गोयल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में प्राथमिक आघात उपचार पर कार्यशाला आयोजित
लखनऊ डेस्क, आर.एल. पाण्डेय। गोयल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, लखनऊ में आयुष चिकित्सकों की आपातकालीन चिकित्सा दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से Primary Trauma Care (प्राथमिक आघात उपचार) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन लाइफ लाइन फाउंडेशन, वडोदरा, गुजरात द्वारा एचडीएफसी बैंक के सामाजिक दायित्व कार्यक्रम PARIVARTAN के अंतर्गत AYUSH Cares पहल के सहयोग से किया गया।
आयोजकों के अनुसार, यह कार्यक्रम राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM), नई दिल्ली और आयुष मंत्रालय के मार्गदर्शन एवं सहयोग से वर्ष 2022 से देशभर में संचालित किया जा रहा है।
कार्यशाला कॉलेज के चेयरमैन इं. महेश कुमार गोयल के आशीर्वाद से सुबह 9 बजे शुरू होकर शाम 4 बजे तक चली। कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर अविनाश चन्द्र श्रीवास्तव और मुख्य अतिथि डॉ. आनंद मिश्रा, सर्जन, श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल हॉस्पिटल, लखनऊ ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
शुरुआती उपचार और तकनीकी ज्ञान पर जोर
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रधानाचार्य प्रोफेसर अविनाश चन्द्र श्रीवास्तव ने चिकित्सकों को आपातकालीन परिस्थितियों में रोगी के जीवन की रक्षा के लिए उपलब्ध नवीन संसाधनों और तकनीकी ज्ञान का प्रभावी उपयोग करने का संदेश दिया। उन्होंने प्राथमिक स्तर पर त्वरित निर्णय लेने और उचित उपचार प्रक्रिया अपनाने के महत्व पर जोर दिया।
मुख्य अतिथि डॉ. आनंद मिश्रा ने दुर्घटना अथवा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में ‘Golden Hours’ की महत्ता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने अस्पताल पहुंचने से पहले घायल व्यक्ति को दी जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा की विभिन्न प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया।
इस दौरान प्रतिभागियों को ट्रॉमा के प्रारंभिक मूल्यांकन, घायल व्यक्ति की स्थिति का तेजी से आकलन, वायुमार्ग (Airway) को सुरक्षित रखने, श्वसन (Breathing) एवं रक्त संचार का मूल्यांकन, रक्तस्राव को नियंत्रित करने तथा फ्रैक्चर और स्पाइनल इंजरी की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया गया। साथ ही मरीज को सुरक्षित तरीके से उच्च चिकित्सा केंद्र पर रेफर करने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण से बढ़ाई व्यावहारिक दक्षता
कार्यशाला के आयोजक एवं प्रशिक्षक अक्षता मिश्र और दिव्येश पडियार ने हैंड्स-ऑन डेमोस्ट्रेशन और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं सही निर्णय लेने का अभ्यास कराया।
प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि ट्रॉमा की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर और सही तरीके से दी गई प्राथमिक चिकित्सा घायल व्यक्ति की स्थिति को संभालने और जीवन रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
चिकित्सकों और आयुष क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
कार्यशाला में गोयल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के उप-प्रधानाचार्य प्रोफेसर अखिलेश कुमार सिंह, मेडिकल सुप्रीटेंडेंट प्रोफेसर मिथिलेश वर्मा, डीन एकेडमिक प्रोफेसर सुनील गुप्ता, उप-चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, प्रो. अमर जीत यादव, प्रो. अरविंद कुमार श्रीवास्तव, डॉ. अंकुर सक्सेना, प्रोफेसर संतोष अर्जुनागी, प्रोफेसर अमिल शुक्ला, प्रोफेसर सुबोध अस्थाना, प्रोफेसर आलोक कुमार श्रीवास्तव, प्रोफेसर जॉली सक्सेना, प्रोफेसर रंजना राजपूत और डॉ. माधवी दीक्षित सहित कॉलेज के अन्य प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, मेडिकल ऑफिसर, असिस्टेंट प्रोफेसर तथा आयुष क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों ने भाग लिया।
प्रतिभागियों ने कार्यशाला को उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से आपातकालीन चिकित्सा और प्राथमिक ट्रॉमा प्रबंधन से जुड़ी व्यावहारिक दक्षताओं को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
