विश्व नृत्य दिवस 2026: "जब शब्द कम पड़ जाएं, तो पैर बोलने लगते हैं" — नृत्यांगना सौम्या वर्मा
क्यों मनाया जाता है 29 अप्रैल को ही यह दिन?
भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा सौम्या वर्मा ने इस विशेष दिन के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 29 अप्रैल की तारीख का चयन एक खास वजह से किया गया था। इसी दिन आधुनिक बैले (Modern Ballet) के जनक माने जाने वाले महान नर्तक जीन जॉर्जेस नोवेरे का जन्म हुआ था। उनकी याद में और नृत्य कला को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से हर साल यह दिन पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है।
नृत्य: मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का आधार
सौम्या वर्मा के अनुसार, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नृत्य एक बेहतरीन 'थेरेपी' की तरह काम करता है:
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तनाव से मुक्ति: नृत्य करने से मस्तिष्क में एंडोर्फिन (Endorphins) रिलीज होते हैं, जो तनाव को कम करने में सहायक हैं।
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शारीरिक फिटनेस: यह शरीर को लचीला और फिट बनाए रखने का सबसे आनंदमयी तरीका है।
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एकाग्रता: शास्त्रीय नृत्य जैसी विधाएं न केवल शरीर को अनुशासित करती हैं, बल्कि दिमाग को भी तेज और एकाग्र बनाती हैं।
विश्व नृत्य दिवस का उद्देश्य
इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के लोगों को नृत्य के प्रति जागरूक करना और विभिन्न संस्कृतियों को इस कला के माध्यम से एक मंच पर लाना है। सौम्या का मानना है कि सरकारों और समाज को इस कला की ओर अधिक ध्यान देना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी विरासत और रचनात्मकता से जुड़ी रहे।नृत्य एक ऐसी भाषा है जिसे समझने के लिए किसी अनुवाद की आवश्यकता नहीं होती। यह भावनाओं का सीधा संवाद है।" — सौम्या वर्मा



