और गरिमा के अधिकार को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

CMO ने बताया- हीमोग्लोबिन महज 5 ग्राम था

दूसरी ओर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और प्रशासन की ओर से घटना को लेकर अलग पक्ष सामने आया है। अधिकारियों के मुताबिक, महिला का हीमोग्लोबिन स्तर करीब 5 ग्राम था और उसकी स्थिति गंभीर थी। इसी वजह से उसे बेहतर उपचार के लिए बीएचयू (BHU) रेफर किया गया था।

प्रशासन का कहना है कि महिला को गंभीर एनीमिया की स्थिति के कारण उच्च चिकित्सा केंद्र भेजा गया। ऐसे में अब पूरे मामले में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि महिला को अस्पताल से किस परिस्थिति में और किस प्रक्रिया के तहत रेफर किया गया तथा अस्पताल में उसके साथ व्यवहार कैसा रहा।

जांच से सामने आएगी पूरी सच्चाई

इस घटना में एक ओर महिला के साथ कथित जातीय भेदभाव और अस्पताल से बाहर किए जाने के आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन गंभीर एनीमिया के कारण BHU रेफर किए जाने की बात कह रहा है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम वास्तव में क्या था और अस्पताल की ओर से निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया गया या नहीं।

प्रसव जैसी आपात स्थिति में किसी भी महिला को समय पर चिकित्सा सहायता, सम्मान और सुरक्षित वातावरण मिलना महत्वपूर्ण है। इस मामले में भी जांच के जरिए तथ्यों को सामने लाना और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या भेदभाव पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करना आवश्यक होगा।

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