विश्व ब्रेल दिवस: लुई ब्रेल जिन्होंने अंधेरे को ज्ञान की रोशनी में बदल दिया

World Braille Day: Louis Braille – Darkness Transformed into Light of Knowledge
 
विश्व ब्रेल दिवस: लुई ब्रेल — जिन्होंने अंधेरे को ज्ञान की रोशनी में बदल दिया
प्रतिवर्ष 4 जनवरी को पूरी दुनिया में 'विश्व ब्रेल दिवस' मनाया जाता है। यह दिन उस महानायक की याद में समर्पित है जिसने दृष्टिबाधित समाज के लिए शिक्षा और आत्मनिर्भरता के बंद दरवाजे खोल दिए। लुई ब्रेल ने यह साबित किया कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए आँखों की नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही माध्यम की आवश्यकता होती है।

Snsnn

लुई ब्रेल का जीवन और संघर्ष

​दृष्टिहीनों के मसीहा कहे जाने वाले लुई ब्रेल का जन्म 4 जनवरी 1809 को फ्रांस के एक छोटे से गाँव कूप्रे में हुआ था। उनके जीवन में एक दुखद मोड़ तब आया जब मात्र 3 वर्ष की आयु में अपने पिता की कार्यशाला में औजारों से खेलते हुए उनकी एक आँख में गंभीर चोट लग गई। संक्रमण फैलने के कारण धीरे-धीरे उनकी दोनों आँखों की रोशनी चली गई।
​अंधकारमय जीवन के बावजूद लुई की सीखने की जिज्ञासा कम नहीं हुई। पेरिस के 'रॉयल इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड यूथ' में पढ़ाई के दौरान उन्होंने महसूस किया कि उस समय की प्रणालियाँ बहुत कठिन थीं। इसी कमी को दूर करने के लिए उन्होंने मात्र 16 वर्ष की आयु में 'ब्रेल लिपि' का आविष्कार किया। हालाँकि, उनके इस महान कार्य को आधिकारिक मान्यता उनके निधन (1852) के कई वर्षों बाद 1868 में मिली।

​ब्रेल लिपि: सशक्तिकरण का माध्यम

​ब्रेल लिपि केवल उभरे हुए बिंदुओं का समूह नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के लिए स्वाभिमान की भाषा है। इसके महत्व को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
​स्वतंत्रता: इसने दृष्टिबाधितों को दूसरों पर निर्भर रहे बिना पढ़ने और लिखने की शक्ति दी।
​शिक्षा का विस्तार: इतिहास, गणित (बीजगणित, ज्यामिति) और विज्ञान जैसे विषयों को सुलभ बनाया।

​संगीत में योगदान: लुई ब्रेल स्वयं एक कुशल संगीतकार थे

उन्होंने संगीत के सुरों को पढ़ने के लिए भी ब्रेल संकेतों का निर्माण किया। वैश्विक मान्यता और सम्मान​संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त 'विश्व ब्रेल दिवस' आज समावेशी शिक्षा और मानवाधिकारों का प्रतीक बन चुका है। लुई ब्रेल के योगदान को अमर बनाने के लिए दुनिया भर में कई कदम उठाए गए हैं:
​डाक टिकट और स्मारक: विश्व के अनेक देशों ने उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किए हैं।
​भारत का सम्मान: भारत सरकार ने साल 2009 में लुई ब्रेल की 200वीं जयंती के अवसर पर विशेष डाक टिकट जारी कर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। ​संस्थान: आज दुनिया भर में उनके नाम से विद्यालय और शोध संस्थान चल रहे हैं जो उनके विजन को आगे बढ़ा रहे हैं।

​मानवता के प्रति अद्वितीय सेवा

​लुई ब्रेल का नाम इतिहास के पन्नों में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। उन्होंने दृष्टिबाधित व्यक्तियों को 'दया का पात्र' बनने से बचाकर उन्हें 'ज्ञान का अधिकारी' बनाया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि बाधाएं चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, नवाचार और सहानुभूति के जरिए उन्हें दूर किया जा सकता है।
​आज विश्व ब्रेल दिवस पर हम उस महान व्यक्तित्व को नमन करते हैं, जिन्होंने स्पर्श को एक वैश्विक भाषा बना दिया और मानवता को एक अनमोल उपहार दिया।

Tags